अधिकमास 2026: ज्येष्ठ महीने में निर्जला समेत इन 4 एकादशियों का संयोग, बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा
अधिकमास 2026: हिंदू धर्म में इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम लेकर आया है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 2026 में अधिकमास लगने के कारण दो ज्येष्ठ महीने होंगे। इस बार अधिकमास लगने के कारण दो ज्येष्ठ महीने होंगे।
इसे पुरुषोत्तम मास के रूप में भी पूजा जाता है। इस दुर्लभ संयोग के चलते 17 मई से 25 जून के बीच कुल चार एकादशियां आएंगी। इसमें अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी शामिल हैं। आइए इसे जानें...
पुरुषोत्तम मास में विष्णु साधना का महत्व
अधिक मास को स्वयं भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए जप-तप का अनंत फल मिलता है। इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा और गीता पाठ करना चाहिए। भजन-कीर्तन और सेवा कार्यों से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
इस बार 11 और 25 जून की एकादशी गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार भगवान विष्णु का प्रिय दिन माना जाता है। यह संयोग आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला है।
विशेष रूप से निर्जला एकादशी का कठिन व्रत भक्तों को सालभर की सभी एकादशियों का पुण्य फल मिलेगा। इसमें जप, तप और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी व्रत का महत्व
सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी तिथि को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं क्योंकि महाबली भीम ने इसे बिना जल पिए पूरा किया था।
यह व्रत सबसे कठिन माना जाता है। इसमें बिना जल ग्रहण किए पूरे दिन उपवास रखा जाता है। इस एक व्रत से सालभर की सभी 24 एकादशियों का फल मिलता है।
इस बार यह एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी। इस दिन जलदान और छबील लगाने का बड़ा पुण्य है। इस दिन प्यासे लोगों को पानी पिलाने, शरबत की छबील लगाने और मिट्टी के घड़े का दान करने का विशेष महत्व है।
आर्थिक संकटों से मिलेगी मुक्ति
भक्ति का यह सिलसिला 13 मई से शुरू हो चुका है। सबसे पहले अपरा एकादशी आएगी जिसे अचला एकादशी भी कहते हैं। इसके बाद 27 मई को पद्मिनी एकादशी (एकादशी पर सभी समस्याएं होंगी दूर)का योग बनेगा। इसे कमला एकादशी भी कहा जाता है जो सुख देती है। यह व्रत संतान सुख और वैभव प्राप्त करने वाला है। इसके बाद 11 जून को परमा एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा।
यह एकादशी दरिद्रता और आर्थिक तंगी को दूर करती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, कुबेर देव ने ये व्रत किया था। उन्हें इस व्रत के प्रभाव से ही अपार धन मिला था। यह एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली भी मानी जाती है। खास बात यह है कि यह व्रत गुरुवार को है।
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FAQ
- अधिकमास क्या है और इसे पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक महीना बढ़ जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिकमास या मलमास कहा जाता है। भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया है। इसलिए इस महीने में उनकी पूजा का विशेष महत्व है। - निर्जला एकादशी का व्रत इतना कठिन क्यों माना जाता है?
इस व्रत में सूर्योदय से अगले दिन तक पानी नहीं पीते। ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में यह एक बड़ी तपस्या है। इसलिए इसे सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इससे शारीरिक और मानसिक संयम की शक्ति बढ़ती है। - क्या अधिकमास में शुभ कार्य वर्जित होते हैं?
अधिकमास में विवाह और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते। लेकिन पूजा-पाठ, दान और तीर्थ यात्रा करना बहुत शुभ है। इस दौरान की गई साधना का फल कई गुना मिलता है। यह समय केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित होता है।
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