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Mahashivratri 2026: 2026 की महाशिवरात्रि आपके लिए बहुत ही सौभाग्यशाली और खास होने वाली है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, 300 साल बाद ग्रहों का ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है जो जीवन बदल सकता है।
इस पावन पर्व पर आकाश मंडल में ग्रहों की स्थिति बहुत ही शुभ रहने वाली है। फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को भक्त महादेव और मां पार्वती का विवाह उत्सव मनाएंगे।
इस बार शिवरात्रि पर 5 राजयोगों के साथ 10 विशेष शुभ योग भी बन रहे हैं। ज्योतिषियों के मुताबिक, ये समय साधना और संकल्प सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जा रहा है। आइए इस दिव्य पर्व के मुहूर्त और महत्व को जानें।
कब है महाशिवरात्र 2026
हिंदू पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी 2026 को शाम से शुरू होगी। यह तिथि 15 फरवरी शाम 05:04 से 16 फरवरी शाम 05:34 तक रहेगी।
शिवरात्रि की मुख्य पूजा रात में होती है। इसलिए व्रत 15 फरवरी को होगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र का प्रभाव पूजा के फल को कई गुना ज्यादा बढ़ा देगा।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी पावन दिन भगवान शिव का दिव्य प्राकट्य हुआ था और माता पार्वती के साथ उनका शुभ विवाह संपन्न हुआ था। 2026 की ये शिवरात्रि ज्योतिषीय नजरिए से बहुत खास माना जा रहा है।
चार शक्तिशाली राजयोगों का निर्माण
इस बार कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का अद्भुत मिलन होगा। इससे बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण और शुक्रादित्य जैसे महत्वपूर्ण राजयोग एक साथ सक्रिय रहने वाले हैं।
शनि देव अपनी प्रिय राशि कुंभ में रहकर 'शश' नामक महापुरुष राजयोग बनाएंगे। ग्रहों की यह स्थिति व्यापार, स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति के लिए बहुत मंगलकारी मानी गई है।
महाशिवरात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, शुभ योगों (महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त) में की गई पूजा का अक्षय फल मिलता है। महाशिवरात्रि के दिन शिव योग सुबह से ही शुरू होकर पूरे दिन बना रहेगा।
प्रथम प्रहर: 15 फरवरी शाम 06:11 बजे से रात 09:23 बजे तक करें।
द्वितीय प्रहर: 15 फरवरी रात 09:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:35 बजे तक।
तृतीय प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 03:47 बजे तक पूजन करें।
चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी सुबह 03:47 बजे से सुबह 06:59 बजे तक का समय।
निशिथ काल (महामुहूर्त): रात 12:09 बजे से देर रात 01:00 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक।
- जो भक्त महाशिवरात्रि (महाशिवरात्रि का त्योहार) का उपवास रख रहे हैं। वे अगले दिन 16 फरवरी को सुबह 06:59 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक अपना व्रत खोल (पारण कर) सकते हैं।
महाशिवरात्रि पूजन विधि
संकल्प और शुद्धि: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें। भगवान शिव से अपनी मनोकामना कहें।
पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल चढ़ाएं, उसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें। अंत में शुद्ध जल या गन्ने के रस से स्नान कराएं।
विशेष सामग्री अर्पण: महादेव को उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे—बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन और भस्म अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिव पूजा में तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल वर्जित हैं।
मंत्र जप और आरती: पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जप करें। शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर जलाकर भोलेनाथ की प्रेमपूर्वक आरती करें।
निशिथ काल और प्रहर पूजा: संभव हो तो रात के निशिथ काल में विशेष पूजा करें। चारों प्रहर की पूजा में अलग-अलग दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करने का विधान है, जो अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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