बंगाल में टीएमसी को बड़ा झटका: 28 में से 20 सांसद NDA के साथ
तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने ममता का साथ छोड़ दिया। लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया। काकोली घोष दस्तीदार ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजा। पत्र में बागी सांसदों के अलग बैठने की बात भी कही गई।
सांसद शताब्दी रॉय के घर बागी सांसदों की बैठक हुई। इसमें जून मालिया, बापी हलदर, अबू ताहिर खान और असित कुमार मल मौजूद थे। बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी भी उनसे मिलने पहुंचे। इससे पहले 11 सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर मिले। इस बैठक में भी CM शुभेंदु अधिकारी उपस्थित थे।
दिल्ली में हुई अहम मीटिंग, फिर लिखा पत्र
सोमवार को दिल्ली में बड़ी हलचल रही। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर बागी सांसदों की गुप्त बैठक हुई। इस बैठक में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी शामिल हुए। बैठक के बाद सांसदों ने मिलकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजा।
पत्र में साफ लिखा गया कि वे एनडीए के साथ जाना चाहते हैं। उन्होंने संसद में अलग बैठने की जगह और अलग गुट की मान्यता मांगी। काकोली घोष दस्तीदार को इस बागी गुट का नेता बनाने की माँग भी पत्र में की गई।
कौन-कौन सांसद हैं बागियों में?
बागी सांसदों की सूची लंबी है। अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश वसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी और कालीपदा सोरेन इनमें शामिल हैं। इसके अलावा शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, असित मल और सुवेंदु शेखर रॉय के नाम भी सूची में हैं। कुल मिलाकर 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। आपको बता दें कि टीएमसी के 28 सांसद है।
राज्यसभा से भी दिया इस्तीफा
बैठक के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। साथ ही टीएमसी छोड़ने का भी एलान कर दिया।
सुखेंदु रॉय ने बताया कि उन्होंने व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिए ममता बनर्जी को यह फैसला पहले ही बता दिया था। उन्होंने सवाल भी उठाया कि अगर विधानसभा में टूट हो सकती है तो राज्यसभा और लोकसभा में क्यों नहीं होगी?
ममता को क्यों है बड़ा झटका?
यह बगावत बेहद नाजुक वक्त पर हुई है। जिस समय ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इंडिया ब्लॉक की बैठक में बीजेपी के खिलाफ एकता दिखा रहे थे, उसी वक्त उनकी पार्टी के 20 सांसद अलग हो गए।
पहले अभिषेक बनर्जी बगावत रोकने के लिए दिल्ली आए थे। फिर शनिवार शाम को ममता बनर्जी खुद दिल्ली पहुँचीं। लेकिन नेतृत्व टूट नहीं रोक पाया।
उद्धव जैसी स्थिति में आईं ममता
पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायक दल टूटा। अब लोकसभा में सांसदों ने भी अलग गुट बना लिया। यह स्थिति महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जैसी है। उद्धव की शिवसेना भी इसी तरह टूटी थी जब उनके विधायक और सांसद एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे।
ममता बनर्जी की टीएमसी को यह दोहरा झटका है। विधायक और सांसद दोनों का साथ छूटना पार्टी की ताकत को कमजोर करता है।
लोकसभा में NDA की ताकत बढ़ी
लोकसभा में एनडीए की ताकत एक झटके में बदल गई। पहले एनडीए के पास 293 सांसद थे। टीएमसी के 20 सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या 313 हो गई। विपक्ष के लिए यह बड़ा नुकसान है।
बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर यह जानकारी दी। पत्र में एनडीए को समर्थन देने की बात कही गई है। साथ ही संसद में अलग समूह के रूप में काम करने की माँग भी रखी गई है।
संकट के दौर से गुजर रही TMC
टीएमसी को अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर झकझोर रहा विवाद। कई नेता जेल में हैं। निकायों में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो चुके हैं। पूर्व सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। यह टीएमसी का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
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