समर्थन मूल्य पर ‘सिस्टम सेट’? मप्र में गेहूं खरीदी के नाम पर गड़बड़ियों का जाल, किसानों की जेब पर डाका
Ramanand Tiwari | Apr 19, 2026, 22:22 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी में गड़बड़ियों का आरोप है, जिसमें नियमों का उल्लंघन, तुलाई में कटौती, और अवैध वसूली शामिल है। किसान परेशान हैं और सरकारी सिस्टम की नाकामी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी का सीजन चल रहा है, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही दिख रही है। नियमों के उलट खरीदी, तुलाई में कटौती और अवैध वसूली के आरोपों ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा—क्या सरकारी सिस्टम की नाकामी से किसानों को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है?
प्रदेशभर में समर्थन मूल्य पर खरीदी जारी है, लेकिन कई जगहों पर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। बिना स्लॉट बुकिंग के गेहूं तौला जा रहा है और सीधे गोदामों में डंप किया जा रहा है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने आरोप लगाया है कि खरीदी केंद्र बनाने में पैसे का खेल हुआ है। उनका कहना है कि कुछ केंद्रों पर दूसरे राज्यों, खासकर यूपी का गेहूं भी खपाया जा रहा है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में मार्कफेड की 'डिजिटल स्ट्राइक' : चने की बोरी पर लगाया QR कोड, अब बिचौलियों की हेराफेरी पर लगेगा ताला
एमपी के आठ शहरों में सांस लेना भी मुश्किल, इंदौर-सागर में हवा बनी जहर
राजधानी भोपाल के आसपास कई वेयरहाउस में हजारों क्विंटल गेहूं का स्टॉक मिला है। निहाल, निषिता, कांति और श्री वेयरहाउस में जांच के दौरान बड़े स्तर पर डंपिंग सामने आई। यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जब नियम साफ हैं, तो बिना अनुमति इतना गेहूं गोदामों तक पहुंच कैसे गया?
किसानों का आरोप है कि तुलाई के नाम पर सीधा नुकसान कराया जा रहा है।
सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक:स्लॉट बुकिंग के बिना तुलाई नहीं होनी चाहिए। गेहूं को सीधे गोदाम में डंप नहीं किया जा सकता। हर बोरी की जियो टैगिंग जरूरी है। लेकिन जमीनी हालात में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सर्वेयर तक मौके पर नहीं मिल रहे, जिससे गुणवत्ता जांच भी सवालों में है।
कई वेयरहाउस संचालकों ने कैमरे पर ही नियमों को हल्के में लिया। कहीं कहा गया—“सब जगह ऐसा ही हो रहा है”
कहीं सीधे धर्मकांटे से तुलाई और डंपिंग की बात स्वीकार की गई। यह दर्शाता है कि सिस्टम में जवाबदेही कितनी कमजोर है।
किसान पहले ही खरीदी में देरी से परेशान हैं, ऊपर से कटौती और अतिरिक्त मांग ने मुश्किल बढ़ा दी है। प्रति क्विंटल 1 किलो अतिरिक्त गेहूं मांगा जा रहा है। एक ट्रॉली पर 50–60 किलो तक ज्यादा लिया जा रहा है। बैरसिया के किसान ने 25 किलो कटौती की शिकायत दर्ज कराई। किसानों का कहना है कि यह सीधे-सीधे ठगी है और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है— जब नियम साफ हैं, निगरानी के लिए विभाग मौजूद है, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो रही है? क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर सिस्टम के भीतर ही कोई सेटिंग काम कर रही है?
अधिकारियों का कहना है कि जांच कर नोटिस दिए जाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गड़बड़ियां पहले से जारी हैं और किसानों का नुकसान लगातार हो रहा है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में रेलवे का बड़ा विस्तार! 11 नई रेल लाइनों के सर्वे को मंजूरी
एमपी सरकार लाएगी विधानसभा का स्पेशल सत्र, कांग्रेस को करेगी बेनकाब!
पूरे सिस्टम में अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है, तो वह किसान है। सरकार की खरीदी नीति का फायदा मिलने के बजाय, उसे कटौती, देरी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि ये आरोप सिर्फ जांच तक सीमित रहते हैं या फिर वाकई जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है।
पूरा मामला: नियमों से ज्यादा ‘मनमानी’
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में मार्कफेड की 'डिजिटल स्ट्राइक' : चने की बोरी पर लगाया QR कोड, अब बिचौलियों की हेराफेरी पर लगेगा ताला
एमपी के आठ शहरों में सांस लेना भी मुश्किल, इंदौर-सागर में हवा बनी जहर
भोपाल के गोदामों में ‘गेहूं का पहाड़’
तुलाई में खेल: हर ट्रॉली से ‘कटौती’
- प्रति क्विंटल 500 ग्राम तक कम दर्ज किया जा रहा है
- एक ट्रॉली (50 क्विंटल) में करीब 25 किलो कम दिखाया जा रहा है
- रोजाना 50 ट्रॉली आने पर करीब 12.5 क्विंटल गेहूं ‘गायब’
नियमों की अनदेखी: जिम्मेदार कौन?
वेयरहाउस संचालकों के ‘खुले जवाब’
कहीं सीधे धर्मकांटे से तुलाई और डंपिंग की बात स्वीकार की गई। यह दर्शाता है कि सिस्टम में जवाबदेही कितनी कमजोर है।
किसानों की पीड़ा: डबल मार
बड़ा सवाल: सिस्टम फेल या मिलीभगत?
प्रशासन का जवाब (औपचारिकता या कार्रवाई?)
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में रेलवे का बड़ा विस्तार! 11 नई रेल लाइनों के सर्वे को मंजूरी
एमपी सरकार लाएगी विधानसभा का स्पेशल सत्र, कांग्रेस को करेगी बेनकाब!
सबसे कमजोर कड़ी बना किसान
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari