जानिए कैसे अमृतसर का गोल्डन टेम्पल गुरु नानक जयंती पर बन जाता है स्वर्ग का द्वार
गुरु नानक जयंती पर श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) हजारों दियों और रंग-बिरंगी लाइटों से ऐसा जगमगा उठता है (गुरु नानक जयंती की धूम) कि रात का नजारा देखने लायक होता है।
लाखों भक्त गुरुपर्व से पहले पवित्र जल (अमृत सरोवर) में स्नान करते हैं। यह एक गहरा विश्वास है कि इस पानी में डूबकी लगाने से मन को शांति मिलती है और सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।
Guru Nanak Jayanti से पहले, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का लगातार तीन दिन तक अखंड पाठ चलता है।
Amritsar Golden Temple में दुनिया का सबसे बड़ा किचन है, जो साल भर, दिन-रात चलता रहता है! गुरुपर्व पर तो यहां लाखों लोग एक साथ जमीन पर बैठकर लंगर खाते हैं।
अमृतसर का स्वर्ण मंदिर प्यार और भाईचारे की सबसे बड़ी निशानी है! जानते हैं, इसकी नींव एक मुस्लिम संत (हजरत मियां मीर) ने रखी थी।
इस मंदिर की खूबसूरती का सबसे बड़ा कारण सोना है जो इस पर चढ़ा है। मंदिर पर 500 किलोग्राम से भी ज्यादा सोना लगा है।
गुरुपर्व के दिन, पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब जी को एक सुंदर पालकी में सजाकर पूरे नगर में जुलूस निकाला जाता है। इस शानदार नजारे को देखकर हर भक्त को लगता है, मानो गुरु नानक देव जी खुद सब को आशीर्वाद देने के लिए नगर में आए हों।