UN का बड़ा फैसला: अब 27 नवंबर को मनाया जाएगा बाल विवाह उन्मूलन दिवस
समझें क्या है पूरा मामला
- संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को दिवस घोषित किया।
- प्रस्ताव सिएरा लियोन ने पेश किया था।
- भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
- भारत ने 2024 में अभियान शुरू किया था।
- सरकार 2026 तक दर 15% से नीचे लाना चाहती है।
संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित किया है। यह प्रस्ताव सिएरा लियोन ने रखा था, भारत ने इसका समर्थन किया। 2024 में इसी दिन भारत ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया था। सरकार का लक्ष्य 2026 तक दर 15% से नीचे लाना है। हाल के सर्वे में बाल विवाह के मामलों में गिरावट देखी गई है।
वैश्विक फैसला
संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। हर साल 27 नवंबर को अब बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस मनाया जाएगा। यह फैसला सतत विकास लक्ष्य (SDG – Sustainable Development Goals) 2030 को ध्यान में रखकर लिया गया है। दुनिया भर में बाल विवाह अब भी एक बड़ी सामाजिक समस्या बनी हुई है। इसी वजह से इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर जगह दी गई है।
यह प्रस्ताव सिएरा लियोन ने पेश किया था। भारत ने भी इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया। दुनिया भर के कई देशों ने इसे मंजूरी दी है। इससे साफ है कि बाल विवाह रोकने की मुहिम अब सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जिम्मेदारी बन गई है।
भारत के लिए क्यों खास तारीख
27 नवंबर की तारीख भारत के लिए अलग मायने रखती है। साल 2024 में इसी दिन केंद्र सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया था। इसका नाम बाल विवाह मुक्त भारत रखा गया। यह अभियान देश भर में बाल विवाह रोकने के लिए चलाया जा रहा है। यानी संयुक्त राष्ट्र की यह घोषणा भारत की मौजूदा कोशिशों के साथ मेल खाती है।
2026 और 2030 का लक्ष्य
सरकार ने इस अभियान के तहत दो बड़े लक्ष्य तय किए हैं। पहला लक्ष्य है, 2026 के अंत तक बाल विवाह की दर को 15% से नीचे लाना। दूसरा लक्ष्य है, 2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करना। ये दोनों लक्ष्य मिलकर देश को एक बड़े सामाजिक बदलाव की तरफ ले जाने की कोशिश हैं।
पिछले कुछ सालों में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है। कई राज्यों में जागरूकता बढ़ने से हालात में सुधार देखा गया है। फिर भी यह समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसे जड़ से मिटाने के लिए लगातार और कड़ी मेहनत जरूरी है। सिर्फ कानून बनाने से यह समस्या हल नहीं होगी, समाज को भी अपनी सोच बदलनी होगी।
सर्वे के आंकड़े क्या कहते हैं
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS – National Family Health Survey) के आंकड़े उम्मीद जगाते हैं। यह सर्वे देश में स्वास्थ्य और सामाजिक हालात को समझने के लिए किया जाता है। NFHS-5 के अनुसार, 2019 से 2021 के बीच 20 से 24 साल की 23.3% महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई थी। यह आंकड़ा दिखाता है कि बाल विवाह उस समय भी एक बड़ी चुनौती था।
वहीं NFHS-6 के ताजा आंकड़े राहत देने वाले हैं। यह सर्वे 2023-24 में किया गया था। इसमें यह आंकड़ा घटकर 20.1% पर आ गया। यानी कुछ सालों में ही करीब तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। यह सुधार धीमा जरूर है, लेकिन सही दिशा में है।
भुवन रिभु ने क्या कहा
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संस्थापक भुवन रिभु ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इस प्रस्ताव को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक मोड़ बताया। उनके मुताबिक, यह घोषणा भारत के लिए एक बड़ा मौका है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सामने एक मिसाल पेश कर सकता है।
10% का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
रिभु ने बताया कि सरकार का असली लक्ष्य और भी बड़ा है। सरकार चाहती है कि 2026 तक बाल विवाह की दर 10% तक आ जाए। यह लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी माना जा रहा है। हालांकि मौजूदा प्रगति को देखते हुए 15% से नीचे आने की प्रबल संभावना है। यानी पूरा लक्ष्य भले ही न मिले, बड़ा सुधार तय माना जा रहा है।
आगे की तैयारी क्या है
रिभु ने यह भी बताया कि 27 नवंबर से पहले बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी। स्कूल, पंचायत और स्थानीय संगठनों को भी इस मुहिम से जोड़ने की योजना है। मकसद यह है कि यह दिन सिर्फ एक याद दिलाने वाला दिन न बनकर रह जाए।
इसके बजाय यह दिन अब तक हुई प्रगति को परखने का मौका बने। साथ ही आगे के रास्ते पर विचार करने का जरिया भी बने। सरकार चाहती है कि हर राज्य इस दिशा में तेजी से काम करे। आने वाले सालों में इसका असर आंकड़ों में साफ दिखने की उम्मीद है।
यह कदम क्यों जरूरी है
बाल विवाह सिर्फ एक सामाजिक रस्म का मामला नहीं है। इसका सीधा असर बच्चियों की पढ़ाई और सेहत पर पड़ता है। कम उम्र में शादी होने से कई बार पढ़ाई बीच में छूट जाती है। इससे लड़कियों के आगे बढ़ने के मौके भी सीमित हो जाते हैं। यही वजह है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सरकारी योजनाओं से यह समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। समाज, परिवार और स्थानीय स्तर पर भी जागरूकता जरूरी है। जब परिवार खुद बाल विवाह के नुकसान को समझेंगे, तभी असली बदलाव आएगा। संयुक्त राष्ट्र की यह घोषणा इस दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है।
FAQ
- बाल विवाह उन्मूलन दिवस कब मनाया जाएगा?
यह दिवस हर साल 27 नवंबर को मनाया जाएगा। यह फैसला संयुक्त राष्ट्र ने लिया है। भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। - भारत में बाल विवाह घटाने का लक्ष्य क्या है?
सरकार 2026 तक दर को 15% से नीचे लाना चाहती है। 2030 तक इसे पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य है। यह अभियान बाल विवाह मुक्त भारत के नाम से चल रहा है। - NFHS सर्वे में क्या सामने आया है?
NFHS-5 में यह दर 23.3% थी। NFHS-6 में यह घटकर 20.1% रह गई। यानी बाल विवाह के मामलों में सुधार हुआ है।
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