हाईवे के किनारे से अवैध ढाबों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 60 दिन में हटाने के निर्देश
News in Short
- सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध ढांचों को हटाने का आदेश दिया।
- NHAI को 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का निर्देश।
- हाईवे पर वे-साइड सुविधाएं जैसे शौचालय, पार्किंग और संकेतक अनिवार्य होंगे।
- ब्लैकस्पॉट की पहचान और सुधार के लिए 45 दिनों का समय दिया गया।
- यह आदेश राजस्थान और तेलंगाना में हुए हादसों के बाद लिया गया।
News in Detail
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों में अवैध ढाबों और व्यावसायिक ढांचों को हटाने का आदेश दिया। यह कदम सड़क दुर्घटनाओं और यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्री की सुरक्षा संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उच्च गति वाले एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं का कारण प्रशासनिक लापरवाही और ढांचागत कमियां नहीं हो सकतीं। इसलिए, हाईवे पर अवैध अतिक्रमण हटाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को 60 दिनों के भीतर हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सभी हाईवे पर वे-साइड सुविधाएं जैसे विश्राम स्थल, शौचालय, सुरक्षित पार्किंग और संकेतक अनिवार्य होंगे। साथ ही, 4 और 6 लेन हाईवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा।
ब्लैकस्पॉट की पहचान और सुधार
अदालत ने NHAI और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को 45 दिनों में ब्लैकस्पॉट की सूची जारी करने का निर्देश दिया। इन स्थानों पर लाइटिंग, कैमरे और चेतावनी संकेत लगाए जाएंगे। इन सुधारों से सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
बिना अनुमति के लाइसेंस नहीं मिलेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिना NHAI या लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के कोई लाइसेंस, ट्रेड अप्रूवल या एनओसी जारी नहीं की जाएगी। मौजूदा लाइसेंसों की 30 दिनों में समीक्षा की जाएगी।
2023 के हादसों के बाद यह कदम
यह कदम राजस्थान के फलौदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए हादसों के बाद उठाया गया। इन हादसों में 34 लोगों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने हाईवे सुरक्षा और अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को बढ़ा दिया।
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