अमेरिका-ईरान के बीच समझौता, कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा हुई है।
- इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरीं।
- ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
- होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलने से तेल सप्लाई सामान्य होगी।
- भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम घटने की उम्मीद है।
ट्रंप का ऐलान, बाजार में राहत
सोमवार की सुबह वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी टोल के फिर से खोला जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी तत्काल हटाई जाएगी।
इस घोषणा के बाद दुनिया के तेल बाजारों में हलचल मच गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude यानी अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की मानक कीमत) में 3.9 फीसदी की गिरावट आई और यह 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिकी क्रूड ऑयल करीब 4.8 फीसदी टूटकर लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तेल सप्लाई की अनिश्चितता कम होने से यह राहत मिली है।
होर्मुज का रास्ता क्यों है इतना अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे जरूरी तेल व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल शिपमेंट का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद यह मार्ग बुरी तरह प्रभावित हो गया था।
ईरान के एक सांसद के मुताबिक, इस दौरान कमर्शियल जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए औसतन करीब 20 लाख डॉलर तक चुकाने पड़ रहे थे। विशेषज्ञों ने पहले ही आगाह किया था कि अगर यह संकट और लंबा खिंचता, तो कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकते थे।
19 जून को होंगे स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर
यह समझौता पाकिस्तान समेत कई देशों की मध्यस्थता से संभव हो पाया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच गहन बातचीत के बाद सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने पर राजी हुए हैं।
इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे। ट्रंप का यह एलान उनके 80वें जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में आयोजित UFC कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले आया है।
ट्रंप ने ओबामा डील से की तुलना
ट्रंप ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते से नई डील की तीखी तुलना की। उनका कहना है कि नई बातचीत से बना यह समझौता पहले वाले से बिल्कुल अलग है। यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने से पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि यह समझौता 14 शर्तों पर आधारित है।
समझौते की 14 अहम शर्तें
- ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और जुड़े एक्सपोर्ट पर लगी सभी पाबंदियां हटा दी जाएंगी।
- ईरान को अपने फाइनेंशियल रिसोर्सेज का पूरा एक्सेस फिर से मिल जाएगा।
- 60 दिन की बातचीत के दौरान फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इसमें 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही मिल जाएंगे।
- अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करेंगे।
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर चल रहा युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए खत्म होगा।
- अमेरिका ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल न देने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने का वादा करेगा।
- अमेरिका की तरफ से लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाई जाएगी।
- अमेरिकी सेनाएं ईरान के आसपास के इलाकों से वापस हटा ली जाएंगी।
- होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की व्यवस्था के तहत 30 दिनों में दोबारा खोल दिया जाएगा।
- परमाणु मुद्दों और पाबंदियों को पूरी तरह हटाने के लिए अंतिम समझौते तक पहुंचने की 60 दिन की बातचीत शुरू होगी।
- ईरान अपने NPT (परमाणु अप्रसार संधि) के तहत परमाणु हथियार न बनाने के वादे को दोहराएगा।
- अमेरिका बातचीत के दौरान इस क्षेत्र में सेना न बढ़ाने और नई पाबंदियां न लगाने पर सहमत होगा।
- एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा जो पूरे समझौते के लागू होने पर नजर रखेगा, और किसी भी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलेगी।
- ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और रेजिस्टेंस ग्रुप्स को समर्थन इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक 12 अरब डॉलर जारी नहीं होते, तेल पर पाबंदियां नहीं हटतीं और नाकेबंदी खत्म नहीं होती।
भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने का सीधा असर देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दामों पर पड़ सकता है। अगर होर्मुज मार्ग सुचारु हो जाता है और कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आम आदमी को ईंधन में राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, घरेलू कीमतें तेल कंपनियों और सरकार की नीति पर भी निर्भर करती हैं।
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