सीएम मोहन यादव का यूपी को तोहफा, उज्जैन के बाद अब काशी विश्वनाथ में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी
यूपी के काशी की पावन नगरी ने एक नया इतिहास रचा है। काशी विश्वनाथ मंदिर में अब विक्रमादित्य वैदिक घड़ी लग चुकी है। मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव की पहल पर ये घड़ी लगाई गई है। सीएम मोहन यादव ने 3 अप्रैल को इसे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भेंट किया था। इसके बाद 4 अप्रैल 2026 को विधि-विधान से इसकी स्थापना की गई।
ये घड़ी पूरी तरह भारतीय काल गणना पर आधारित है। यह अनोखी घड़ी सीधे सूर्योदय के समय से चलती है। उज्जैन के बाद काशी में इसकी स्थापना सनातन ज्ञान परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ने की एक ऐतिहासिक शुरुआत है। मध्यप्रदेश के उज्जैन और मुख्यमंत्री निवास (भोपाल) के बाद ये देश की तीसरी घड़ी है।
कैसे काम करती है ये खास वैदिक घड़ी
ये घड़ी सामान्य घड़ियों से बिल्कुल अलग तरह से काम करती है। यह सीधे सूर्योदय के समय से ऑपरेट होती है। जिस शहर में घड़ी होगी, वहां के सूर्योदय से समय बदलेगा। इसमें दिन को 24 घंटे के बजाय 30 मुहूर्तों में बांटा गया है।
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का समय लिया जाता है। दिन के 15 मुहूर्त और रात के 15 मुहूर्त होते हैं। इसमें हर एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है। ये भारतीय पंचांग के हिसाब से समय की गणना करती है।
वैदिक घड़ी में मिलने वाली मुख्य जानकारियां
उज्जैन में वैदिक घड़ी सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि बहुत कुछ बताती है। इसमें भक्त विक्रम संवत और वर्तमान माह देख सकते हैं। घड़ी में तिथि, नक्षत्र और योग की जानकारी भी मिलेगी। भद्रा और ग्रहों के गोचर की स्थिति भी इसमें दिखेगी।
इसके साथ ही सूर्योदय और सूर्यास्त का सटीक समय मिलेगा। मंदिर आने वाले युवाओं को भारतीय काल गणना का ज्ञान होगा। इसके लिए एक खास मोबाइल ऐप भी बनाया गया है। ये ऐप 180 से अधिक भाषाओं में जानकारी प्रदान करता है।
भविष्य की योजना और हाथ की वैदिक घड़ी
उज्जैन और मुख्यमंत्री निवास के बाद यह तीसरी स्थापना है। अगली घड़ी अयोध्या के राम मंदिर में लगाई जाएगी। इसके बाद सभी ज्योतिर्लिंगों में इसे लगाने की योजना है। 100 से अधिक टेबल घड़ियां मंत्रियों को दी जा चुकी हैं।
अब वैज्ञानिक हाथ की वैदिक घड़ी बनाने पर काम कर रहे हैं। काशी के विद्वानों ने इसके निर्माण में मार्गदर्शन दिया है। इससे सनातन परंपरा और विज्ञान का प्रचार-प्रसार तेजी से होगा। यह घड़ी दुनिया को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ेगी।
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