ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में उद्धव-राज ठाकरे का प्रदर्शन, SIR रद्द करने की मांग; CJP का 10 अक्टूबर को दिल्ली मार्च
वहीं अब कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने भी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया है।
मुंबई में यह मार्च मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक निकाला गया। शिवसेना यूबीटी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
महाराष्ट्र में मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया (SIR Controversy) को लेकर विपक्ष हमलावर है। इसी मुद्दे को लेकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने रविवार, 04 अक्टूबर को संयुक्त प्रदर्शन किया। दोनों नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की।
राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में SIR की पूरी प्रक्रिया रद्द होनी चाहिए। उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची से नाम हटने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं का कहना है कि सरकार किसकी बनेगी यह फैसला जनता करेगी और चुनावी संस्थाओं को निष्पक्ष रहना चाहिए।
आखिर SIR क्या है?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की गहराई से जांच की जाती है। इसका मकसद पात्र मतदाताओं के नाम सूची में रखना और गलत या डुप्लीकेट एंट्री को हटाना होता है।
महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया फिलहाल जारी है। चुनाव आयोग ने सुझाव और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई है। इन पर सुनवाई और निपटारे के लिए 10 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
राज ठाकरे ने क्या आरोप लगाए?
राज ठाकरे ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान 40 से 60 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए सत्ता हासिल की गई। राज ने यह भी दावा किया कि अब SIR के जरिए करीब दो करोड़ लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ये दो करोड़ मतदाता कौन हैं। राज ठाकरे ने कहा कि उनकी किसी व्यक्ति से निजी नाराजगी नहीं है। उनका विरोध इस बात को लेकर है कि चुनावी प्रक्रिया किस तरह चल रही है और सत्ता का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
राज ठाकरे ने कहा कि सरकार कौन बनाएगा इसका फैसला जनता करेगी। यह फैसला किसी संस्था को नहीं करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की।
उद्धव ठाकरे ने उठाए दो बड़े सवाल
उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को बीजेपी का हथियार बताया। उद्धव ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने का मामला गंभीर है और चुनाव आयोग को इस पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उद्धव का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
13 करोड़ नाम हटने का दावा
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक इन राज्यों में भी मतदाता सूची को लेकर सवाल उठे हैं।
उद्धव ने कहा कि कुछ लोग वोट देने के अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं। हालांकि 13 करोड़ नाम हटने का आंकड़ा उनका दावा है। इसकी आधिकारिक पुष्टि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका थी। बाद में कानून में बदलाव के बाद उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को समिति में शामिल किया गया।
मौजूदा व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री शामिल होता है। विपक्ष लंबे समय से इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता रहा है।
आयोग के भीतर मतभेद का मुद्दा
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद होने का दावा सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई। यह भी दावा किया गया कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए। हालांकि इस मामले में चुनाव आयोग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
उद्धव-राज का साथ आना क्यों अहम?
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लंबे समय तक अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर रहे हैं। राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही।
अब चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर दोनों नेताओं का एक साथ सड़क पर उतरना महाराष्ट्र की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का साझा प्रदर्शन भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
CJP का 10 अक्टूबर को दिल्ली मार्च
मुंबई में उद्धव और राज ठाकरे के प्रदर्शन के बाद अब दिल्ली में भी विरोध की तैयारी है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJPके फाउंडर अभिजीत दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया है।
अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से पार्टी समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया है। दीपके के मुताबिक पुलिस जहां रोकेगी वहीं प्रदर्शन किया जाएगा।
क्यों अहम है पूरा विवाद?
मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियाद होती है। इसी सूची से तय होता है कि कौन व्यक्ति मतदान कर सकता है। किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटने पर वह वोट नहीं डाल सकता।
इसी वजह से SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठ रहे सवाल राजनीतिक रूप से अहम हैं। विपक्ष ने बड़ी संख्या में नाम जुड़ने और हटने के आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ इन दावों की पुष्टि चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों से होना जरूरी है।
फिलहाल 40 से 60 लाख नाम जुड़ने, दो करोड़ नाम हटने और देशभर में 13 करोड़ नाम हटने जैसे आंकड़े नेताओं के दावे हैं। चुनाव आयोग का विस्तृत जवाब आने के बाद ही इन दावों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।