हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: थाने में वीडियो बनाना अपराध नहीं, ये नागरिक का हक
Jitendra Shrivastava | Apr 19, 2026, 22:06 IST
Photograph: (THESOOTR)
AHAMDABAD. गुजरात हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि थाने में वीडियो या फोटो बनाना कोई अपराध नहीं है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने पुलिस की दलील खारिज की।
News In Short
- गुजरात हाईकोर्ट में हिरासत में यातना का मामला सुना जा रहा था।
- पुलिस ने कहा, नागरिकों ने थाने में वीडियो बनाई।
- जस्टिस देसाई ने पूछा, वीडियो रोकने का कानूनी आधार क्या है?
- कोर्ट ने माना, थाना सार्वजनिक स्थान है।
- पुलिस नागरिकों को रिकॉर्डिंग से नहीं रोक सकती।
News In Detail
यह सुनवाई जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में हुई। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में यह तर्क दिया कि शिकायतकर्ता थाने के अंदर वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
इस पर जस्टिस देसाई ने पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता से सीधा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि किस कानून की किस धारा के तहत थाने में वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है? वकील इसका जवाब नहीं दे सकीं। कोर्ट का यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था।
जस्टिस देसाई का तीखा सवाल
जब सरकारी वकील ने बार-बार सीसीटीवी का हवाला दिया, तब कोर्ट ने कहा कि यह तर्क तभी चलेगा जब सभी कैमरे पूरी तरह काम कर रहे हों। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर कैमरे बंद पड़े हैं।
थाना है सार्वजनिक स्थान
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि थाना किसी प्रतिबंधित क्षेत्र की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम यानी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (Official Secrets Act) भी यहां लागू नहीं होता।
नागरिकों को मिली बड़ी राहत
यह टिप्पणी इसलिए बेहद अहम है क्योंकि हिरासत में मारपीट या दुर्व्यवहार के मामलों में ठोस सबूत जुटाना अब आसान होगा। पुलिस की जवाबदेही भी इससे और मजबूत होगी। जब सीसीटीवी काम नहीं करते, तब नागरिकों के पास रिकॉर्डिंग ही एकमात्र सहारा होती है।
रिकॉर्डिंग करते वक्त रखें सावधानी
यह कोर्ट की टिप्पणी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना का अधिकार मिलकर नागरिकों को यह शक्ति देते हैं।
न्याय की बड़ी जीत
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना कोर्ट की प्राथमिकता है। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता है और उनका सही इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र असल मायनों में मजबूत होता है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
हिरासत में यातना एक गंभीर समस्या रही है। इसके खिलाफ सबूत जुटाने का अधिकार नागरिकों को मिलना लोकतंत्र को मजबूत करता है। डिजिटल युग में स्मार्टफोन सबसे बड़ा गवाह है।
पुलिस की जवाबदेही तय करने में नागरिक रिकॉर्डिंग की बड़ी भूमिका है। यह फैसला सामाजिक और कानूनी नैतिकता दोनों के पैमाने पर खरा है और देशभर की अदालतों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
तमिलनाडु के पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 18 की मौत, छह लोग घायल
होर्मुज स्ट्रेट पर गोलीबारी के बाद दिल्ली ने दी चेतावनी, ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं होगी
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, हम युद्ध नहीं चाहते, आत्मरक्षा के लिए बना रहे हथियार, अमेरिका पर भरोसा नहीं
पीएम मोदी की बंगाल में हुंकार: महिला आरक्षण पर TMC का विश्वासघात, बंगाल की बेटियां मांगेंगी हिसाब
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari