NEET विवाद के बीच विनीत जोशी का तबादला, गंगवार होंगे नए उच्च शिक्षा सचिव
समझें क्या है पूरा मामला
- उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का केंद्र ने तबादला किया।
- विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है।
- नरेश पाल गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त हुए।
- टीके अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा विभाग मिला।
- यह फेरबदल NEET विरोध प्रदर्शनों के बीच हुआ।
नई दिल्ली में केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी का तबादला हुआ है। उन्हें पंचायती राज मंत्रालय में नई जिम्मेदारी दी गई है। नरेश पाल गंगवार अब उच्च शिक्षा विभाग संभालेंगे। वह पहले पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव थे। सरकार ने गुरुवार रात यह प्रशासनिक बदलाव किया।
यह फैसला छात्र प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। छात्र कथित पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी मांग रहे हैं। हालांकि तबादला आदेश में कोई कारण नहीं बताया गया। आदेश ने बदलाव को पेपर लीक से भी नहीं जोड़ा। इसलिए इसे दंडात्मक कार्रवाई कहना अभी उचित नहीं होगा।
विनीत जोशी कहां भेजे गए
विनीत जोशी उच्च शिक्षा विभाग के सचिव थे। केंद्र ने अब उनका विभाग बदल दिया है। वह पंचायती राज मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। विनीत जोशी भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इसे IAS (Indian Administrative Service) कहा जाता है। वह शिक्षा प्रशासन में कई महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं।
विनीत जोशी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक भी रहे हैं। एजेंसी को NTA (National Testing Agency) कहा जाता है। यह संस्था देश की कई प्रवेश परीक्षाएं कराती है। जोशी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। इसे CBSE (Central Board of Secondary Education) कहा जाता है। उनका लंबा कार्यकाल शिक्षा और परीक्षा प्रशासन से जुड़ा रहा।
सरकारी आदेश ने उनके तबादले की पुष्टि की है। आदेश में इसे व्यापक सचिव स्तर का फेरबदल बताया गया। इसमें कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी बदले गए। इस आदेश में किसी अधिकारी पर आरोप नहीं लगाया गया। विनीत जोशी के खिलाफ कार्रवाई जैसा उल्लेख भी नहीं है। उनका केवल मंत्रालय और प्रशासनिक दायित्व बदला गया है।
राजस्थान में स्कूल शिक्षा सचिव रहे गंगवार
नरेश पाल गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त हुए हैं। वह राजस्थान कैडर के 1994 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने केंद्र और राजस्थान में कई पद संभाले हैं।गंगवार इससे पहले पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव थे। अब वह शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में आएंगे। यह विभाग विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान देखता है।
नरेश पाल गंगवार का शिक्षा विभाग से पुराना संबंध है। वह राजस्थान में स्कूल शिक्षा सचिव रह चुके हैं। उन्हें वर्ष 2014 में यह जिम्मेदारी मिली थी। वह राजस्थान के कई जिलों में कलेक्टर रहे हैं। उन्हें वर्ष 2001 में टोंक का कलेक्टर बनाया गया। इसके बाद उन्होंने अन्य जिलों की जिम्मेदारी संभाली।
गंगवार सवाई माधोपुर में भी कलेक्टर रहे। उन्होंने झालावाड़ और जोधपुर में भी जिम्मेदारी संभाली। वह भरतपुर के कलेक्टर भी बनाए गए थे।करीब ढाई दशक बाद वह केंद्र सरकार में आए। दिसंबर 2020 में उन्हें संयुक्त सचिव बनाया गया। वह पर्यावरण मंत्रालय में इस पद पर नियुक्त हुए। जनवरी 2022 में उन्हें अतिरिक्त सचिव बनाया गया। इसके बाद उन्हें पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी मिली। अब वह उच्च शिक्षा विभाग का नेतृत्व करेंगे।
स्कूली शिक्षा सचिव भी बदले गए
फेरबदल केवल उच्च शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहा। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग भी बदला गया। टीके अनिल कुमार को इसका नया सचिव बनाया गया। अनिल कुमार अभी ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत थे। अब वह शिक्षा मंत्रालय में जिम्मेदारी संभालेंगे। स्कूली शिक्षा विभाग महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का संचालन करता है।
यह विभाग केंद्र की स्कूली शिक्षा नीतियां भी बनाता है। राज्यों के साथ योजनाओं का तालमेल भी यही विभाग करता है। साक्षरता कार्यक्रम भी इसी विभाग के अंतर्गत आते हैं। उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा में एकसाथ बदलाव हुआ। इससे शिक्षा मंत्रालय का शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व बदल गया। दोनों अधिकारी नई जिम्मेदारियां जल्द संभाल सकते हैं।
NEET विवाद का क्या संबंध
यह प्रशासनिक फैसला महत्वपूर्ण समय पर आया है। दिल्ली में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका प्रदर्शन कथित नीट पेपर लीक से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वे कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
कुछ प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी मांग रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी छात्रों का समर्थन किया है। संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर टकराव हुआ। विपक्ष ने सरकार से विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
केंद्र सरकार ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में चर्चा का समर्थन किया। उन्होंने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया। प्रशासनिक फेरबदल इसी राजनीतिक माहौल में हुआ है। इससे बदलाव के समय पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने दोनों घटनाओं का सीधा संबंध नहीं बताया।
कई और अधिकारी बदले
केंद्र ने कई मंत्रालयों में सचिव स्तर के बदलाव किए। कतिकिथला श्रीनिवास का मंत्रालय भी बदला गया। उन्हें उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय भेजा गया। वह पहले आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में थे। पीयूष गोयल को भी नई जिम्मेदारी दी गई। उन्हें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का महासचिव बनाया गया।
आयोग को NHRC (National Human Rights Commission) कहा जाता है। पीयूष गोयल इससे पहले खान मंत्रालय में थे। सरकार ने सुशील कुमार लोहानी का विभाग भी बदला। लोहानी पंचायती राज मंत्रालय में कार्यरत थे। उन्हें पशुपालन और डेयरी विभाग भेजा गया। वह विशेष कार्य अधिकारी की भूमिका संभालेंगे।
अर्चना वर्मा को राष्ट्रीय जल मिशन की जिम्मेदारी मिली। वह जल शक्ति मंत्रालय में मिशन निदेशक बनी हैं। केशव चंद्रा को खान मंत्रालय का सचिव बनाया गया। डी थारा को आवास और शहरी मामलों में जिम्मेदारी मिली। चंद्र भूषण कुमार श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव बने। सतेंद्र सिंह को शहरी विकास विभाग भेजा गया।
सुचिंद्र मिश्रा को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में भेजा गया। वह वहां सचिव का पद संभालेंगे। बी राजेंद्र प्रशासन अकादमी के निदेशक बने रहेंगे।यह सूची फेरबदल का व्यापक स्वरूप दिखाती है। बदलाव केवल शिक्षा मंत्रालय में नहीं हुए हैं। कई विभागों में वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारियां बदली गई हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
राहुल के गांधी स्मृति मार्च में 120 से ज्यादा विपक्षी सांसद, पुलिस ने रोकी बसें
नीट पेपर लीक पर भोपाल में सियासी भूचाल, कांग्रेस आज करेगी पैदल मार्च
संसद का मानसून सत्र: जंतर-मंतर पर तनाव, राहुल गांधी बस में सवार होकर निकले
News Strike: संसद का मानसून सत्र हंगामेदार! ये 7 बड़े विधेयक होने हैं पेश, क्या हो पाएंगे?