आज लगने वाला है सूर्य ग्रहण, 64 साल बाद फाल्गुन अमावस्या पर बन रहा महासंयोग

Kaushiki | Feb 15, 2026, 12:59 IST
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आज 17 फरवरी 2026 को साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा। फाल्गुन अमावस्या पर 64 साल बाद बन रहे दुर्लभ संयोग में पितृ पूजा और दान का विशेष महत्व है।

Phalguna Amavasya 2026: आज (17 फरवरी) का दिन खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से एक अत्यंत दुर्लभ महायोग लेकर आ रहा है। इस दिन साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इसे दुनिया रिंग ऑफ फायर के रूप में देखेगी।



खास बात ये है कि इसी दिन हिंदू वर्ष की अंतिम फाल्गुन अमावस्या भी है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, 64 साल बाद ग्रहों का ऐसा चमत्कारी समीकरण बन रहा है। 4 घंटे 32 मिनट लंबा यह ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लगेगा।



ये साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद खास माना जा रहा है। भौमवती अमावस्या और सूर्य ग्रहण का ये मिलन पितृ दोष शांति, दान-पुण्य और स्नान के लिए एक स्वर्ण अवसर है। पिछली बार ग्रहों की ऐसी स्थिति वर्ष 1962 में देखी गई थी।



पहला सूर्य ग्रहण का समय

64 साल बाद ग्रहों का दुर्लभ संयोग

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सूर्य और राहु इस समय कुंभ राशि में होंगे। साथ ही चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में विचरण करेंगे जो एक शुभ स्थिति है। ये संयोग साधना, लेखन, अध्यात्म और कला के क्षेत्र में सफलता दिलाता है।



मंगलवार को अमावस्या होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए ये दिन सर्वोत्तम माना गया है। अंतिम अमावस्या होने से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।



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फाल्गुन अमावस्या का महत्व

फाल्गुन महीना काफाल्गुन अमावस्या हिंदू कैलेंडर के मुताबिक साल की अंतिम अमावस्या तिथि होती है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से घर में खुशहाली आती है।



17 फरवरी को स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:35 से 6:25 तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:37 से 1:23 बजे तक रहने वाला है। इस दिन गंगा स्नान और अन्न दान करने का बड़ा फल मिलता है। अमावस्या मंगलवार को होने से मंगल दोष शांति भी की जा सकती है।



पितृ दोष शांति के उपाय

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है तो इस दिन उपाय अवश्य करें।



  • पीपल के पेड़ की जड़ में सुबह जल और दूध अर्पित करें।
  • शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
  • इस दिन कालसर्प दोष की पूजा करना भी बहुत कल्याणकारी माना गया है।
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों को काले तिल और कंबल दान करें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQ

  1. क्या 17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
    नहीं, यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत के भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण से भारत में इसका धार्मिक सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा।
  2. 64 साल बाद इस ग्रहण पर कौन सा दुर्लभ योग बन रहा है?
    इस ग्रहण पर सूर्य और राहु कुंभ राशि में होंगे और चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में। ग्रहों की यह स्थिति आखिरी बार वर्ष 1962 में बनी थी।
  3. फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष के लिए क्या दान करना चाहिए?
    इस दिन पितृ शांति के लिए सफेद वस्तुओं जैसे दूध या दही का दान करें। साथ ही पीपल के पेड़ की पूजा और तर्पण करना फलदायी होता है।

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