उज्जैन के महाकाल का आदेश, क्यों 51 शक्तिपीठों के रक्षक बने भगवान काल भैरव?
Kaushiki | Aug 04, 2026, 16:50 IST
ujjain kaal bhairav
भगवान काल भैरव को महादेव का सबसे उग्र और न्यायप्रिय रूप माना जाता है। इनकी उत्पत्ति ब्रह्मा जी के अहंकार को मिटाने के लिए हुई थी। उज्जैन में स्थापित काल भैरव मंदिर में मदिरा का भोग स्वीकार करने का अद्भुत और अनसुलझा रहस्य आज भी प्रसिद्ध है।
Kaun Hain Kaal Bhairav: हिंदू धर्म और पौराणिक मान्यताओं में भगवान काल भैरव का स्थान बेहद रहस्यमयी और शक्तिशाली माना गया है। जब भी तंत्र-मंत्र, भय से मुक्ति और न्याय की बात आती है, तो सबसे पहले भगवान काल भैरव का स्मरण किया जाता है।
वे देवाधिदेव महादेव के रुद्र रूप से प्रकट हुए एक बहुत ही उग्र अवतार हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काल भैरव का जन्म आखिर कब, कैसे और क्यों हुआ था? आइए जानें काल भैरव की उत्पत्ति और उनके कार्यों के बारे में।
![Kaal Bhairav Puja Online। उज्जैन कालभैरव कालभैरव की खास पूजा - News18 हिंदी]()
शिव पुराण और अन्य धर्म ग्रंथों के मुताबिक, काल भैरव की उत्पत्ति एक बहुत बड़ी पौराणिक घटना से जुड़ी हुई है। जब ब्रह्मा जी को अपनी शक्ति का अहंकार हो गया था, तब उनके उस घमंड को तोड़ने के लिए भगवान शिव ने अपने तेज से काल भैरव को प्रकट किया था। वे अपने हाथ में त्रिशूल लिए हुए प्रकट हुए थे।
प्रकट होते ही काल भैरव ने अपने पराक्रम से ब्रह्मा जी के उस पांचवें सिर को काट दिया। ब्रह्मा जी ने महादेव का अनादर किया था। इसके बाद भगवान शिव ने काल भैरव को एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी। उन्हें काशी और उज्जैन जैसी पवित्र नगरियों की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया।
आज भी उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां स्थापित प्रतिमा वास्तव में मदिरा का पान करती है, जो विज्ञान के लिए भी एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।
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प्रकट होते ही काल भैरव ने महादेव को प्रणाम किया। उन्होंने अपने उग्र रूप से ब्रह्मा जी को भयभीत कर दिया। काल भैरव ने अपनी उंगली के नाखून से सिर काट दिया। उन्होंने ब्रह्मा जी के उसी पांचवें सिर को धड़ से अलग किया।
इसी कारण काल भैरव पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया। ब्रह्मा जी का कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें पूरी पृथ्वी पर भटकना पड़ा। अंत में जब वे काशी पहुंचे तो वह सिर हाथ से छूटा। तभी से काशी को उनकी पाप मुक्ति की भूमि माना जाता है।
![काल भैरव: समय और मृत्यु के परम शासक — रहस्यों का सम्पूर्ण विश्लेषण]()
महादेव ने काल भैरव को बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं। उन्हें पापियों को दंड देने का सीधा अधिकार दिया गया। काल भैरव को काल यानी मृत्यु का स्वामी भी माना गया। उन्हें काशी नगरी का कोतवाल या रक्षक नियुक्त किया गया।
काशी में आने वाले हर प्राणी के कर्मों का हिसाब वही रखते हैं। इसके साथ ही उज्जैन नगरी की रक्षा का काम भी उन्हें मिला। वे अपने भक्तों की हर प्रकार के भय से रक्षा करते हैं। बुरी आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों को वे तुरंत नष्ट कर देते हैं।
![Kaal Bhairav's ride today]()
उज्जैन की पावन नगरी महाकाल के साथ-साथ अपने 'कोतवाल' यानी भगवान काल भैरव के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। शिप्रा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर कोई साधारण देवस्थान नहीं। बल्कि रहस्य और आस्था का एक अद्भुत संगम है। यहां प्रवेश करते ही एक अलग ही दिव्य ऊर्जा महसूस होती है।
इस मंदिर का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला रहस्य है यहां भगवान काल भैरव द्वारा साक्षात मदिरा का पान करना। सदियों से यहां आने वाले भक्त भगवान को प्रसाद के रूप में मदिरा अर्पित करते हैं। जब पुजारी जी मदिरा से भरा प्याला प्रतिमा के मुख से लगाते हैं, तो देखते ही देखते वह पलक झपकते ही खाली हो जाता है।
मान्यता है कि, काल भैरव मंदिर उज्जैन मेंमदिरा सीधे प्रतिमा की पथरीली मूर्ति के मुख में गायब हो जाती है। न तो मंदिर के नीचे कोई गुप्त नाली है, न ही प्रतिमा में कोई छिद्र या खोखलापन। कई ब्रिटिश वैज्ञानिकों और आधुनिक शोधकर्ताओं ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए मंदिर के आसपास गहरी खुदाई तक करवाई, लेकिन मदिरा कहाँ जाती है, यह पहेली आज भी अनसुलझी है।
तंत्र साधना के इस प्रमुख केंद्र में काल भैरव को पूरे शहर का रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव के इस उग्र रूप के दर्शन के बिना उज्जैन की यात्रा अधूरी रहती है। यहां का यह दिव्य चमत्कार विज्ञान की हर परिभाषा को धता बताते हुए भक्तों (काल भैरव की पूजा) की निष्ठा और आस्था को और अधिक अटूट बना देता है।
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पूरे भारत में काल भैरव का अनूठा मंदिर हैं, जिनमें से कुछ सबसे प्रमुख धाम ये हैं:
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वे देवाधिदेव महादेव के रुद्र रूप से प्रकट हुए एक बहुत ही उग्र अवतार हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काल भैरव का जन्म आखिर कब, कैसे और क्यों हुआ था? आइए जानें काल भैरव की उत्पत्ति और उनके कार्यों के बारे में।
Kaal Bhairav Puja Online। उज्जैन कालभैरव कालभैरव की खास पूजा - News18 हिंदी
क्या कहती है शिव पुराण की कथा
प्रकट होते ही काल भैरव ने अपने पराक्रम से ब्रह्मा जी के उस पांचवें सिर को काट दिया। ब्रह्मा जी ने महादेव का अनादर किया था। इसके बाद भगवान शिव ने काल भैरव को एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी। उन्हें काशी और उज्जैन जैसी पवित्र नगरियों की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया।
आज भी उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां स्थापित प्रतिमा वास्तव में मदिरा का पान करती है, जो विज्ञान के लिए भी एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।
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ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटने की घटना
इसी कारण काल भैरव पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया। ब्रह्मा जी का कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें पूरी पृथ्वी पर भटकना पड़ा। अंत में जब वे काशी पहुंचे तो वह सिर हाथ से छूटा। तभी से काशी को उनकी पाप मुक्ति की भूमि माना जाता है।
काल भैरव: समय और मृत्यु के परम शासक — रहस्यों का सम्पूर्ण विश्लेषण
शिव जी ने काल भैरव को क्या काम सौंपा
काशी में आने वाले हर प्राणी के कर्मों का हिसाब वही रखते हैं। इसके साथ ही उज्जैन नगरी की रक्षा का काम भी उन्हें मिला। वे अपने भक्तों की हर प्रकार के भय से रक्षा करते हैं। बुरी आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों को वे तुरंत नष्ट कर देते हैं।
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उज्जैन के काल भैरव का रहस्यमयी धाम
इस मंदिर का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला रहस्य है यहां भगवान काल भैरव द्वारा साक्षात मदिरा का पान करना। सदियों से यहां आने वाले भक्त भगवान को प्रसाद के रूप में मदिरा अर्पित करते हैं। जब पुजारी जी मदिरा से भरा प्याला प्रतिमा के मुख से लगाते हैं, तो देखते ही देखते वह पलक झपकते ही खाली हो जाता है।
मान्यता है कि, काल भैरव मंदिर उज्जैन मेंमदिरा सीधे प्रतिमा की पथरीली मूर्ति के मुख में गायब हो जाती है। न तो मंदिर के नीचे कोई गुप्त नाली है, न ही प्रतिमा में कोई छिद्र या खोखलापन। कई ब्रिटिश वैज्ञानिकों और आधुनिक शोधकर्ताओं ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए मंदिर के आसपास गहरी खुदाई तक करवाई, लेकिन मदिरा कहाँ जाती है, यह पहेली आज भी अनसुलझी है।
तंत्र साधना के इस प्रमुख केंद्र में काल भैरव को पूरे शहर का रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव के इस उग्र रूप के दर्शन के बिना उज्जैन की यात्रा अधूरी रहती है। यहां का यह दिव्य चमत्कार विज्ञान की हर परिभाषा को धता बताते हुए भक्तों (काल भैरव की पूजा) की निष्ठा और आस्था को और अधिक अटूट बना देता है।
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भारत में कहां-कहां विराजमान हैं काल भैरव
- काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश:
यह काल भैरव जी का सबसे मुख्य और प्रसिद्ध मंदिर है। इन्हें काशी का कोतवाल (काशी के रक्षक) कहा जाता है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पहले या बाद में काल भैरव के दर्शन करना अनिवार्य है। - उज्जैन, मध्य प्रदेश:
उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित काल भैरव मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां काल भैरव की मूर्ति को प्रत्यक्ष रूप से मदिरा का भोग लगाया जाता है, जिसे प्रतिमा ग्रहण भी कर लेती है। - 51 शक्तिपीठों में स्थापत्य:
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब देवी सती के अंग धरती पर अलग-अलग 51 स्थानों पर गिरे, तब वे पवित्र शक्तिपीठ कहलाए। भगवान शिव ने इन सभी 51 शक्तिपीठों की सुरक्षा और व्यवस्था का भार अपने अवतार भैरव को सौंपा। - हर एक शक्तिपीठ के साथ भगवान शिव ने एक-एक भैरव को क्षेत्रपाल यानी अंगरक्षक के रूप में स्थापित किया है। जैसे कामाख्या शक्तिपीठ में उमानंद भैरव, उज्जैन के हरसिद्धि पीठ में लंबकर्ण भैरव और वाराणसी के विशुद्धाक्षी पीठ में काल भैरव सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- नैनीताल (घोड़ाखाल), उत्तराखंड:
यहां गोलू देवता के रूप में काल भैरव के ही एक अवतार की पूजा होती है, जिन्हें न्याय का देवता माना जाता है। - कांचीपुरम और तिरुपति, दक्षिण भारत:
दक्षिण भारत के राज्यों (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक) में भी क्षेत्रपाल (सीमा के रक्षक) के रूप में काल भैरव के कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं।
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