रावण दहन: दिल्ली, हरियाणा से लेकर MP के मंदसौर तक, भारत में दशहरे की ये कैसी अनोखी परंपराएं
भारत में हर राज्य और क्षेत्र अपने त्योहारों को अलग-अलग तरीके से मनाता है। यही कारण है कि Vijayadashami या Dussehra पर्व भी देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग परंपराओं और स्वरूपों में दिखाई देता है। (आज रावण दहन) यह हमारी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या, वाराणसी, मेरठ और कानपुर जैसे शहरों में रामलीला और ravan dahan बड़े पैमाने पर होता है। अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि होने के कारण इस पर्व का यहाँ विशेष महत्व है।
हरियाणा अपने विशाल रावण दहन के लिए जाना जाता है। यहाँ के बरारा (Barara) जैसे स्थानों पर 200 फीट से भी ऊँचे रावण के पुतले बनाए जाने का रिकॉर्ड है, जो इस परंपरा की भव्यता को दर्शाता है।
राजस्थान में दशहरा विशाल मेलों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ रावण दहन मुख्य आकर्षण होता है। खासकर कोटा और जयपुर (विद्याधरनगर स्टेडियम) के मेले में शामिल होने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
पंजाब में भी दशहरा बड़े उत्साह से मनाया जाता है, जहाँ रावण दहन मुख्य परंपरा है। लुधियाना और चंडीगढ़ में 100 फीट से भी ऊँचे रावण के पुतले जलाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश के भोपाल और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में भी भव्य रावण दहन के कार्यक्रम होते हैं। हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि मंदसौर जैसे कुछ क्षेत्रों में रावण को जलाया नहीं जाता, बल्कि उसकी पूजा करने की परंपरा है।
उत्तराखंड में भी दशहरे पर रावण दहन की भव्य परंपरा है। देहरादून और हरिद्वार जैसे शहरों में इस अवसर पर बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं।