पैक्ड फूड्स में शुगर लेवल जानना हुआ आसान, जल्द लागू होंगे नए कलर कोड्स
Sugar Meter Label Food: पैकेटबंद खाने की चीजों में चीनी कितनी है, यह जानना अब आसान हो सकता है। उपभोक्ता मामले और खाद्य विभाग पर बनी संसद की स्थायी कमेटी ने यह सुझाव दिया है। समिति चाहती है कि पैकेट के सामने वाले हिस्से पर ही चीनी की मात्रा साफ दिखे। इसके लिए कलर-बेस्ड सिग्नल्स अपनाए जा सकते हैं।
लाल, पीला और हरा रंग बताएगा कि उत्पाद में चीनी ज्यादा है, मीडियम है या कम है। हालांकि अभी कोई खास रंग कोड तय नहीं हुआ है। कमेटी ने ज्यादा चीनी वाले उत्पादों पर सख्त चेतावनी देने की भी बात कही है।
फिलहाल पैकेट के पीछे एक टेबल होती है। इसमें चीनी की मात्रा ग्राम में और प्रतिशत में दी जाती है। लेकिन आम उपभोक्ता इसे ठीक से समझ नहीं पाता। इसी वजह से आगे की तरफ आसान रंगीन लेबल का सुझाव आया है।
14 हजार प्रस्ताव, फिर भी चार साल से अटके
ये लेबलिंग योजना नई नहीं है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI – Food Safety and Standards Authority of India) ने सितंबर 2022 में इसका मसौदा जारी किया था।
उस समय चौदह हजार से ज्यादा सुझाव और टिप्पणियां आई थीं। इसके बावजूद नियम अब तक अंतिम रूप नहीं ले सके हैं। समिति ने इस देरी पर सवाल उठाया है। कमेटी ने कहा है कि नियमों को तय समय सीमा में पूरा किया जाए।
शिशु फॉर्मूला में चीनी की सीमा की रिव्यु
कमेटी ने बच्चों के दूध फॉर्मूला पर भी ध्यान दिया है। छह महीने तक के बच्चों के फॉर्मूला में सुक्रोज या फ्रक्टोज तभी डाला जा सकता है जब जरूरत हो।
ये मात्रा कुल कार्बोहाइड्रेट के 20% से ज्यादा नहीं हो सकती। ये लगभग तेरह ग्राम या 53 कैलोरी के बराबर बैठता है। कमेटी चाहती है कि हर दो से तीन साल में इस सीमा की वैज्ञानिक समीक्षा हो।
नो एडेड शुगर के दावों पर भी नजर
कमेटी ने कुछ ब्रांड के दावों पर भी चिंता जताई है। नो एडेड शुगर और नेचुरल स्वीटनर जैसे शब्दों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। मकसद ये है कि पैकेट पर लिखी बात और असली सामग्री में फर्क न हो। इससे उपभोक्ता गुमराह नहीं होगा।
ऑनलाइन खरीदारी में भी हटेगा गलत लेबल
ई कॉमर्स साइट पर बिकने वाले उत्पादों की निगरानी भी बढ़ेगी। गलत लेबल वाले उत्पाद पहचान कर तुरंत हटाए जा सकेंगे। कमेटी ने इसके लिए रियल टाइम सिस्टम बनाने की सिफारिश की है।
समिति मानती है कि ग्रामीण इलाकों में लेबल समझना मुश्किल हो सकता है। इसलिए स्कूल, आंगनवाड़ी और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट के जरूरी आंकड़े
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद आईसीएमआर (ICMR – Indian Council of Medical Research) की 2024 गाइडलाइन के मुताबिक, रोजाना 25 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खानी चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ (World health organization) कहता है कि फ्री शुगर कुल ऊर्जा के दस प्रतिशत से कम रहे। इसे पांच प्रतिशत तक लाने पर और फायदा मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बचपन में ज्यादा चीनी खाने से दांत खराब हो सकते हैं।
इससे मोटापा और टाइप टू डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है। अक्टूबर 2024 से अब तक चार सौ से ज्यादा ईट राइट मेले लगाए जा चुके हैं। इनमें करीब बीस लाख लोग शामिल हुए हैं। अभी यह सिर्फ सिफारिश है। नए नियम लागू होने में अभी समय लग सकता है।
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