पितृपक्ष 2026: पितरों की शांति के लिए दोपहर में श्राद्ध करना क्यों श्रेष्ठ है? जानें तर्पण और पिंडदान की विधि
Kaushiki | Sept 29, 2026, 12:46 IST
दोपहर को ही क्यों करते हैं श्राद्ध
Pitra Paksha 2026: अभी पितृ पक्ष 2026 चल रहा है। इस समय लोग पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं। हिंदू धर्म में मान्यता है कि दोपहर में श्राद्ध करना श्रेष्ठ होता माना जाता है। शास्त्रों में यह समय पितरों को समर्पित है। श्राद्ध की विधि में दक्षिण दिशा की पूजा होती है। अगर तिथि पता न हो तो अमावस्या श्राद्ध किया जाता है।
इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। यह समय हमारे पूर्वजों को याद करने का खास अवसर होता है। इन दिनों हम अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं। उनके नाम से तर्पण और पिंडदान का विधान निभाया जाता है।
मान्यता है कि पूर्वज की मृत्यु तिथि पर ही श्राद्ध करना चाहिए। अगर तिथि याद न हो तो अमावस्या के दिन तर्पण कर सकते हैं। अक्सर लोग दोपहर के समय ही श्राद्ध का कर्म निभाते हैं। तो ऐसे में क्या आप जानते हैं कि श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय ही क्यों चुना गया है?
दोपहर में श्राद्ध क्यों श्रेष्ठ
शास्त्रों के मुताबिक, पितृ लोक चंद्रमा के ऊपरी भाग में स्थित होता है। यह लोक मृत्यु लोक और देव लोक के बीच में माना जाता है। दोपहर के समय पितर पृथ्वी के सबसे करीब महसूस करते हैं। इसलिए इसी समय उन्हें जल और भोजन अर्पित किया जाता है।
सूर्य देव से जुड़ा खास नियम
इसीलिए उन्हें इसी पहर में भोजन अर्पित किया जाता है। लोक बीच में है और श्राद्ध का समय भी दिन के बीच का। श्राद्ध भोज दोपहर में कराने की एक और लोक मान्यता है। सूर्य देव पूर्व दिशा से उदित होते हैं।
दोपहर तक वे आकाश के मध्य में पहुंच जाते हैं। कहते हैं, पितृ सूर्य की किरणों से श्राद्ध का भोजन ग्रहण करते हैं। इसी वजह से दोपहर का समय सबसे उत्तम माना गया है।
श्राद्ध की विधि
- श्राद्ध वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। घर को पूरी तरह साफ और शुद्ध कर लें।
- पूजा के समय मन को शांत और पवित्र रखें।
- घर की दक्षिण दिशा में पितरों (पितरों को जल अर्पित करना) के लिए पूजा स्थल बनाएं।
- दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है।
- वहां एक साफ कपड़ा बिछाकर पितरों का ध्यान करें।
- इसके बाद जल में काले तिल और कुशा मिलाएं।
- इस तिल वाले जल से पितरों का तर्पण करें।
- तर्पण करते समय मन ही मन पितरों की शांति की प्रार्थना करें।
- इसके बाद चावल और तिल से पिंडदान (पिंड यानी अन्न का गोला अर्पित करना) तैयार करें।
पंचबलि में किसके लिए निकालें भोजन
श्राद्ध पूरा होने के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र और दक्षिणा दें। उनका आशीर्वाद लें। अंत में पितरों से हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। शाम को दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
पितृपक्ष 2026 में क्या याद रखें
जिन्हें तिथि पता है, वे उसी तिथि पर श्राद्ध करें। पितृपक्ष में तीन बातों को याद रखें। पहली, श्राद्ध का समय दोपहर है। दूसरी, तिथि निधन की तिथि या अमावस्या है। तीसरी, विधि में पूजा, तर्पण, पिंडदान और पंचबलि आते हैं।
पितरों की शांति की प्रार्थना कुश के आसन पर बैठकर होती है। शाम को दीपक जलाकर विधि पूरी होती है। यह जानकारी शास्त्रीय और लोक मान्यताओं पर आधारित है। किसी विधि पर संशय हो तो घर के पुरोहित से पूछें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
- पितृ पक्ष 2026 कब शुरू और समाप्त होगा?
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर 2026 से होगी और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। - श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय क्यों चुना जाता है?
दोपहर का समय श्राद्ध कर्म के लिए इसलिए चुना जाता है क्योंकि इस समय पितर पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और उन्हें जल और भोजन अर्पित करने का विशेष महत्व होता है। - यदि पूर्वज की मृत्यु तिथि याद नहीं हो तो श्राद्ध कब किया जा सकता है?
अगर पूर्वज की मृत्यु तिथि याद नहीं है, तो श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जा सकता है। यह अमावस्या उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है जिन्हें तिथि पता नहीं होती।
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