ट्रम्प बोले- नताशा बर्ट्रेंड को CNN से निकालो, CNN बोला- NO
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- CNN की नेशनल सिक्योरिटी कॉरेस्पॉन्डेंट नताशा बर्ट्रेंड ने ईरान पर अमेरिकी हमले की सीमित सफलता पर रिपोर्ट की।
- रिपोर्ट में कहा गया कि हमले से ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम सिर्फ कुछ महीने पीछे हुआ, पूरी तरह खत्म नहीं।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे फेक न्यूज बताया और नताशा को नौकरी से निकालने की मांग की।
- ट्रंप ने ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट कर नताशा को झूठी और देशद्रोही तक कह दिया।
- CNN ने साफ कहा कि वे अपनी रिपोर्टिंग पर कायम हैं और किसी दबाव में नहीं आएंगे।
वो रात जब एक रिपोर्ट ने तूफान ला दिया
वॉशिंगटन डीसी की एक रात। CNN का न्यूजरूम। नताशा बर्ट्रेंड अपनी स्क्रीन पर झुकी हैं। सामने पेंटागन की शुरुआती खुफिया रिपोर्ट है। अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। सरकार कह रही थी, यह बड़ी जीत है।
लेकिन रिपोर्ट कुछ और कह रही थी
नताशा ने वही लिखा जो दस्तावेज में था। ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म नहीं हुआ। बस कुछ महीने पीछे हुआ। खबर छपी और व्हाइट हाउस में तूफान आ गया।
ट्रंप का गुस्सा फूटा
अगले कुछ घंटों में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल खोला और टाइप करना शुरू किया। उन्होंने नताशा को झूठी, देशद्रोही और चैनल को बर्बाद करने वाली कहा। उन्होंने मांग की कि CNN उन्हें तुरंत नौकरी से निकाले। उनका कहना था कि इस रिपोर्ट ने देश के बहादुर पायलटों का अपमान किया है। यह कोई पहली बार नहीं था। ट्रंप पहले भी CNN के जिम अकोस्टा (Jim Acosta) का प्रेस पास रद्द करा चुके थे। कैटलान कॉलिन्स (Kaitlan Collins) को "सबसे खराब रिपोर्टर" कह चुके थे। लेकिन इस बार बात कुछ और थी। ईरान का मामला था। अंतरराष्ट्रीय राजनीति दांव पर थी।
रिपोर्ट में क्या था आखिर?
अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु साइट्स पर हवाई हमला किया था। सरकारी बयानों में इसे ऐतिहासिक सफलता बताया गया। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि ईरान का परमाणु खतरा खत्म हो गया।
दूसरी ओर नताशा की रिपोर्ट पेंटागन की आंतरिक खुफिया जानकारी पर आधारित थी। उसमें साफ लिखा था कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम (Iran nuclear attack ) पूरी तरह तबाह नहीं हुआ। यह सिर्फ कुछ महीनों के लिए धीमा हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स और एबीसी न्यूज ने भी यही बात कही। यानी रिपोर्ट अकेली नहीं थी।
नताशा बर्ट्रेंड कौन हैं?
33 साल की नताशा कोई नई पत्रकार नहीं हैं। उन्होंने 2014 में वासर कॉलेज (Vassar College) से पॉलिटिकल साइंस और फिलॉसफी में डिग्री ली। इसके बाद द अटलांटिक, पोलिटिको और बिजनेस इनसाइडर में काम किया।
CNN में आने के बाद उनकी रिपोर्टें बड़े-बड़े मामलों को सामने लाती रहीं। डिफेंस सेक्रेटरी की गुप्त अस्पताल भर्ती हो या रूस के खुफिया दस्तावेज, नताशा का नाम सामने था। रूस-यूक्रेन युद्ध की रिपोर्टिंग के लिए उन्हें एमी अवॉर्ड (Emmy Award) भी मिल चुका है। ट्रंप प्रशासन पहले भी उनकी खबरों से असहज रहा है।
CNN ने दबाव के आगे घुटने नहीं टेके
ट्रंप की मांग आई और CNN ने जवाब दिया। साफ और सीधा। चैनल ने कहा कि नताशा को हटाने का कोई सवाल नहीं है। पत्रकारिता का काम सरकार से जवाब मांगना है, न कि उसके आगे झुकना।
दुनिया ने क्या देखा?
ईरान ने अमेरिकी हमले को नाकाम बताया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने CNN की रिपोर्ट को गंभीरता से कवर किया। भारत समेत कई देशों में यह मामला वायरल हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की यह आदत पुरानी है। जब भी उनकी नीति पर सवाल उठता है, वे मीडिया को निशाना बनाते हैं। इससे असली मुद्दा पीछे चला जाता है और बहस दूसरी तरफ मुड़ जाती है। लेकिन इस बार CNN ने मैदान नहीं छोड़ा। और यही बात इस पूरे विवाद को खास बनाती है।
FAQ
- ट्रंप ने नताशा बर्ट्रेंड को फायर करने की मांग क्यों की?
नताशा बर्ट्रेंड ने CNN के लिए एक रिपोर्ट की जिसमें बताया गया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले से उतना नुकसान नहीं हुआ जितना ट्रंप सरकार ने दावा किया था। यह रिपोर्ट पेंटागन की शुरुआती खुफिया जानकारी पर आधारित थी। ट्रंप ने इसे फेक न्यूज कहा और कहा कि इससे देश के बहादुर पायलटों का अपमान हुआ। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखकर नताशा को नौकरी से निकालने की मांग की। - CNN की नताशा बर्ट्रेंड की रिपोर्ट में क्या था?
नताशा की रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि अमेरिकी हवाई हमलों से ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। यह सिर्फ कुछ महीने पीछे हुआ है। यह रिपोर्ट पेंटागन की खुफिया जानकारी पर आधारित थी। बाद में न्यूयॉर्क टाइम्स और एबीसी न्यूज ने भी इस बात की पुष्टि की। ट्रंप प्रशासन के सरकारी दावों और इस रिपोर्ट के बीच साफ अंतर था, जिसने विवाद को जन्म दिया। - CNN ने ट्रंप के दबाव पर क्या कहा?
CNN ने ट्रंप की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया। चैनल ने कहा कि वे अपनी रिपोर्टिंग पर कायम हैं और नताशा बर्ट्रेंड को हटाने का कोई सवाल नहीं है। CNN का रुख यह है कि पत्रकारिता का काम सरकार और जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछना है। किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर चैनल अपने पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा।
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