पीएम किसान योजना का सच, चार साल में कम तो तीन साल में ज्यादा हुआ बजट खर्च
समझें क्या है पूरा मामला
- पीएम किसान योजना के बजट पर एक बड़ा RTI खुलासा हुआ है।
- पिछले सात सालों में 46 हजार 317 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो सके।
- कुल सात सालों में से चार साल पूरा बजट इस्तेमाल नहीं हुआ।
- वहीं तीन वित्तीय वर्षों में तय बजट से ज्यादा पैसा खर्च हुआ।
- वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी प्रक्रिया के कारण शुरुआती सालों में बजट बचा।
पीएम किसान योजना का बजट
Pm Kisan Samman Nidhi Yojana: पीएम किसान सम्मान निधि देश की सबसे बड़ी किसान योजना है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद मिलती है। हाल ही में आई एक आरटीआई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।
पिछले सात फाइनेंसियल इयर्स के आंकड़े अब सामने आ चुके हैं। साल 2019 से 2026 तक का पूरा डेटा जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 46 हजार 317 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए।
कृषि मंत्रालय ने यह जानकारी आरटीआई के जवाब में दी है। यह डेटा बता रहा है कि बजट का सही इस्तेमाल कब हुआ। आइए इसे डिटेल से समझें...
शुरुआती सालों में बचा बड़ा फंड
योजना की शुरुआत में आवंटित बजट काफी ज्यादा रखा गया था। फाइनेंसियल इयर 2019-20 में 75 हजार करोड़ रुपए का बजट तय था। लेकिन उस साल केवल 48 हजार 714 करोड़ रुपए ही खर्च हो सके। यानी पहले ही साल में बड़ा फंड बिना इस्तेमाल रह गया।
अगले साल 2020-21 में फंड का इस्तेमाल काफी हद तक बढ़ा। उस साल 60 हजार 990 करोड़ रुपए किसानों तक पहुंचाए जा सके। इसके बावजूद यह 75 हजार करोड़ के तय बजट से काफी कम था। शुरुआती समय में आधार वेरिफिकेशन के कारण ये देरी हुई थी।
2024-25 में बना खर्च का रिकॉर्ड
बाद के सालों में फंड इस्तेमाल की स्थिति में काफी सुधार आया। फाइनेंसियल इयर 2021-22 में स्थिति पूरी तरह से बदल गई थी। 65 हजार करोड़ के बजट के मुकाबले 65 हजार 785 करोड़ रुपए खर्च हुए।
ऐसा ही ट्रेंड साल 2023-24 में भी देखने को मिला था। उस साल 60 हजार करोड़ के मुकाबले 61 हजार 441 करोड़ रुपए खर्च हुए। साल 2024-25 में तो योजना के इतिहास का नया रिकॉर्ड बन गया। इस साल तय बजट से ज्यादा 66 हजार 138.91 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह इस योजना का अब तक का सबसे बड़ा खर्च था।
बाद के दो सालों में गिरा ग्राफ
रिकॉर्ड खर्च के बाद आंकड़े फिर से नीचे आने लगे थे। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 58 हजार 254 करोड़ रुपए ही खर्च हुए। वही हाल वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों में भी देखा गया। इस साल कुल 58 हजार 860.10 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल हो पाए।
यह राशि उस साल के तय बजट से काफी कम रही। इस तरह सात में से चार साल बजट कम खर्च हुआ। बाकी के तीन सालों में तय आवंटन से ज्यादा खर्च हुआ। इससे पता चलता है कि फंड का इस्तेमाल एक जैसा नहीं रहा।
किसानों के लिए आंकड़ों के मायने
पीएम किसान सम्मान निधि योजना का सीधा फायदा देश के करोड़ों किसानों को मिलता है। इस योजना की सफलता सही समय पर पैसा मिलने पर निर्भर है। शुरुआती सालों में ई-केवाईसी की वजह से पैसा रुक गया था। किसानों के डेटा का सही सत्यापन होना बहुत जरूरी था।
फर्जी खातों को हटाने के लिए कड़े नियम बनाए गए थे। इसी वजह से शुरुआती सालों में बड़ा बजट बचा रह गया। बाद में प्रक्रिया आसान होने पर खर्च तेजी से बढ़ने लगा। अब ज्यादातर पात्र किसानों को समय पर किस्त मिल रही है। पीएम किसान योजना में गड़बड़ी
FAQ
- PM-KISAN योजना में सात सालों में कितना बजट खर्च नहीं हो पाया?
आरटीआई से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले सात वित्तीय वर्षों के दौरान पीएम किसान योजना के कुल आवंटित बजट में से 46 हजार 317 करोड़ रुपए की राशि खर्च नहीं हो पाई है। - किस वित्तीय वर्ष में PM-KISAN योजना के तहत सबसे ज्यादा खर्च हुआ?
वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के इतिहास का सबसे अधिक खर्च दर्ज किया गया था। इस साल तय बजट 60 हजार करोड़ रुपए के मुकाबले रिकॉर्ड 66 हजार 138.91 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। - शुरुआती सालों में PM-KISAN का पूरा बजट क्यों खर्च नहीं हो सका?
योजना के शुरुआती सालों में किसानों की आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और पात्र लाभार्थियों के डाक्यूमेंट्स के इन-डेप्थ वेरिफिकेशन की प्रोसेस चलने के कारण पूरा बजट समय पर खर्च नहीं हो पाया था।
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