31 दिसंबर से बदल जाएगा UPI, BHIM ऐप देगा PhonePe-Google Pay को टक्कर
समझें क्या है पूरा मामला...
- UPI में AI आएगा, PhonePe-Google Pay को टक्कर मिलेगी
- रोज 1 अरब ट्रांजैक्शन का सपना, NPCI का महाप्लान तैयार
- BHIM ऐप बनेगा आपका सबसे सुरक्षित पेमेंट साथी
- 30% मार्केट कैप- PhonePe और Google Pay की मनमानी होगी खत्म
- AI से मिलेगा लोन, पकड़ा जाएगा फ्रॉड- UPI का नया युग
भारत में यूपीआई पर रोजाना 75 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। अब NPCI के एमडी और सीईओ दिलीप असबे ने इसे 1 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए AI की मदद ली जाएगी। PhonePe और Google Pay के दबदबे को तोड़ने के लिए 30% मार्केट शेयर की सीमा तय की जाएगी। BHIM ऐप को सुरक्षित विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
UPI का अगला पड़ाव- 1 अरब ट्रांजैक्शन
भारत डिजिटल पेमेंट में दुनिया में सबसे आगे है। देश में UPI (Unified Payments Interface- एकीकृत भुगतान इंटरफेस) पर रोजाना 75 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। लेकिन NPCI (National Payments Corporation of India- भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) को यह काफी नहीं लगता।
NPCI के एमडी और सीईओ दिलीप असबे ने अब रोजाना 1 अरब ट्रांजैक्शन का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए 50 करोड़ नए यूजर्स को UPI से जोड़ना होगा। और इस पूरी योजना के केंद्र में है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI।
AI कैसे बदलेगा UPI का अनुभव
दिलीप असबे के मुताबिक नए यूजर्स को UPI से जोड़ने की सबसे बड़ी रुकावट है- सुरक्षा का डर। लोग ऑनलाइन पेमेंट में फ्रॉड से घबराते हैं।AI इसी डर को दूर करेगा।
धोखाधड़ी रोकने, फर्जी खातों की पहचान करने और मौजूदा यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए AI का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही AI की मदद से छोटे कारोबारियों और आम यूजर्स को आसानी से लोन भी मिल सकेगा।
इसके अलावा, जो लोग हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में ज्यादा सहज हैं, उनके लिए वॉयस आधारित पेमेंट की सुविधा भी तैयार की जा रही है।
SLM- छोटा मॉडल, बड़ा काम
दिलीप असबे ने SLM ( Small Language Model ) की बात भी कही है। भारत के पास डिजिटल पेमेंट का विशाल डेटा है। बैंक और फिनटेक कंपनियां इसी डेटा से अपने खुद के AI टूल बना सकती हैं। NPCI का FIMI मॉडल इसी दिशा में एक उदाहरण है। यह मॉडल अभी से लाखों यूजर्स की पेमेंट संबंधी समस्याओं को तेजी से सुलझा रहा है।
PhonePe-Google Pay का राज खत्म होगा
अभी UPI मार्केट का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ दो कंपनियों के पास है- वॉलमार्ट की PhonePe और Google Pay। यह स्वस्थ बाजार की निशानी नहीं है।
इसीलिए NPCI एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 31 दिसंबर 2026 से किसी भी UPI ऐप का मार्केट शेयर 30 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकेगा। इस नियम से दूसरी कंपनियों को बाजार में जगह मिलेगी।
BHIM बनेगा मजबूत विकल्प
सरकारी ऐप BHIM (Bharat Interface for Money- भारत इंटरफेस फॉर मनी) को NPCI एक नई पहचान देना चाहता है। इसे एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा। मकसद साफ है- बाजार में ज्यादा मुकाबला हो, ताकि आम यूजर को फायदा मिले। कोई एक कंपनी पूरे बाजार पर हावी न रहे।
FAQ
- UPI में AI का इस्तेमाल कैसे होगा?
AI की मदद से धोखाधड़ी रोकी जाएगी, फर्जी खाते पकड़े जाएंगे और यूजर्स को आसानी से लोन मिलेगा। भारतीय भाषाओं में वॉयस पेमेंट की सुविधा भी AI के जरिए दी जाएगी। - 30% मार्केट शेयर की सीमा का मतलब क्या है?
31 दिसंबर 2026 से कोई भी UPI ऐप चाहे PhonePe हो या Google Pay, 30% से ज्यादा मार्केट शेयर नहीं रख सकेगा। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और दूसरे ऐप्स को मौका मिलेगा। - BHIM ऐप को क्यों बढ़ावा दिया जा रहा है?
BHIM एक सरकारी ऐप है। NPCI इसे एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है ताकि PhonePe और Google Pay का एकछत्र राज खत्म हो और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बने।
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