UPSC ने AI से पकड़े 569 संदिग्ध आवेदन, CGPSC और व्यापम पर उठे सवाल
Umeshwari Baghel | Jun 28, 2026, 19:54 IST
UPSC ने AI से पकड़े 569 फर्जी आवेदन
UPSC ने AI की मदद से 569 संदिग्ध और डुप्लीकेट आवेदन पकड़ लिए और उन्हें आगे की प्रक्रिया से हटा दिया। अब CGPSC और व्यापम की परीक्षा प्रणाली में भी ऐसी तकनीक लगाने की मांग उठ रही है। तकनीक मददगार है, लेकिन अंतिम जांच इंसानों को ही करनी चाहिए।
समझें क्या है पूरा मामला
UPSC की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी आवेदन, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन और पहचान छिपाकर आवेदन करने के मामले लगातार चर्चा में रहते हैं। आयोग का मानना है कि AI आधारित जांच से आवेदन स्तर पर ही संदिग्ध पैटर्न की पहचान संभव हो जाती है, जिससे आगे की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित बनती है।
आवेदन प्रक्रिया में AI से कैसे मिल रही मदद
कई मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग जानकारी के साथ कई आवेदन किए जाते हैं। सामान्य सिस्टम केवल बुनियादी डेटा मिलान तक सीमित रहता है, जबकि AI आधारित टूल्स गहराई से पैटर्न पहचानने में सक्षम होते हैं। इसी आधार पर UPSC ने 569 संदिग्ध आवेदन पकड़े। इन आवेदनों को आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित न हो।
राज्य स्तरीय परीक्षाओं पर उठे सवाल
उनका मानना है कि अगर AI आधारित डुप्लीकेट डिटेक्शन और डेटा एनालिटिक्स सिस्टम अपनाया जाए, तो आवेदन स्तर पर ही गड़बड़ी रोकना संभव होगा। इससे परीक्षा से पहले ही संदिग्ध प्रोफाइल ब्लॉक किए जा सकते हैं और बाद की जांच प्रक्रिया का बोझ कम हो सकता है।
हालांकि अब तक CGPSC या व्यापम की ओर से AI आधारित सिस्टम लागू करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विशेषज्ञों की राय: तकनीक जरूरी लेकिन संतुलन भी जरूरी
वे मानते हैं कि गलत डेटा या तकनीकी त्रुटि की संभावना को देखते हुए दस्तावेजों और पहचान की भौतिक जांच जरूरी है। इससे ईमानदार अभ्यर्थियों को नुकसान होने की संभावना कम होगी।
एक अन्य विशेषज्ञ कुणाल सिंह का कहना है कि UPSC जैसी संस्थाएं अब फेशियल रिकग्निशन, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे टूल्स का उपयोग बढ़ा रही हैं। ऐसे में राज्य स्तरीय संस्थाओं के लिए भी तकनीकी अपग्रेडेशन समय की जरूरत बनता जा रहा है।
सिस्टम अपग्रेड में चुनौतियां भी बड़ी
परीक्षा प्रक्रिया में उपयोग होने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा बेहद संवेदनशील होते हैं। इसलिए इनके संरक्षण के लिए स्पष्ट नियम और साइबर सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
इसके अलावा यह भी तय करना होगा कि AI द्वारा संदिग्ध घोषित किए गए आवेदनों पर अपील और पुनः जांच की क्या प्रक्रिया होगी। बिना पारदर्शी प्रक्रिया के यह व्यवस्था विवादों का कारण भी बन सकती है।
IMP FACTS
आवेदन स्तर पर ही गड़बड़ी रोक दी गई।
फर्जी और एक से ज्यादा आवेदन करने के पैटर्न सामने आए।
CGPSC और व्यापम में भी AI सिस्टम की मांग बढ़ी।
विशेषज्ञों ने कहा-AI मददगार है, लेकिन मानव जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
अब बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी अपने परीक्षा सिस्टम को AI आधारित बना पाएंगे या पारंपरिक प्रक्रिया पर ही निर्भर रहेंगे।
FAQ
- UPSC ने AI का इस्तेमाल क्यों किया?
UPSC ने परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए AI का उपयोग शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और संदिग्ध आवेदनों को शुरुआत में ही पकड़ना है, ताकि आगे की चयन प्रक्रिया साफ और निष्पक्ष रह सके। - AI से कितने आवेदन पकड़े गए?
AI आधारित जांच के दौरान UPSC ने 569 संदिग्ध और डुप्लीकेट आवेदन चिन्हित किए। इन आवेदनों को आगे की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया, जिससे संभावित गड़बड़ी को पहले ही रोक दिया गया। - क्या CGPSC और व्यापम में भी AI लागू है?
अभी CGPSC और व्यापम में AI आधारित पूरी तरह विकसित सिस्टम लागू नहीं है। हालांकि UPSC की इस पहल के बाद राज्य स्तरीय परीक्षाओं में भी ऐसी तकनीक अपनाने की मांग तेज हो गई है, ताकि फर्जी आवेदन और डमी कैंडिडेट जैसी समस्याओं को कम किया जा सके।
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