10 गुना ज्यादा दाम पर बिक रही दवाएं, सुप्रीम कोर्ट बोला- मरीजों से कर रहे दिनदहाड़े डकैती
Amresh Kushwaha | Sept 23, 2026, 12:05 IST
10 गुना ज्यादा दाम पर बिक रही दवाएं
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की कीमत में 10 गुना अंतर पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने इसे मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती बताया है। दवा 2700 रुपए में मिलती है, बिकती 27 हजार में है। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की भारी कीमत पर सख्त टिप्पणी की है।
- कैंसर की दवा रिटेलर तक 2700 रुपए में बिकती है।
- वही दवा मरीज को 27 हजार रुपए में बेची जाती है।
- कोर्ट ने इसे मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती बताया है।
- मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
कोर्ट में क्या हुआ
जस्टिस मेहता ने कहा कि यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। कोर्ट ने पूछा कि आखिर इतनी बड़ी कीमत क्यों रखी जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों बैठे हैं।
10 गुना दाम का खेल
इलाज के लिए लोग घर और गहने तक बेचने को मजबूर होते हैं। कोर्ट ने इसे बड़ा और गंभीर मुद्दा बताया है। कोर्ट ने एक और उदाहरण भी दिया। कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली आम दवा का भी यही हाल है। यदि वही दवा तय दायरे से बाहर बिकती है, तो कीमत कई गुना बढ़ जाती है। यानी सिर्फ कैंसर की दवाएं ही नहीं, आम बीमारियों की दवाएं भी इस खेल का हिस्सा हैं। कोर्ट ने कहा कि यह पूरा सिस्टम मरीजों के भरोसे पर सवाल खड़ा करता है।
आयुष्मान भारत पर असर
82% दवाएं दायरे से बाहर
इसका मतलब है कि कंपनियां शुरुआती कीमत खुद तय कर सकती हैं। बाद में सिर्फ 10 प्रतिशत तक ही दाम बढ़ाने की सीमा होती है। वहीं, शुरुआती कीमत पर कोई नियंत्रण नहीं है। यही वजह है कि दाम में इतना बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
दवा कंपनियों का पक्ष
उन्होंने कोर्ट से रिटेलर और स्टॉकिस्ट तक पहुंचने वाली कीमतों की जांच की मांग की। केंद्र सरकार की तरफ से भी अपना पक्ष रखा गया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Additional Solicitor General) ने कहा कि सरकार सस्ती दवा की दिशा में गंभीर है।
अगली सुनवाई 29 सितंबर
साथ ही मेडिकल उपकरणों की कीमत पर भी सीमा तय करने की मांग है। कोर्ट की यह टिप्पणी आम मरीजों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जगाती है। आने वाली सुनवाई में इस पर और स्पष्टता मिल सकती है।
कीमतों की पारदर्शिता पर खड़े हुए सवाल
मरीजों को उम्मीद है कि इससे दवाओं की कीमत में राहत मिलेगी। सरकार और नियामक संस्थाओं पर भी अब जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दवा कीमतों को नियंत्रित करना बेहद जरूरी मुद्दा है।
कोर्ट ने भी इस बात को गंभीरता से लिया है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार की तरफ से ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। मरीज और उनके परिवार इस फैसले पर करीब से नजर रखे हुए हैं।
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