इस साल कब से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, जानें इस यात्रा का महत्व

Kaushiki | Jul 10, 2026, 14:00 IST
विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा इस साल 16 जुलाई 2026 को धूमधाम से निकाली जाएगी। इस पावन उत्सव में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाते हैं। जानिए इस रथ यात्रा का महत्व और खास रीति-रिवाज।
1 8 कब निकलेगी भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra: भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में जगन्नाथ रथ यात्रा का नाम सबसे पहले आता है। ओड़िशा के पुरी शहर में इस त्योहार को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पल के गवाह बनने के लिए पुरी आते हैं। साल 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई को मनाई जाएगी।

2 8 मौसी के घर की यात्रा
Jagannath Rath Yatra

ये रथ यात्रा मुख्य मंदिर से शुरू होकर गुंडीचा मंदिर तक जाती है। गुंडीचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। तीनों भाई-बहन सुंदर और सजे-धजे विशाल रथों में सवार होकर वहां जाते हैं।

3 8 जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति
Jagannath Rath Yatra

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस पावन यात्रा में शामिल होना बहुत शुभ होता है। स्कंद पुराण के मुताबिक, जो व्यक्ति यात्रा में भगवान का कीर्तन करता है, उसका भाग्य चमकता है। वो इंसान जीवन और मृत्यु के सभी बंधनों से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है।

4 8 एकता और भाईचारे का अनूठा संदेश
Jagannath Rath Yatra

इस भव्य रथ यात्रा की शुरुआत 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच मानी जाती है। यह त्योहार समाज में एकता, आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को बहुत मजबूत करता है। इस पावन अवसर पर हर जाति और वर्ग के लोग एक साथ मिलकर रथ खींचते हैं।

5 8 सोने के झाड़ू से सफाई की रस्म
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, रथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले 'छेरा रस्म' नामक एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है। इस रस्म में ओड़िशा के राजा खुद सोने की झाड़ू से रथ की सफाई करते हैं। यह रस्म सिखाती है कि भगवान के सामने राजा और रंक सब बराबर हैं।

6 8 भगवान जगन्नाथ का विशाल नंदिघोष रथ
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इस पावन उत्सव के दौरान कुल तीन अलग-अलग विशाल रथों का निर्माण किया जाता है। भगवान जगन्नाथ के मुख्य रथ का नाम नंदिघोष है, जो लाल और पीले रंग का होता है। ये सबसे बड़ा रथ होता है, जिसमें कुल 16 लकड़ी के पहिए लगे होते हैं।

7 8 बलभद्र और सुभद्रा के विशेष रथ
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भगवान बलभद्र के रथ का नाम तालध्वज है, जो हरे और लाल रंग का होता है। इस रथ में कुल 14 पहिए लगाए जाते हैं। वहीं बहन सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन है, जिसमें 12 पहिए होते हैं।

8 8 नौ दिनों तक चलने वाला महापर्व
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भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का यह पावन उत्सव पूरे नौ दिनों तक लगातार चलता रहता है। भगवान अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर में कुछ दिनों तक आराम करते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के जरिए भगवान वापस अपने मुख्य मंदिर लौट आते हैं।डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।