SIR विवाद के बीच ममता का कल्याण बनाम भाजपा का बदलाव, बंगाल किसे चुनेगा?
Pawan Modiya | Apr 22, 2026, 18:57 IST
Photograph: (the sootr)
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है। भवानीपुर में ममता और शुभेंदु आमने-सामने हैं। 91 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का विवाद भी बड़ा मुद्दा बन गया है। ऐसे मैं बंगाल का गढ़ कौन जीत रहा... इस विश्लेषण से समझिए...
समझें क्या है पूरा मामला
- पश्चिम बंगाल में 2026 का विधानसभा चुनाव बड़ी राजनीतिक लड़ाई बन गया है।
- ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से खुद चुनाव लड़ रही हैं और उनके सामने हैं शुभेंदु अधिकारी।
- मतदाता सूची से 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं, जो बड़ा विवाद बन चुका है।
- TMC (Trinamool Congress) का लक्ष्य 250 सीटें जीतना है, भाजपा 170 सीटों का दावा कर रही है।
- यह चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा।
बंगाल में क्यों है इतनी बड़ी जंग?
अब 2026 में भाजपा के लिए यह "अब या कभी नहीं" वाली स्थिति है। पार्टी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि बंगाल भाजपा के लिए सिर्फ राज्य नहीं, एक वैचारिक लक्ष्य भी है। यह चुनाव ममता के लिए सबसे कठिन है और भाजपा के लिए सबसे बड़ा मौका। क्या इस बार बंगाल में कमल खिलेगा या फिर दीदी के हाथ में ही रहेगी सत्ता की चाबी.. आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
भवानीपुर: सबकी नजर इस एक सीट पर
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91 लाख वोटर कटे, विवाद क्यों गहरा है?
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SIR (Special Intensive Revision) यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण इस चुनाव का सबसे बड़ा और सबसे विवादित मुद्दा है। एसआईआरप्रक्रिया में 91 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इनमें 31 लाख महिलाएं शामिल हैं। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम-बहुल इलाकों में भी बड़ी संख्या में नाम काटे गए। ये दोनों TMC के मजबूत वोट बैंक माने जाते हैं।
कोलकाता के साबर इंस्टीट्यूट के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। नंदीग्राम में कटे नामों में 94.5% मुसलमानों के हैं, जबकि वहां उनकी कुल आबादी सिर्फ 25% है। ममता इसे भाजपा और केंद्र सरकार की साजिश बता रही हैं। भाजपा का कहना है कि यह चुनाव आयोग की स्वतंत्र और पारदर्शी प्रक्रिया है।
रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती के मुताबिक 177 सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या 2021 के जीत के अंतर से ज्यादा है। इनमें 119 सीटें TMC और 57 सीटें भाजपा ने जीती थीं। 2021 में 36 सीटों का फैसला महज 5,000 से कम वोटों के अंतर पर हुआ था। ऐसे में लाखों वोट कटने से नतीजे पलट सकते हैं।
भ्रष्टाचार और अभया केस भी मुद्दे पर
13 अप्रैल 2026 को ED (Enforcement Directorate) ने iPAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को कोयला घोटाले में गिरफ्तार किया। TMC ने इसे भी केंद्र की राजनीतिक कार्रवाई बताया।
TMC और भाजपा का दांव क्या है?
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लक्ष्मी भंडार के तहत महिलाओं को हर महीने 1,500 से 1,700 रुपए मिलते हैं। युवा साथी युवाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना है। ग्रामीण बंगाल में ममता की लोकप्रियता आज भी जबरदस्त है। उनका हेलिकॉप्टर दिखते ही भीड़ उमड़ आती है।
भाजपा का नारा है "पलटानो दरकार, चाई बीजेपी सरकार" यानी बदलाव चाहिए, भाजपा सरकार चाहिए। पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपए देने का वादा किया है। TMC ने इस पर पलटवार किया है। ममता ने कहा है कि दिल्ली में 2,500 रुपए का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ।
कांग्रेस और वाम मोर्चा भी मैदान में
क्या बदल सकती है देश की राजनीति?
अगर भाजपा जीती तो पूरब में विपक्ष का आखिरी बड़ा गढ़ टूट जाएगा। INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance) गठबंधन को भारी झटका लगेगा। 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और मजबूत होकर उतरेगी।
29 अप्रैल 2026 को पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि SIR से जिनके नाम कटे हैं, क्या वे वोट डाल पाएंगे? यही इस चुनाव का सबसे बड़ा अनजाना पहलू है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
3 जरूरी FAQ
SIR यानी Special Intensive Revision एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग मतदाता सूची की गहन समीक्षा करता है और जो नाम फर्जी या अपात्र लगते हैं उन्हें हटाता है। बंगाल चुनाव 2026 में इस प्रक्रिया के तहत 91 लाख से ज्यादा नाम काटे गए। विवाद इसलिए है क्योंकि हटाए गए नामों में 31 लाख महिलाएं और मुस्लिम बहुल इलाकों के वोटर सबसे ज्यादा हैं। ये दोनों TMC के मुख्य वोट बैंक हैं। TMC इसे केंद्र की साजिश बता रही है, जबकि भाजपा कहती है कि यह चुनाव आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया है।
सवाल 2: भवानीपुर सीट इतनी अहम क्यों है?
भवानीपुर ममता बनर्जी की परंपरागत सीट है। यह कोलकाता के दिल में स्थित है और राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहां ममता का मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से है, जो कभी उनके सबसे करीबी सहयोगी थे और 2021 में नंदीग्राम में उन्हें हरा चुके हैं। अगर ममता अपनी ही सीट हार जाती हैं तो यह TMC के लिए राजनीतिक और भावनात्मक दोनों तरह से बड़ा झटका होगा।
सवाल 3: बंगाल चुनाव 2026 का असर 2029 के लोकसभा चुनाव पर कैसे पड़ेगा?
अगर ममता बनर्जी जीतती हैं तो वे राष्ट्रीय विपक्ष की सबसे ताकतवर आवाज बनकर उभरेंगी। INDIA गठबंधन को नई ऊर्जा मिलेगी और 2029 में भाजपा के सामने एक मजबूत चुनौती खड़ी होगी। अगर भाजपा जीतती है तो पूर्वी भारत में उसका दबदबा और बढ़ेगा, विपक्ष कमजोर होगा और 2029 में सत्ता की राह उसके लिए और आसान हो जाएगी। इसीलिए राजनीतिक विश्लेषक इसे 2029 का सेमीफाइनल कह रहे हैं।
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