दहेज एक्ट के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कानून में हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं

Jitendra Shrivastava | Apr 15, 2025, 17:23 IST
supreme-court-comments Photograph: (the sootr)
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज एक्ट के दुरुपयोग को लेकर दायर जनहित याचिका पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस सबूत के दहेज एक्ट में हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं है। कोर्ट ने माना कि दुरुपयोग होता है, लेकिन इसे समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आईपीसी की धारा 498A के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। इस धारा का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस प्रावधान का दुरुपयोग हो रहा है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।



दहेज एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप के लिए कोई ठोस वजह नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना पुख्ता सबूत के यह मानना गलत होगा कि दहेज एक्ट ( dowry act) धारा 498A का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। कोर्ट ने इस प्रावधान के दुरुपयोग की संभावना को स्वीकार किया, लेकिन इसे समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया।



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दहेज एक्ट (IPC 498A) की विशेषताएं

धारा 498A भारतीय दंड संहिता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो महिलाओं को दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से बचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस धारा के तहत महिलाओं को उनके पति या ससुराल वालों द्वारा दहेज के लिए शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न से सुरक्षा मिलती है। यह एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें दोषी पाए जाने पर जेल की सजा हो सकती है।



हालांकि, कई मामलों में इस धारा का दुरुपयोग होने की शिकायतें आई हैं। कुछ आरोपियों का कहना है कि यह कानून महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है, और इसे गलत तरीके से उनका शोषण करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट में इस धारा के दुरुपयोग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी।



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कोर्ट का दुरुपयोग पर नजरिया

सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी कानून का दुरुपयोग हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उस कानून को समाप्त कर दिया जाए। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्टों के आधार पर हम एक प्रावधान को समाप्त नहीं कर सकते। हर मामले की अपनी विशिष्टताएं होती हैं, और किसी भी आरोप को उसी के आधार पर साबित किया जाना चाहिए।



कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत महिलाओं और बच्चों को विशेष सुरक्षा देने के लिए कानून बनाने की अनुमति दी गई है। इसके तहत दहेज और घरेलू हिंसा के खिलाफ कानून बनाए गए हैं, ताकि महिलाओं की रक्षा की जा सके।



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दहेज एक्ट पर कोर्ट की विचारधारा

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि दहेज एक्ट का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा है और इसे पूरी तरह से समाप्त करने का कोई कारण नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह माना कि हर मामले का अलग-अलग विश्लेषण किया जाना चाहिए और इसका दुरुपयोग होने की स्थिति में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।



अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई कानून नकारात्मक प्रभाव डालता है, तो उसमें सुधार की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन उसे पूरी तरह से रद्द करने का विचार करने से पहले व्यापक रूप से सोचने की आवश्यकता है। देश दुनिया न्यूज





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