क्या चंद्र ग्रहण के कारण बदलेगा राखी का समय, नोट कर लें राखी बांधने का समय
Chandra Grahan 2026: साल 2026 में त्योहारों और खगोलीय घटनाओं का एक अनोखा संयोग देखने को मिल रहा है। इस बार अगस्त के महीने में एक बहुत बड़ा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इसी दिन देश में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा।
इस संयोग को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस ग्रहण के कारण राखी के त्योहार पर कोई रुकावट आएगी? आइए भारत में चंद्र ग्रहण का प्रभाव विस्तार से जानें...
अगस्त में लगेगा साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण
ज्योतिषियों के मुताबिक, यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होने वाला है। इस घटना के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए पूरी तरह से पृथ्वी की छाया के पीछे छिप जाएगा। इस वजह से चांद गहरे लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे वैज्ञानिक ब्लड मून कहते हैं।
धार्मिक दृष्टि से यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने जा रहा है। इस वजह से कुंभ राशि के जातकों के जीवन पर इसका सीधा और बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है। अन्य राशियों के लिए भी यह मिलाजुला रहेगा।
क्या भारत में दिखाई देगा पूर्ण चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिकों के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 को लगने वाला यह पूर्ण चंद्र ग्रहण से प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में दिखेगा। इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी इसे पूरा देखा जा सकेगा।
अब बात करें भारत की, तो यहां ये चंद्र ग्रहण पूरी तरह से अदृश्य यानी इनविजिबल रहने वाला है। ज्योतिषियों के मुताबिक, देश के अधिकांश हिस्सों में इसे नग्न आंखों से सीधे नहीं देखा जा सकेगा।
भारत के केवल कुछ ही गिने-चुने इलाकों में यह बहुत ही कम समय के लिए बेहद आंशिक रूप से शायद दिखाई दे। विजिबिलिटी न के बराबर होने के कारण इसका कोई धार्मिक असर यहां नहीं होगा।
भारत में सूतक काल मान्य होंगे या नहीं
धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है। सूतक काल के दौरान किसी भी तरह के शुभ काम या पूजा-पाठ करने की मनाही होती है। लेकिन शास्त्रों का एक नियम यह भी है कि सूतक काल वहीं मान्य होता है जहां ग्रहण दिखता है। चूंकि 28 अगस्त को लगने वाला यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल बिल्कुल भी मान्य नहीं होगा।
बिना किसी चिंता के बहनें भाई की कलाई पर बांधें राखी
इस साल रक्षाबंधन का पर्व भी 28 अगस्त 2026 को ही मनाया जाएगा। सूतक काल मान्य न होने के कारण त्योहार पर ग्रहण का कोई भी नकारात्मक साया नहीं पड़ेगा।
पंचांग के मुताबिक, बहनें हमेशा की तरह शुभ मुहूर्त देखकर अपने भाई को बेझिझक राखी बांध सकती हैं। ग्रहण के कारण पूजा या राखी बांधने के समय में कोई भी बदलाव करने की जरूरत नहीं है।
ग्रहण में इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
भले ही भारत में इसका सूतक काल नहीं लग रहा है, लेकिन खगोलीय बदलाव से ऊर्जा प्रभावित होती है। ऐसे समय में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की अवधि के दौरान घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।
इसके साथ ही ग्रहण खत्म होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना अच्छा माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को अपनी इच्छा के अनुसार दान-पुण्य करना भी बेहद शुभ और फलदायी होता है।
अब 2028 में दिखेगा ये नजारा
खगोलीय वैज्ञानिकों और नासा (NASA) के मुताबिक, अगर आप भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण देखना चाहते हैं तो थोड़ा इंतजार करना होगा। इसके बाद 31 दिसंबर 2028 की तारीख बेहद ऐतिहासिक होने वाली है।
साल 2028 के आखिरी दिन एक बेहद दुर्लभ और बड़ा पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। उस रात आसमान में ब्लू मून भी दिखाई देगा। इस अद्भुत नजारे को भारत के लोग अपनी नग्न आंखों से साफ-साफ देख सकेंगे।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- 28 अगस्त 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन के त्योहार पर क्या असर पड़ेगा?
28 अगस्त 2026 को लगने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन के त्योहार पर कोई भी नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। धार्मिक नियमों में चूंकि ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इसका कोई सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा। बहनें बिना किसी डर, संशय या रुकावट के हमेशा की तरह पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांध सकती हैं। - क्या 28 अगस्त को होने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में माना जाएगा?
नहीं, 28 अगस्त 2026 को होने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में बिल्कुल भी मान्य नहीं होगा। शास्त्रों का नियम है कि जो ग्रहण आंखों से दिखाई न दे, उसका सूतक काल प्रभावी नहीं होता है। ये ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका में दिखाई देगा। इसलिए भारत के लोग बिना किसी संशय के अपने सभी नियमित मांगलिक, धार्मिक और पूजा-पाठ के कार्य सामान्य रूप से कर सकते हैं। - खगोलीयवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जब पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की पूरी छाया के पीछे छिप जाता है, तब सूरज की कुछ किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर चांद पर गिरती हैं। इस वजह से चांद हल्के लाल या तांबे के रंग का चमकता हुआ दिखाई देता है, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 का यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने जा रहा है। विज्ञान के मुताबिक ब्लड मून क्या होता है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जब पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की पूरी छाया के पीछे छिप जाता है, तब सूरज की कुछ किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर चांद पर गिरती हैं। इस वजह से चांद हल्के लाल या तांबे के रंग का चमकता हुआ दिखाई देता है, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 का यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने जा रहा है।
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