कैसे चंद्रदेव के नाम पर पड़ा इस पावन धाम का नाम, जानें सोमनाथ मंदिर का रहस्य

Kaushiki | May 11, 2026, 11:34 IST
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Somnath Temple
Somnath Temple

सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला और अत्यंत पावन माना जाता है। चंद्रदेव ने यहाँ तपस्या कर शाप से मुक्ति पाई थी। यह मंदिर आस्था, गौरव और बार-बार पुनर्निर्माण की अद्भुत मिसाल है। यहाँ दर्शन से सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भारत के गुजरात राज्य में एक बहुत ही पवित्र स्थान है। इसे हम श्री सोमनाथ मंदिर के नाम से जानते हैं। यह मंदिर सौराष्ट्र क्षेत्र के प्रभास पाटन में स्थित है। हिंदू धर्म में इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला माना गया है। हर साल यहां लाखों भक्त महादेव के दर्शन करने आते हैं।

यह मंदिर हमारी संस्कृति और अटूट विश्वास का प्रतीक है। इसकी चमक आज भी पूरी दुनिया को अपनी ओर खींचती है। आज (11 मई 2026) इस ऐतिहासिक घटना को पूरे 75 साल हो गए हैं।

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से बना यह मंदिर आज अपनी प्लेटिनम जुबली मना रहा है। आज ही के दिन साल 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की थी।

कई बार विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा तोड़े जाने के बाद भी यह मंदिर अपनी अटूट आस्था के साथ खड़ा है। आइए जानें इसका इतिहास...

क्यों चंद्रदेव को करना पड़ा शिव का कठिन ध्यान

सोमनाथ मंदिर की कहानी बहुत ही पुरानी और दिलचस्प है। पौराणिक कथा के अनुसार यह चंद्रमा से जुड़ी हुई है। चंद्रदेव का विवाह राजा दक्ष की 27 पुत्रियों के साथ हुआ था।

लेकिन चंद्रमा केवल अपनी पत्नी रोहिणी से ही प्रेम करते थे। बाकी 26 पत्नियां इस व्यवहार से बहुत दुखी रहने लगीं। उन्होंने अपने पिता दक्ष से चंद्रमा की शिकायत कर दी। दक्ष ने चंद्रमा को समझाया पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया।

Somnath Temple : शिव का पहला ज्योतिर्लिंग जहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं  दोष और पूरी होती हैं मनोकामनाएं | Know significance of somnath jyotirlinga  temple
Somnath Temple : शिव का पहला ज्योतिर्लिंग जहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं दोष और पूरी होती हैं मनोकामनाएं | Know significance of somnath jyotirlinga temple


राजा दक्ष का शाप और चंद्रमा का तप

गुस्से में आकर राजा दक्ष ने चंद्रमा को एक शाप दिया। उन्होंने कहा कि अब से तुम्हारी चमक धीरे-धीरे खत्म होगी। शाप के कारण चंद्रमा को क्षय रोग (टीबी) हो गया।

उनकी कलाएं घटने लगीं और पूरी दुनिया में अंधेरा छा गया। देवता भी परेशान हो गए और ब्रह्माजी के पास मदद मांगने गए। ब्रह्माजी ने चंद्रमा को शिव की शरण में जाने को कहा। वे प्रभास क्षेत्र में आकर शिव की तपस्या करने लगे।

Sawan 2020 Story Of First Jyortirling Somnath Jyotirlinga Temples Of India  Moon Panchang | Sawan 2020: सोमनाथ में है प्रथम ज्योतिर्लिंग, चंद्रमा ने की  थी स्थापना, जानें महत्व और कथा
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महादेव की कृपा और शाप से मुक्ति का वरदान

चंद्रमा ने प्रभास क्षेत्र में महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। उन्होंने 10 करोड़ बार मंत्र पढ़कर शिव को प्रसन्न किया।महादेव प्रकट हुए और चंद्रमा को वरदान देकर जीवनदान दिया।

शिव ने कहा कि तुम पूरी तरह खत्म नहीं होगे। एक पक्ष में तुम्हारी चमक घटेगी और दूसरे में बढ़ेगी। चंद्रदेव की इच्छा पर शिव वहीं ज्योतिर्लिंग रूप में बस गए। चूंकि चंद्रमा का एक नाम सोम है, इसलिए इसे सोमनाथ कहा गया।

Story of Somnath Mandir that Demolished 17 times, still stands proudly
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सोमनाथ मंदिर का इतिहास

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ने समय के कई कठिन दौर देखे हैं। इसकी अपार धन-दौलत ने विदेशी आक्रमणकारियों को आकर्षित किया। महमूद गजनवी जैसे हमलावरों ने इसे कई बार लूटा।

मंदिर को गिराने और नष्ट करने की पूरी कोशिश की गई। लेकिन हिंदुओं की आस्था को कोई खत्म नहीं कर सका। हर हमले के बाद स्थानीय राजाओं ने इसे फिर बनवाया। यह मंदिर बताता है कि सत्य कभी पराजित नहीं होता।

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सरदार पटेल और आधुनिक सोमनाथ का निर्माण

आजादी के बाद मंदिर के हालात फिर से सुधारने की सोची गई। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों से ही वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।

आज जो हम सोमनाथ देखते हैं, वह उनकी ही देन है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहां ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। आज यह भव्य मंदिर समुद्र किनारे अपनी गरिमा बिखेर रहा है। यहां की शाम की आरती मन को शांति देती है।

सोमनाथ मंदिर गुजरात के जाने-अनजाने तथ्य
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मंदिर की अनोखी मान्यताएं

सोमनाथ मंदिर के पास तीन पवित्र नदियों का मिलन होता है। यहाँ कपिला, हिरण्य और सरस्वती नदी समुद्र में मिलती हैं। इस संगम पर स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

कहते हैं यहां स्नान के बाद दर्शन से मोक्ष मिलता है। प्राचीन काल में यहां का शिवलिंग हवा में स्थित था। वह चुम्बकीय शक्ति के कारण हवा में ही लटका रहता था। यह विज्ञान और अध्यात्म का एक अद्भुत मेल था।

first of the 12 jyotirlinga somnath temple | religious significance of  amazing mysteries Somnath mandir | 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ मंदिर,  स्कंद पुराण में है रोचक कथा, अद्भुत रहस्यों से भरा है इसका धार्मिक महत्व -  News18 हिंदी
first of the 12 jyotirlinga somnath temple | religious significance of amazing mysteries Somnath mandir | 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ मंदिर, स्कंद पुराण में है रोचक कथा, अद्भुत रहस्यों से भरा है इसका धार्मिक महत्व - News18 हिंदी


दर्शन का पुण्य और जीवन में शांति का मार्ग

मान्यता है कि, सोमनाथ के दर्शन करने से इंसान के पाप नष्ट होते हैं। सोमवार के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां का नजारा दिव्य होता है।

श्रद्धालु यहां आकर अपनी मन्नतें मांगते हैं और ध्यान करते हैं। यहां की शांति और ऊर्जा जीवन में नई राह दिखाती है। शिव की भक्ति में लीन होने का यह उत्तम स्थान है। जो यहाँ आता है, वह शिव का होकर ही लौटता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

FAQ

  1. सोमनाथ मंदिर को प्रथम ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?
    सोमनाथ मंदिर को पौराणिक ग्रंथों में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में सबसे पहले इसी ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई थी। ऋग्वेद और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन शास्त्रों में भी इसकी महिमा का सबसे पहले वर्णन मिलता है, इसलिए इसे 'आदि ज्योतिर्लिंग' भी कहा जाता है।
  2. सोमनाथ मंदिर की स्थापना और नाम के पीछे क्या रहस्य है?
    इस मंदिर का नाम 'सोम' यानी चंद्रमा और 'नाथ' यानी स्वामी से मिलकर बना है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रदेव को राजा दक्ष ने शाप दिया था जिससे वे क्षीण होने लगे थे। उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें शाप से मुक्ति का रास्ता दिखाया। चंद्रमा ने शिव को अपना 'नाथ' मानकर यहां स्थापित किया, जिससे इसका नाम सोमनाथ पड़ा।
  3. सोमनाथ मंदिर के इतिहास में पुनर्निर्माण का क्या महत्व है?
    सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और गौरवशाली पुनर्निर्माण की अद्भुत कहानी है। इसे महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों ने कई बार नष्ट किया और लूटा। लेकिन हर बार भक्तों और राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार कराया। वर्तमान मंदिर का निर्माण आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से हुआ है, जो भारत की अटूट श्रद्धा का प्रमाण है।
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