SIR प्रक्रिया से 12 राज्यों में 6.08 करोड़ नाम कटे, यूपी में सबसे ज्यादा
News in Short
- SIR प्रक्रिया में 6.08 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए।
- मृतकों और माइग्रेटेड लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए।
- उत्तर प्रदेश में 2.04 करोड़ नाम, बंगाल में 91 लाख नाम कटे।
- नए वोटर्स को जोड़ा गया, लिस्ट में सुधार किया गया।
- SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा घर-घर जाकर वेरीफिकेशन की जाती है।
News in Detail
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 6.08 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इस दौरान मृतकों और माइग्रेटेड लोगों के नामों को हटाया गया। नए वोटरों को जोड़ा गया है।
SIR क्या है?
SIRएक चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जिसके तहत घर-घर जाकर वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया में 18 साल से ऊपर के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है, और मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित हुए वोटर्स के नाम हटाए जाते हैं। यह प्रक्रिया देशभर में लागू की गई है और अगले साल के चुनावों में प्रभावी होगी।
प्रमुख राज्य और UT
अब तक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, और अन्य राज्यों में SIR की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर नाम कटे हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश में 2.04 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 91 लाख नाम बाहर हुए हैं।
SIR की प्रक्रिया
ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) इस प्रक्रिया को कार्यान्वित करते हैं। वे घर-घर जाकर वोटर की जानकारी वेरीफाई करते हैं, और जिनका नाम गलत है या डुप्लिकेट है, उन्हें हटाया जाता है।
क्यों जरूरी है एसआईआर?
1951 से लेकर 2004 तक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन पिछले 21 साल में कई बदलाव जरूरी हो गए थे। सख्त वोटर लिस्ट को लेकर SIR का उद्देश्य सही वोटर को जोड़ना और गलत या अयोग्य वोटरों को हटाना है।
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