News Strike: संसद का मानसून सत्र हंगामेदार! ये 7 बड़े विधेयक होने हैं पेश, क्या हो पाएंगे?

Harish Divekar | Jul 22, 2026, 07:00 IST
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Photograph: (thesootr)

News Strike: संसद का मानसून सत्र हंगामे के बीच जारी है। सरकार 7 बड़े विधेयक पेश करने की तैयारी में है। जानिए इन कानूनों का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार की नाक में दम कर दिया है। आंदोलन इतना एग्रेसिव हो चुका है कि सरकार के लिए सदन चलाना मुश्किल हो गया है। आप बाखबर रहना पसंद करते हों या न करते हों, लेकिन कॉकरोचों के आंदोलन को इग्नोर नहीं कर सकते।

पर अफसोस सरकार ने आंदोलन को पहले इग्नोर करने की कोशिश की और अब उन पर कभी आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं और कभी लाठियों के भरोसे उन्हें खदेड़ा जा रहा है। इसका असर संसद की कार्यवाही पर भी खूब पड़ रहा है।

समूचा विपक्ष सदन के बाहर है और कॉकरोचों के आंदोलन को समर्थन दे रहा है। साथ ही सरकार से बार-बार ये सवाल भी हो रहा है कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सरकार खामोश क्यों है।

पीएम मोदी ने आज कहा कि पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन कार्रवाई हो क्यों नहीं रही है। इसका जवाब नहीं दिया जा रहा।

सरकार अगर स्थिति क्लियर करती है तो आंदोलन की आग ठंडी पड़ सकती है और उन विधेयकों पर चर्चा हो सकती है। जिन्हें इस सत्र में लाने के लिए जोर शोर से तैयारी की गई है। हम आपको बताते हैं वो कौन-कौन से विधेयक हैं जो इस बार सदन में पेश होना प्रस्तावित हैं।

मानसून सत्र में विधेयकों की जंग

संसद का मानसून सत्र जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा हंगामेदार रहा है। सरकार की तैयारी अलग-अलग विधेयक लाकर इस सत्र को यादगार और ऐतिहासिक बनाने की थी, लेकिन सड़कों पर युवाओं का ऐसा आंदोलन छिड़ा कि सत्र और 20 जुलाई की तारीख ऐतिहासिक बन गई।

अभी तो जंतर मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जोरों पर है। सदन की पूरी कार्यवाही इसके इर्द गिर्द घूम रही है। इन सब के बीच सरकार सदन में कुछ नए विधेयक लाने की कोशिश कर सकती है।

संसद का नंबर गेम भी काफी हद तक बदल चुका है। तो क्या उन विधेयकों पर कार्यवाही आगे बढ़ेगी। आज इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि इस सत्र में कौन कौन से बड़े विधेयक आने वाले हैं। उनका मतलब क्या है और आखिर एक आम आदमी पर उनका क्या असर पड़ सकता है।

अगर आपको भी विधेयक, संशोधन और अध्यादेश जैसे शब्द मुश्किल लगते हैं, तो इस लेख में हम आपको हर विधेयक बेहद आसान भाषा में समझाएंगे। आखिर सरकार क्या बदलना चाहती है, इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है और ये कानून क्यों जरूरी माने जा रहे हैं।

पहला विधेयक

आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026

नाम सुनकर लग सकता है कि ये सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट के लिए है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। दरअसल सरकार पहले ही टैक्स से जुड़े कुछ बदलाव अध्यादेश के जरिए लागू कर चुकी है।

यहां हम आपको पहले अध्यादेश का मतलब आसान भाषा में समझाता हूं। मान लीजिए संसद का सत्र नहीं चल रहा है और सरकार को कोई फैसला तुरंत लागू करना है। ऐसे में सरकार अध्यादेश जारी करती है, लेकिन बाद में उसे संसद से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसलिए अब विधेयक लाने की तैयारी है।

सरकार टैक्स से जुड़े जिन नए नियमों को पहले लागू कर चुकी है। अब उन्हें संसद से मंजूरी दिलाना चाहती है। अगर ये विधेयक पास हो गया तो वही नियम स्थायी कानून बन जाएंगे।

दूसरा विधेयक

सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026

अब बात करते हैं उस विधेयक की जिसका सीधा संबंध न्याय व्यवस्था से है। आज सुप्रीम कोर्ट में हजारों मामले लंबित हैं। कई मामलों में लोगों को सालों साल फैसले का इंतजार करना पड़ता है।

सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई जाए। सोचिए... अगर किसी अस्पताल में मरीज ज्यादा हों और डॉक्टर कम, तो इलाज में देरी होगी ही। ठीक उसी तरह अदालतों में भी केस ज्यादा और जज कम होने से सुनवाई में समय लगता है।

अगर जजों की संख्या बढ़ती है तो ज्यादा बेंच बनेंगी। ज्यादा मामलों की सुनवाई होगी और लोगों को जल्दी न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। इसका भी पहले अध्यादेश जारी हो चुका है। जिस पर अब विधेयक लाने की तैयारी है।

तीसरा विधेयक

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026

अब ये सुनने में भले छोटा कानून लगे, लेकिन इसका असर लगभग हर परिवार पर पड़ सकता है। बच्चे का जन्म हो या किसी की मृत्यु... उसका सरकारी रिकॉर्ड होना जरूरी होता है।

इसी रिकॉर्ड के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और डेथ सर्टफिकेट बनते हैं। सरकार इस पूरी व्यवस्था को और आसान, डिजिटल और ट्रांसपेरेंट बनाना चाहती है।

मतलब भविष्य में जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड तेजी से तैयार हो सकता है। इसकी कोशिश की जाएगी। साथ ही सरकारी डेटा ज्यादा सटीक करने और लोगों को दस्तावेज बनाने में कम चक्कर लगाने पड़ें, इसका भी इंतजाम होगा।

चौथा विधेयक

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026

अब बात उस कानून की जो हमारे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा है। यानी तिरंगा, राष्ट्रगान, और दूसरे राष्ट्रीय प्रतीक। सरकार इस कानून में बदलाव करना चाहती है ताकि राष्ट्रीय सम्मान के अपमान से जुड़े नियम ज्यादा स्पष्ट और असरदार बनाए जा सकें।

सरल भाषा में कहें तो अगर कोई हमारे तिरंगे या राष्ट्रगान का अपमान करता है तो उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को अपडेट किया जा सकता है। अभी ये साफ नहीं है कि सरकार क्या क्या बदलाव करेगी, लेकिन संसद में पेश होने के बाद इसकी पूरी तस्वीर सामने आएगी।

पांचवां विधेयक

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026

अगर आपका छोटा बिजनेस है। छोटी फैक्ट्री है। स्टार्टअप है या कोई दुकान चलाते हैं। तो ये विधेयक आपके लिए अहम हो सकता है।एमएसएमई यानी माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज देश की इकोनॉमी की रीढ़ माने जाते हैं।

सरकार इस कानून में बदलाव करके छोटे कारोबारियों को सरकारी योजनाओं का फायदा आसानी से दिलाना चाहती है। संभव है कि कुछ नियम आसान किए जाएं, कुछ प्रक्रियाएं बदली जाएं और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नए नियम जोड़े जाएं।

अब बात करते हैं उन दो विधेयकों की जो पहले से संसद में लंबित हैं।

पहला

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026

इसे FCRA संशोधन विधेयक भी कहा जाता है। ये कानून उन एनजीओ, ट्रस्ट और संस्थाओं से जुड़ा है जिन्हें विदेश से पैसा मिलता है। सरकार चाहती है कि विदेशी फंडिंग पर और ज्यादा निगरानी रखी जाए।

बताया जा रहा है कि रजिस्ट्रेशन, फंड के इस्तेमाल और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों को और सख्त किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि इससे विदेशी दखल पर भी रोक लगेगी।

हालांकि, एक मत ये भी है कि इससे एनजीओ पर दबाव बढ़ सकता है। ये विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया जा चुका है। अब इसी पर चर्चा आगे बढ़ेगी।

दूसरा

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025

ये विधेयक एजुकेशन से जुड़ा है। सरकार एक ऐसा नया नेशनल इंस्टीट्यूट बनाना चाहती है जो देश के एजुकेशन सिस्टम को आने वाले समय के हिसाब से तैयार कर सके। यानी एजुकेशन में रिसर्च बढ़े। नई तकनीक आए।

बेहतर नीतियां बनें और स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन तक सुधार की दिशा में काम हो। ये विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन बाद में इसे जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी जॉइंट कमेटी के पास भेज दिया गया था। अब सरकार इसे आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

संसद में बदला नंबर गेम, मजबूत हुआ NDA

ये तो बात हुई कि सरकार की रणनीति क्या है। इस बार सत्र के आंकड़े भी दिलचस्प हैं। क्योंकि इस बार संसद का नंबर गेम बदल गया है। नए गणित के हिसाब से केंद्र सरकार पहले से ज्यादा ताकतवर हो चुकी है। बजट सत्र के समय एनडीए के पास करीब 293 सांसद थे। अब ये संख्या बढ़कर 319 हो गई है।

टीएमसी में टूट, उद्धव ठाकरे की शिवसेना से सांसदों का अलग होना और राजनीतिक समीकरण बदलने से सरकार पहले से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है।

राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति पहले से बेहतर मानी जा रही है। हालांकि, संविधान संशोधन जैसे बड़े कानून पास कराने के लिए सरकार को अभी भी दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

विपक्ष का हमला, सदन में हंगामा जारी

उधर विपक्ष भी पूरी तैयारी में है। विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमत, NEET पेपर लीक जैसे मामलों पर सरकार को घेरने के मूड में है। पर अभी जो हालात हैं उसे देखकर लगता है कि विपक्ष का काम कॉकरोच जनता पार्टी सदन के बाहर रहकर ही कर रही है।

सीजेपी के आंदोलन के चलते सदन का पहला दिन ही बेहद हंगामेदार रहा। दूसरे दिन यानी कि आज का हाल भी कुछ ऐसा ही है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही आधे दिन में ही स्थगित हो गई।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकारर अपनी सोची समझी रणनीति पर आगे बढ़ पाती है या युवाओं का आंदोलन सरकार की मुश्किलें बढ़ाता है। देश-दुनिया | न्यूज स्ट्राइक। News Strike

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