जोमैटो-स्विगी की फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, ऐसे खाली हो रही आपकी जेब
News In Short
- महीने में 12 बार खाना मंगाने पर 900 रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
- ऑनलाइन खाने की कीमत ऑफलाइन से 10-15% अधिक वसूली जा रही है।
- प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में दो रुपए से बढ़कर 17.50 (9 गुना) हो गई है।
- 95% ग्राहक सिर्फ इसलिए बने रहते हैं क्योंकि कैंसिल करना झंझट भरा काम है।
- फूड डिलीवरी बाजार इस साल के अंत तक 2.25 लाख करोड़ का हो जाएगा।
News In Detail
ऑनलाइन फूड डिलीवरी और OTT की लत अब मिडिल क्लास की जेब पर डाका डाल रही है। मिनटों में ग्रोसरी और घर बैठे मनपसंद खाना मंगाने की सुविधा अब इतनी महंगी हो चुकी है कि एक आम परिवार का बजट हर महीने 2 हजार से 5 हजार तक बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह पैसा धीरे-धीरे आपकी जेब से निकलता है, इसलिए इसका अहसास भी नहीं होता।
छोटे-छोटे खर्चों का बड़ा बोझ
अक्सर हमें लगता है कि सिर्फ खाने के पैसे ही तो दे रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। यदि आप महीने में केवल 12 बार भी किसी फूड डिलीवरी ऐप (Online food delivery) से ऑर्डर करते हैं, तो आप अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरिक्त खर्च कर देते हैं।
इसमें 160 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल होता है। यह रकम सालाना आधार पर हजारों में पहुंच जाती है। मार्च 2026 की रिपोर्ट बताती है कि जोमैटो और Swiggy जैसे ऐप्स पर प्लेटफॉर्म फीस पिछले तीन सालों में नौ गुना तक बढ़ चुकी है।
ऑफलाइन से 15% ज्यादा महंगे दाम
सिर्फ एक्स्ट्रा चार्ज ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन मेन्यू के दाम भी ऑफलाइन के मुकाबले 10% से 15% तक ज्यादा होते हैं। Zomato में महज तीन ऑर्डर करने का मतलब है कि आप महीने में 150-250 सिर्फ प्लेटफॉर्म फीस पर दे रहे हैं। इस साल डिलीवरी चार्ज भी 40-60 प्रति ऑर्डर तक पहुंच गया है। क्विक कॉमर्स की आदत महामारी के समय पड़ी थी, लेकिन अब कंपनियां सब्सिडी खत्म कर वसूली पर उतर आई हैं।
आर्डर कैंसिल करना हुआ मुश्किल
ओटीटी और अन्य डिजिटल सेवाओं का बिजनेस मॉडल बहुत चालाकी से तैयार किया गया है। मैकिंजी की रिपोर्ट के मुताबिक, लोग सब्सक्रिप्शन तभी कैंसिल करते हैं जब कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाएं। ज्यादातर लोग जड़ता के कारण इसे जारी रखते हैं, क्योंकि कैंसिल करने के लिए सक्रिय प्रयास करना पड़ता है, जबकि बने रहने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि रात 2 बजे आपके 199 से 499 रुपए वाले सब्सक्रिप्शन खुद ही रिन्यू हो जाते हैं और आपको पता तक नहीं चलता।
तेजी से बढ़ता फूड और ओटीटी बाजार
आंकड़ों पर गौर करें तो 2023 में भारत का ऑनलाइन फूड बाजार 69 हजार रुपए करोड़ का था, जो इस साल के अंत तक 2.25 लाख करोड़ होने का अनुमान है। वहीं, ओटीटी का पेड सब्सक्रिप्शन मार्केट 2023 के 8 हजार 200 करोड़ से बढ़कर इस साल 11 हजार 191 रुपए करोड़ तक पहुंच सकता है। बीते साल भारत में स्ट्रीमिंग ऑडियंस की संख्या 60.1 करोड़ दर्ज की गई थी।
ईरान-इजराइल जंग और बढ़ती महंगाई
पश्चिम एशिया के संघर्ष ने भी आग में घी डालने का काम किया है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल को छूने के बाद अब $96 पर हैं। अगर यह तनाव लंबा खिंचा, तो डिलीवरी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से घर का बजट 10% तक और बढ़ सकता है। वेल्थ मैनेजमेंट फर्म का सुझाव है कि बढ़ती महंगाई के लिए अभी से तैयार रहें।
प्लेटफॉर्म फीस का सफर
- 2023: स्विगी और जोमैटो ने 2 रुपए की प्लेटफॉर्म फीस से शुरुआत की।
- 2024: फेस्टिव सीजन में यह फीस बढ़कर 10 रुपए तक पहुंच गई।
- 2025: जीएसटी लगने के बाद यह 12-15 रुपए के बीच रही।
- मार्च 2026: अब दोनों प्लेटफॉर्म्स पर यह फीस जीएसटी समेत 17.50 रुपए हो चुकी है।
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