कुछ ऐसी है धनतेरस की अनोखी परंपरा, कहीं यमराज के लिए दीया तो कहीं सेहत के लिए पूजा
Dhanteras, जिसे 'धन त्रयोदशी' भी कहते हैं, पूरे देश में खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। (जानें धनतेरस का महत्व ) पर इसमें एक खास बात है— उत्तर भारत और दक्षिण भारत की पूजा की रस्मों और मान्यताओं में कुछ अलग-अलग तरीके और अनोखे अंतर देखने को मिलते हैं।
यह त्योहार पांच दिवसीय दीपावली का पहला और सबसे शुभ दिन माना जाता है। यह पर्व धन और समृद्धि के लिए नए सामान खरीदने की शुरुआत का प्रतीक है।
दक्षिण भारत में दिवाली की मुख्य रौनक छोटी दिवाली पर होती है, (धनतेरस पूजा-विधि) इसलिए उनके लिए धनतेरस का दिन ज्यादातर उस बड़े त्योहार की तैयारी करने जैसा होता है।
उत्तर भारत में शाम को खास तौर पर माता लक्ष्मी, गणेश जी और धन के देवता कुबेर की पूजा होती है। लोग इन्हें धन और सुख-समृद्धि के लिए पूजते हैं।
दक्षिण भारत में माता लक्ष्मी की पूजा तो करते ही हैं, लेकिन इस दिन सेहत के देवता भगवान धन्वंतरि को पूजना ज्यादा जरूरी मानते हैं।
उत्तर भारत में अकाल मृत्यु से बचने के लिए, घर के बाहर, खासकर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का एक दीपक जलाया जाता है।
दक्षिण भारत में कुछ क्षेत्रों में यम दीपम होता है, लेकिन इसका उतना व्यापक या सार्वजनिक प्रचलन नहीं है जितना उत्तर भारत में होता है।
उत्तर भारत में सोने-चांदी के आभूषण, नए बर्तन, और साथ ही झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, जो लक्ष्मी के घर में प्रवेश का प्रतीक है।
दक्षिण भारत में सोने, चांदी और नए बर्तनों की खरीददारी होती है, पर झाड़ू खरीदने की परंपरा कम या न के बराबर है।