एथेनॉल नहीं इस वजह से महंगी हुई चीनी, आसमान छूते दामों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
Amresh Kushwaha | Aug 25, 2026, 13:25 IST
एथेनॉल नहीं इस वजह से महंगी हुई चीनी
देश में चीनी की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं। विपक्ष इसे एथेनॉल नीति का नतीजा बता रहा है। सरकार ने एथेनॉल वाली वजह को नकार दिया है। जानें सरकार ने चीनी महंगी होने के पीछे की क्या वजह बताई है...
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में चीनी की कीमतें अचानक बहुत तेजी से बढ़ी हैं।
- कई राज्यों में चीनी 70 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है।
- विपक्ष का आरोप है कि एथेनॉल नीति से यह संकट आया है।
- वहीं, सरकार ने एथेनॉल के दावे को नकार दिया है।
- सरकार ने दस लाख टन चीनी के आयात को मंजूरी दे दी है।
कीमतें बढ़ने से जेब पर असर
देशभर में चीनी की कीमतें चालिस प्रतिशत तक बढ़ी हैं। मध्य प्रदेश में 23 अगस्त 2025 को दाम 45 रुपए थे। वहीं, 23 अगस्त 2026 को यह बढ़कर 65 रुपए हो गया। राजस्थान में भी दाम 43 रुपए से बढ़कर 65 रुपए पहुंचे। त्योहारों के मौसम में मिठाई और चाय की खपत काफी बढ़ जाती है। पांच किलो चीनी पर परिवारों को 100 ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं।
पैदावार घटने का असली कारण
रेड रॉट (Red Rot) बीमारी ने भी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया। इस वजह से उत्पादन घटकर तीन करोड़ छह लाख टन रह गया। मांग अधिक होने और सप्लाई कम होने से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
महंगी हुई चीनी
एथेनॉल नीति पर राजनीतिक बहस
सरकार ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इस मामले पर आंकड़े सामने रखे हैं। वर्ष 2023-23 में 12 प्रतिशत चीनी एथेनॉल में गई। इस सीजन में यह हिस्सा घटकर सिर्फ नौ प्रतिशत रह गया है। अब एथेनॉल का तीन-चौथाई हिस्सा मक्के से बनाया जा रहा है। हालांकि इस सीजन 28 लाख टन चीनी एथेनॉल में इस्तेमाल हुई है।
महंगी हुई चीनी
विशेषज्ञ और किसानों की राय
अखिल भारतीय किसान सभा (All India Kisan Sabha) के नेता अजीत नवले ने अलग बात कही। उन्होंने बताया कि देश में खपत से ज्यादा चीनी बनती है। देश में सालाना खपत दो दशमलव आठ करोड़ टन होती है। जबकि देश में उत्पादन तीन दशमलव दो करोड़ टन तक होता है। नवले के अनुसार बड़े कारोबारियों की जमाखोरी ही महंगाई की असली वजह है।
महंगी हुई चीनी
महंगाई रोकने की सरकारी तैयारी
अक्टूबर महीने में गन्ने की पेराई का नया सीजन शुरू होगा। सितंबर से थोक खरीदारों पर स्टॉक लिमिट (Stock Limit) लागू कर दी जाएगी। इससे बाजार में जमाखोरी रोकने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। त्योहारों से पहले बाजार में नई सप्लाई आने से दाम गिर सकते हैं। उपभोक्ता चीनी के विकल्प के रूप में गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं।
महंगी हुई चीनी
यह खबर क्यों जरूरी है?
सोर्स: उपभोक्ता मामले मंत्रालय और क्षेत्रीय मंडी रिपोर्ट।
FAQ
- देश में चीनी के दाम अचानक इतने क्यों बढ़ गए हैं?
देश में चीनी के दाम बढ़ने के मुख्य कारण भारी बारिश से गन्ने की फसल खराब होना और रेड रॉट बीमारी है। इसके अलावा त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम चढ़ना और बड़े व्यापारियों द्वारा जमाखोरी करना भी प्रमुख कारण हैं। - क्या एथेनॉल नीति की वजह से चीनी महंगी हुई है?
सरकार के अनुसार इस सीजन सिर्फ नौ प्रतिशत चीनी ही एथेनॉल में गई है और ज्यादातर एथेनॉल मक्के से बन रहा है। हालांकि विपक्ष का तर्क है कि अट्ठाइस लाख टन चीनी एथेनॉल में जाने से बाजार में सप्लाई पर असर पड़ा है। - चीनी की कीमतों पर आम जनता को कब तक राहत मिलने की संभावना है?
सरकार ने अक्टूबर तक दस लाख टन चीनी आयात को मंजूरी दी है। इसके अलावा सितंबर से थोक व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट लागू होगी और अक्टूबर में पेराई का नया सीजन शुरू होगा, जिससे त्योहारों के आसपास दाम घट सकते हैं।
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