NSA में बंद रहे सोनम वांगचुक 6 महीने बाद लेह लौटे, लोगों ने किया स्वागत
News in Short
- सोनम वांगचुक को 6 महीने की जेल हिरासत के बाद रिहा किया गया।
- वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए संघर्ष जारी रखने की उम्मीद जताई।
- वांगचुक ने जेल के समय को आत्ममंथन का अवसर बताया।
- उनका मुख्य उद्देश्य लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है।
- 14 मार्च को केंद्र सरकार ने उन पर लगे NSA को हटा लिया।
News in Detail
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 6 महीने की जेल हिरासत के बाद लेह लौटे। उन्हें 14 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (NSA) हटाए जाने के बाद जोधपुर जेल से रिहा किया गया। रिहाई के बाद उनका स्वागत करने के लिए सैकड़ों समर्थक लेह में जुटे थे।
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संघर्ष जारी रखने की उम्मीद
रिहाई के बाद सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, हम जिस मकसद के लिए काम कर रहे हैं, उसके लिए नया सूरज उगेगा। हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद किया और कहा कि 170 दिनों के बाद इन पहाड़ों में आकर और लोगों से मिलकर अच्छा लग रहा है।
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हिरासत का समय आत्ममंथन
सोनम वांगचुक ने अपने जेल के अनुभव को आत्ममंथन का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में उनकी पत्नी गीतांजलि को कानूनी लड़ाई में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि हिरासत का समय उनके व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन के बारे में सोचने का था।
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना
वांगचुक ने अपने आंदोलन का उद्देश्य स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है। 2025 में लद्दाख में उनके नेतृत्व में प्रदर्शन हुए थे, जिनमें हिंसा हुई थी और 4 लोग मारे गए थे। सरकार ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने हिंसा भड़काई, लेकिन उन्होंने कहा कि यह सब लद्दाख के भविष्य के लिए था।
वांगचुक पर लगा NSA हटा
14 मार्च को केंद्र सरकार ने वांगचुक पर लगा NSA हटा लिया। इससे उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सरकार ने कहा कि यह निर्णय लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया। इसके साथ ही, सरकार ने लद्दाख के विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया।
सोनम वांगचुक का संघर्ष
सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के अल्ची गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपनी मां से प्राप्त की और फिर श्रीनगर में एक स्कूल में दाखिला लिया। वे दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल से पढ़े और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया। उनके द्वारा शुरू किए गए कई सामाजिक और शैक्षिक सुधारों ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई है।
वांगचुक ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था कि "लद्दाख के लिए ईमानदार संवाद आवश्यक है और मैंने एक्टिविज्म से दूरी नहीं बनाई है।" उनका कहना है कि उनका उद्देश्य लद्दाख के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी भविष्य बनाना है।