आईडीएफसी फर्स्ट बैंक: 590 करोड़ की धोखाधड़ी से निवेशकों को 14,000 करोड़ का नुकसान

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ की धोखाधड़ी, निवेशकों को 14,438 करोड़ का नुकसान। आरबीआई और बैंक प्रबंधन की निगरानी में जांच जारी है। जानें क्या है पूरा फर्जीवाड़ा?

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Jitendra Shrivastava
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idfc first bank

Photograph: (thesootr)

News In Short

1. आईडीएफसी बैंक में 590 करोड़ की धोखाधड़ी हुई।
2. बैंक कर्मचारियों और बाहरी मिलकर फर्जीवाड़ा किए।
3. धोखाधड़ी के बाद बैंक के शेयर 20% तक गिरे।
4. आरबीआई ने धोखाधड़ी से कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं बताया।
5. बैंक ने फोरेंसिक ऑडिट और रिकवरी के लिए कदम उठाए।

News In Detail

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank) की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने न केवल बैंक की साख को नुकसान पहुँचाया, बल्कि शेयर बाजार में भी हंगामा मचाया। इस धोखाधड़ी के कारण निवेशकों को भारी नुकसान हुआ, जिससे बैंक के शेयर 20% तक गिर गए। बैंक प्रबंधन ने चार कर्मचारियों को निलंबित किया और मामले की जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट किया गया। आइए जानते हैं इस मामले के पीछे की पूरी कहानी और आरबीआई की स्थिति क्या है।

590 करोड़ की धोखाधड़ी

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। यह घटना मुख्य रूप से हरियाणा सरकार से जुड़ी खातों तक सीमित थी। बैंक ने बताया कि शाखा के कर्मचारियों और बाहरी लोगों के सहयोग से यह धोखाधड़ी की गई। इन लोगों ने फर्जी चेक और जाली प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल करके मैन्युअल रूप से करोड़ों रुपये अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए।

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निवेशकों को भारी नुकसान

इस धोखाधड़ी के सामने आते ही बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई, जिससे निवेशकों की संपत्ति 14,000 करोड़ रुपये तक घट गई। यह एक झटके में बैंक के शेयरों में 20% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट थी। यह फर्जीवाड़ा बैंक के तीसरी तिमाही के शुद्ध लाभ से भी बड़ा था।

बैंक प्रबंधन की सफाई

बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने इस धोखाधड़ी को एक अलग-थलग घटना बताया और कहा कि यह 'सिस्टमिक फेल्योर' नहीं है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और यह धोखाधड़ी बैंक के लिए प्रबंधनीय होगी। बैंक ने अन्य बैंकों से संदिग्ध खातों में पड़े बैलेंस पर रोक लगाने का अनुरोध भी भेजा।

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आरबीआई गवर्नर की टिप्पणी

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक में किसी भी प्रणालीगत जोखिम की स्थिति नहीं है और यह धोखाधड़ी केवल हरियाणा सरकार के खातों तक ही सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक के अन्य ग्राहक सुरक्षित हैं।

अब आगे क्या होगा?

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का यह मामला बैंकिंग सेक्टर के नियंत्रण और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि प्रबंधन ने इसे एक सीमित घटना बताया है, लेकिन सरकारी फंड के प्रबंधन को लेकर बैंक की साख को नुकसान हुआ है। अब बाजार की नजर फोरेंसिक ऑडिट के नतीजों और चुराई गई रकम की रिकवरी पर है।

खबर से संबंधित सवाल...

FAQ

IDFC First Bank में 590 करोड़ की धोखाधड़ी कैसे हुई?
यह धोखाधड़ी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में हुई। कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने मिलकर फर्जी चेक और जाली प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल किया।

FAQ

IDFC First Bank में 590 करोड़ की धोखाधड़ी कैसे हुई?
यह धोखाधड़ी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में हुई। कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने मिलकर फर्जी चेक और जाली प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल किया।
IDFC First Bank में धोखाधड़ी से निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?
IDFC First Bank में धोखाधड़ी के बाद बैंक के शेयरों में 20% की गिरावट आई, जिससे निवेशकों की 14,000 करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।
IDFC First Bank बैंक के सीईओ ने इस मामले पर क्या कहा?
IDFC First Bank बैंक के सीईओ ने इसे 'सिस्टमिक फेल्योर' नहीं मानते हुए कहा कि यह एक अलग-थलग घटना है, और निवेशकों को आश्वस्त किया कि यह बैंक के लिए प्रबंधनीय है।

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