नवग्रह क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं, जानें इसके पीछे के ज्योतिष और वैज्ञानिक कारण
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक नवग्रह क्या हैं
- ज्योतिष शास्त्र में नौ मुख्य आकाशीय पिंडों को नवग्रह का नाम दिया गया है।
- ये ग्रह लगातार ब्रह्मांड में घूमते हुए अपनी राशि बदलते रहते हैं।
- ग्रहों के इस राशि बदलने की पूरी प्रक्रिया को ही गोचर कहा जाता है।
- विज्ञान के अनुसार ग्रहों का गुरुत्वाकर्षण हमारे मस्तिष्क पर सीधा असर डालता है।
- हर ग्रह की अपनी एक अलग पौराणिक कथाएं और शांत करने के विशेष उपाय हैं।
What are Navgrah: भारतीय ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों को इंसान के जीवन का सबसे बड़ा आधार माना गया है। नवग्रह का सीधा मतलब नौ विशेष आकाशीय पिंडों (Celestial Bodies) से होता है। इनमें सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु शामिल किए गए हैं। ज्योतिष में इन्हें इंसानों के कर्मों का फल देने वाला माना गया है।
ये सभी ग्रह ब्रह्मांड में एक निश्चित गति से लगातार चक्कर लगाते रहते हैं। चक्कर लगाते हुए ये अलग-अलग राशियों में प्रवेश करते हैं। जब भी कोई ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में जाता है, तो उसे गोचर कहते हैं। इस गोचर का हर इंसान के जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ता है।
ग्रहों के गोचर करने का वैज्ञानिक कारण
अब सवाल उठता है कि ये ग्रह आखिर काम कैसे करते हैं। क्या वाकई आसमान में बैठे ग्रह हमारी किस्मत लिख रहे हैं? ज्योतिष के मुताबिक, हर ग्रह की अपनी एक विशेष ऊर्जा और तरंग होती है।
ये ऊर्जा ब्रह्मांड में चारों तरफ लगातार फैलती रहती है। वहीं, विज्ञान भी मानता है कि अंतरिक्ष में मौजूद हर पिंड की अपनी ग्रेविटी होती है। सूर्य और चंद्रमा जैसे पिंड पृथ्वी पर सीधा भौतिक असर डालते हैं।
जैसे चंद्रमा के कारण समुद्र में हाई-टाइड आता है, वैसे ही इसका असर इंसानी शरीर पर भी होता है। हमारे शरीर में 70% पानी मौजूद होता है। ग्रहों की मैग्नेटिक वेव्स हमारे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को बहुत प्रभावित करती हैं।
इसी वजह से हमारे विचार, फैसले और हमारी किस्मत बदलती है। जब कोई ग्रह गोचर करता है, तो उसकी एंगल ऑफ रेज पृथ्वी के लिए बदल जाता है। इसी बदलाव के कारण हमें अच्छे या बुरे फल मिलते हैं।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में कौन-कौन से नवग्रह हैं
सूर्य देव (The Sun) - आत्मा और मान-सम्मान के कारक
पौराणिक कथा:
पौराणिक कथा के मुताबिक, सूर्य देव कश्यप ऋषि और माता अदिति के पुत्र हैं। वे ब्रह्मांड के साक्षात दिखने वाले एकमात्र देवता हैं। वे सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर पूरे संसार को रोशनी देते हैं। उन्हें सभी ग्रहों का राजा माना जाता है।काम और उपाय:
सूर्य हमारी आत्मा, पिता और सरकारी नौकरी के कारक हैं। इन्हें मजबूत करने के लिए रोज सुबह तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं।
चंद्र देव (The Moon) - मन और भावनाओं के स्वामी
पौराणिक कथा:
पौराणिक कथा के मुताबिक, चंद्र देव महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र माने जाते हैं। उन्होंने दक्ष प्रजापति की सत्ताइस बेटियों से विवाह किया था, जो सत्ताइस नक्षत्र हैं। वे स्वभाव से बहुत शांत और सुंदर हैं। वे संसार में शीतलता फैलाते हैं।काम और उपाय:
चंद्रमा हमारे मन, माता और मानसिक शांति को संभालते हैं। चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं।
मंगल देव (Mars) - ऊर्जा और साहस के देवता
पौराणिक कथा:
शिव महापुराण के मुताबिक, जब भगवान शिव का पसीना पृथ्वी पर गिरा, तब मंगल का जन्म हुआ। इसलिए इन्हें भूमिपुत्र भी कहा जाता है। इनका रंग बिल्कुल लाल है और ये चार भुजाओं वाले पराक्रमी देवता हैं।काम और उपाय:
मंगल हमारे साहस, शारीरिक शक्ति और भाई के कारक हैं। मंगल के बुरे असर से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें।
बुध देव (Mercury) - बुद्धि और व्यापार के दाता
पौराणिक कथा:
पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, बुध देव चंद्र देव और तारा के पुत्र हैं। बुद्धि के देवता होने के कारण इनका नाम बुध पड़ा। वे सिंह पर सवार होते हैं और उनके हाथों में तलवार और गदा होती है।काम और उपाय:
बुध हमारी बुद्धि, व्यापार, वाणी और शिक्षा को नियंत्रित करते हैं। बुध को शुभ बनाने के लिए गाय को हरी घास खिलाएं।
गुरु बृहस्पति (Jupiter) - ज्ञान और भाग्य के देवता
पौराणिक कथा:
देवगुरु बृहस्पति ऋषि अंगिरा के पुत्र हैं। उन्होंने भगवान शिव की बहुत कठिन तपस्या की थी। शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें देवताओं का गुरु और सबसे बड़ा ग्रह बना दिया। वे पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं।काम और उपाय:
गुरु हमारे भाग्य, विवाह, धन और अध्यात्म के मुख्य कारक हैं। गुरु की कृपा के लिए गुरुवार को माथे पर केसर का तिलक लगाएं।
शुक्र देव (Venus) - सुख और ऐश्वर्य के प्रदाता
पौराणिक कथा:
शुक्र देव महर्षि भृगु के पुत्र हैं और वे दैत्यों के पूजनीय गुरु हैं। उन्होंने भगवान शिव से मृतसंजीवनी विद्या सीखी थी। वे बहुत ज्ञानी हैं और श्वेत यानी सफेद रंग के रथ पर चलते हैं।काम और उपाय:
शुक्र जीवन में सुख-सुविधा, प्रेम, कला और वैवाहिक जीवन को दर्शाते हैं। शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को सफेद चीजों का दान करें।
शनि देव (Saturn) - न्याय और कर्म के देवता
पौराणिक कथा:
शनि देव सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं। सूर्य देव ने उनके काले रंग के कारण उन्हें अपना पुत्र मानने से मना कर दिया था। तब शनि ने शिव जी की तपस्या कर न्याय अधिकारी का पद पाया।काम और उपाय:
शनि हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं और वे न्याय के देवता हैं। शनि देव को शांत रखने के लिए शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
राहु ग्रह (Rahu) - भ्रम और अचानक बदलाव के कारक
पौराणिक कथा:
समुद्र मंथन (नवग्रह पूजा) के समय स्वर्भानु नाम के एक दैत्य ने छल से अमृत पी लिया था। सूर्य और चंद्रमा ने यह बात विष्णु जी को बता दी। विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया। उसका सिर राहु कहलाया।काम और उपाय:
राहु इंसान के जीवन में भ्रम, राजनीति और अचानक बड़ी घटनाएं लाता है। राहु के दोष को दूर करने के लिए पंछियों को सात तरह का अनाज खिलाएं।
केतु ग्रह (Ketu) - मोक्ष और अध्यात्म के स्वामी
पौराणिक कथा:
सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु दैत्य का शरीर जब दो भागों में कटा, तो उसका धड़ केतु बन गया। चूंकि इसके पास सिर नहीं है, इसलिए यह केवल दिल से सोचता है। इसे मोक्ष का कारण माना जाता है।-
काम और उपाय:
- केतु इंसान को अध्यात्म, रहस्यमयी विद्याओं और मोक्ष की तरफ ले जाता है। केतु को शांत करने के लिए शनिवार को काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।
साइंस और एस्ट्रोलॉजी के नजर से समझें
ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि ब्रह्मांड की एनर्जी हमारे जीवन को प्रभावित करती है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि हमारे कर्म ही सबसे बड़े ग्रह हैं। अगर आपके कर्म अच्छे हैं, तो किसी भी ग्रह का बुरा असर आप पर नहीं पड़ेगा।
अब इसे थोड़ा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझते हैं। दरअसल, अंतरिक्ष में मौजूद हर ग्रह का अपना एक गुरुत्वाकर्षण और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड होता है। इनसे निकलने वाली कॉस्मिक किरणें हमारे मूड, थॉट्स और शरीर के हार्मोन्स को प्रभावित करती हैं।
जब हम योग और ध्यान करते हैं, तो हमारे ब्रेन के न्यूरॉन्स एक्टिव हो जाते हैं। इससे ग्रहों से आने वाली निगेटिव तरंगें बेअसर हो जाती हैं और हमारा मानसिक संतुलन बेहतर होता है।
ठीक इसी तरह, प्रकृति के करीब रहने और पौधों की देखभाल करने से हमारे शरीर का औरा मजबूत होता है। इससे बुध और शुक्र जैसे ग्रह बैलेंस होते हैं।
जब हम मंत्रों का जाप करते हैं, तो साउंड वाइब्रेशन से हमारे शरीर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है। ये पॉजिटिविटी ग्रहों के बुरे साइड-इफेक्ट्स से हमारी पूरी रक्षा करती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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