अब पति नहीं, 58% मामलों में पत्नियां खुद मांग रही हैं तलाक, सामने आया बड़ा कारण

Anjali Dwivedi | Feb 24, 2026, 12:56 IST
divorce rate women empowerment report 2025
कामकाजी महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता अब उन्हें खराब रिश्तों से बाहर निकलने में मदद कर रही है। भारत में तलाक का औसत प्रतिशत 0.9% पहुंचा, महाराष्ट्र सबसे आगे।

News In Short

  • अब 58% मामलों में महिलाएं खुद तलाक की पहल कर रही हैं, जो पहले पति करते थे।
  • दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में पिछले 3 साल में तलाक के केस 3 गुना बढ़े हैं।
  • शादी के शुरुआती 3 साल सबसे चुनौतीपूर्ण होते हैं, 40% रिश्ते इसी दौरान टूट रहे हैं।
  • आपसी सहमति के अलावा क्रूरता (23%) और घरेलू हिंसा (14.5%) अलगाव की बड़ी वजह हैं।
  • भारत में सबसे ज्यादा 18.7% तलाक के मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं।

News In Detail

आधुनिक जीवनशैली और बदलती सोच के बीच परिवार के रिश्ते कमजोर होते दिख रहे हैं। यह सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि बदलते भारत की नई तस्वीर है। अब पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिलाएं असंतुष्ट शादीशुदा जीवन को सहन करने की बजाय उसे खत्म करने का हौसला दिखा रही हैं।



पहल करने में अब पीछे नहीं हैं महिलाएं

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि दो दशक पहले जहां केवल 0.6% विवाहित महिलाएं तलाकशुदा या अलग थीं, अब यह आंकड़ा बढ़कर 1% हो गया है।



सबसे बड़ा बदलाव पहल करने में आया है। पुणे में हुई एक पुरानी स्टडी (1986-87) के मुताबिक, तब 67% मामलों में पति तलाक की शुरुआत करते थे, लेकिन आज की तस्वीर उलट है। अब लगभग 58% मामलों में महिलाएं खुद आगे बढ़कर तलाक मांग रही हैं।



31 की उम्र में सबसे ज्यादा टूट रहे रिश्ते

प्राइवेट मार्केट रिसर्च कंपनियों की एक स्टडी के मुताबिक, देश में तलाक लेने वाली महिलाओं की औसत आयु 31 साल है, जबकि पुरुषों की औसत आयु 36 साल है। PLFS (Periodic Labour Force Survey) 2017-2024 के आंकड़े बताते हैं कि शहरी भारत में पुरुषों में तलाक का अनुपात 0.3% (2017-18) से बढ़कर 0.5% (2023-24) हो गया है।



महिलाओं में यह आंकड़ा 0.6% से बढ़कर 0.7% तक पहुंच गया है। पढ़ी-लिखी महिलाएं अब अपने कानूनी अधिकारों को अच्छी तरह समझती हैं। अपनी इज्जत और स्वाभिमान के लिए समझौता करने के बजाय आज़ादी की राह चुन रही हैं।



क्यों आती है रिश्तों में दरार?

साल 2025 तक के अनुमानित आंकड़ों पर नजर डालें, तो तलाक के पीछे आपसी सहमति सबसे बड़ा कारण (33.2%) है। हालांकि, कड़वी हकीकत यह भी है कि 23% मामलों में क्रूरता और 14.5% मामलों में घरेलू हिंसा जिम्मेदार है।



कारणअनुमानित केस (2025 तक)हिस्सेदारी (%)
आपसी सहमति2.5-3 लाख33.2%
क्रूरता1.8-2 लाख23.0%
घरेलू हिंसा1.2 लाख+14.5%
लगातार झगड़े90 हजार-1 लाख11.5%
व्यभिचार (Adultery)50-60 हजार6.6%

महानगरों में तीन गुना बढ़ा ब्रेकअप का ग्राफ

एडजुआ लीगल्स गूगल एनालिटिक्स 2025 की रिपोर्ट चौंकाती है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, हैदराबाद और कोलकाता जैसे महानगरों में पिछले तीन सालों में तलाक (Divorce Case) के मामले 3 गुना तक बढ़ गए हैं।



राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र (18.7%) इस सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद कर्नाटक (11.7%) का नंबर आता है। वैश्विक स्तर पर देखें तो मालदीव (5.52%) सबसे ऊपर है, जबकि भारत 0.9% के साथ अभी भी काफी नीचे है।



रिश्तों को सहेजने में मध्य प्रदेश आगे

अगर हम मध्य प्रदेश की बात करें, तो यहां के लोग आज भी रिश्तों को निभाने और सहेजने में काफी यकीन रखते हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में तलाक की दर (Divorce Rate) मात्र 0.5 है। आसान शब्दों में कहें तो, एमपी में हर एक हजार शादीशुदा जोड़ों में से सिर्फ एक जोड़ा ही अलग होने का फैसला ले रहा है।



यह संख्या देश के राष्ट्रीय औसत (0.6) से भी कम है।



सोर्स: indiadatamap.com



तीन साल का क्रिटिकल फेज

मुंबई फैमिली कोर्ट के एक अध्ययन के मुताबिक, 40% शादियां तो पहले तीन साल में ही टूट जा रही हैं। एक दिलचस्प बात ये है कि जनवरी, सितंबर और मई में तलाक की याचिकाएं सबसे ज्यादा आती हैं।



इसका कारण अक्सर छुट्टियों और त्योहारों के बाद लिया गया फैसला होता है। अच्छी बात यह है कि अब अदालतें 'वेटिंग पीरियड' को माफ कर रही हैं, जिससे तलाक की प्रक्रिया 30% तक तेज हो गई है और कम तनावपूर्ण भी हो गई है।



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