इन दुर्लभ संयोग के साथ खत्म होगा सावन का अंतिम सोमवार, ऐसे करें शिव पूजा
Kaushiki | Aug 19, 2026, 15:29 IST
Sawan Somwar
सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को है। इस दिन 5 दुर्लभ शुभ संयोग बन रहे हैं। भगवान शिव कैलाश पर विराजमान रहेंगे, जिससे रुद्राभिषेक का बेहतरीन मौका मिलेगा। इस दिन पूजा और जलाभिषेक से मनोकामनाएं पूरी होंगी।
Sawan Somwar Vrat 2026: सावन मास का पावन महीना अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है और शिव भक्तों का उत्साह सातवें आसमान पर है। 24 अगस्त 2026 को पड़ने वाला सावन का चौथा और आखिरी सोमवार बेहद खास और दिव्य होने वाला है।
इस दिन पांच अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग एक साथ निर्मित हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन भगवान भोलेनाथ स्वयं कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। शास्त्रों में माना गया है कि जब शिवजी का वास कैलाश पर होता है, तब रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से जातक के सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
तो ऐसे में यदि आप पूरे सावन में जल नहीं चढ़ा पाए हैं या व्रत नहीं रख पाए हैं, तो यह अंतिम सोमवार आपके लिए महादेव की अपार कृपा पाने का सबसे उत्तम अवसर है। आइए जानें पूजा के शुभ मुहूर्त।
अंतिम सावन सोमवार पर सावन पुत्रदा एकादशी का पारण रहेगा। इसी दिन कई लोग पुत्रदा एकादशी का व्रत भी रखेंगे। गृहस्थ लोग दोपहर के बाद व्रत का पारण करेंगे। वैष्णव संप्रदाय के लोग इस दिन व्रत का पालन करेंगे। इस दिन भगवान शिव और विष्णु की संयुक्त कृपा मिलेगी। इस दिन हरि और हर की पूजा से फायदा होगा।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सावन का चौथा सोमवार पर प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। यह योग सुबह से लेकर 07:04 बजे तक रहेगा। यह एक बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। इस योग के स्वामी ग्रह बुध देव माने जाते हैं। इसके अधिपति देवता स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु हैं। इस समय में किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सुबह 07:04 बजे के बाद आयुष्मान योग शुरू हो जाएगा। यह योग पूरे दिन और रात तक बना रहेगा। इस योग के स्वामी ग्रह चंद्रमा माने जाते हैं। इसके अधिपति देव देवगुरु बृहस्पति को माना गया है। इस योग में पूजा करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है। सेहत में सुधार आता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
इस समय देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में हैं। गुरु के इस गोचर से हंसराज योग बन रहा है। यह योग व्यक्ति को करियर में बड़ी तरक्की दिलाता है। इस दिन चंद्रमा धनु और सूर्य सिंह राशि में रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति आपके लिए बहुत शुभ रहेगी।
धर्म शास्त्रों और शिव पुराण में भगवान शिव के निवास स्थान का सूक्ष्म और गहरा विचार किया गया है। माना जाता है कि तिथि और नक्षत्रों के मुताबिक, महादेव ब्रह्मांड में अलग-अलग स्थानों पर वास करते हैं।
शिव कभी नंदी पर सवार होते हैं, कभी श्मशान में, कभी सभा में, तो कभी कैलाश पर्वत पर। इनमें से भगवान शिव का कैलाश पर्वत पर वास करना सनातन परंपरा में सबसे ज्यादा शुभ, पवित्र और कल्याणकारी माना गया है।
पंचांगीय गणना के मुताबिक, भगवान शिव का वास कैलाश (शिव और सावन) पर होता है, तब रुद्राभिषेक करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि जब महादेव कैलाश पर विराजते हैं, तो वे अत्यंत प्रसन्न, शांत और भक्त-वत्सल मुद्रा में होते हैं। इस दौरान शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत) या गंगाजल और जड़ी-बूटियों के रस से किया गया रुद्राभिषेक सीधे महादेव तक पहुंचता है।
सावन के अंतिम सोमवार पर सुबह से जलाभिषेक कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:27 से 05:11 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 से 12:49 बजे तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 05:55 से 07:32 बजे तक है। शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 09:09 से 10:46 बजे तक रहेगा।
सोमवार के दिन कभी भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। व्रत के दिन बेलपत्र तोड़ना शास्त्र में वर्जित है। पूजा के लिए एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़ लें। या घर के किसी अन्य सदस्य से बेलपत्र मंगवा लें। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल आपको मिलेगा।
जिन लोगों के विवाह में देरी या बाधा आ रही है। उन्हें सावन सोमवार के दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। सुबह और शाम शिवजी का जल से अभिषेक करें। शिवलिंग पर 21 साबुत बेलपत्र श्रद्धा से चढ़ाएं। इसके साथ ही पांच तरह के फलों का दान करें।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सावन सोमवार का व्रत करने से मन हमेशा पवित्र रहता है। अविवाहित लोगों को मनचाहा और सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है। शादीशुदा लोगों का पारिवारिक जीवन बहुत मजबूत बनता है। नौकरी और करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। शिव पुराण में सावन सोमवार का बड़ा महत्व बताया गया है। जो लोग साल भर सोमवार व्रत नहीं रख पाते हैं। वे केवल सावन के सभी सोमवार का व्रत कर सकते हैं। इससे पूरे साल के सोमवार व्रत का फल मिल जाता है। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। सावन का खास योग
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इस दिन पांच अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग एक साथ निर्मित हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन भगवान भोलेनाथ स्वयं कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। शास्त्रों में माना गया है कि जब शिवजी का वास कैलाश पर होता है, तब रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से जातक के सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
तो ऐसे में यदि आप पूरे सावन में जल नहीं चढ़ा पाए हैं या व्रत नहीं रख पाए हैं, तो यह अंतिम सोमवार आपके लिए महादेव की अपार कृपा पाने का सबसे उत्तम अवसर है। आइए जानें पूजा के शुभ मुहूर्त।
सावन सोमवार के शुभ संयोग
प्रीति योग में करें मांगलिक कार्य
आयुष्मान योग से मिलेगा अच्छा स्वास्थ्य
हंसराज योग से चमकेगा आपका करियर
रुद्राभिषेक का धार्मिक महत्व
शिव कभी नंदी पर सवार होते हैं, कभी श्मशान में, कभी सभा में, तो कभी कैलाश पर्वत पर। इनमें से भगवान शिव का कैलाश पर्वत पर वास करना सनातन परंपरा में सबसे ज्यादा शुभ, पवित्र और कल्याणकारी माना गया है।
पंचांगीय गणना के मुताबिक, भगवान शिव का वास कैलाश (शिव और सावन) पर होता है, तब रुद्राभिषेक करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि जब महादेव कैलाश पर विराजते हैं, तो वे अत्यंत प्रसन्न, शांत और भक्त-वत्सल मुद्रा में होते हैं। इस दौरान शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत) या गंगाजल और जड़ी-बूटियों के रस से किया गया रुद्राभिषेक सीधे महादेव तक पहुंचता है।
जलाभिषेक के लिए सही मुहूर्त
बेलपत्र तोड़ते समय रखें ये सावधानी
जिन लोगों के विवाह में देरी या बाधा आ रही है। उन्हें सावन सोमवार के दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। सुबह और शाम शिवजी का जल से अभिषेक करें। शिवलिंग पर 21 साबुत बेलपत्र श्रद्धा से चढ़ाएं। इसके साथ ही पांच तरह के फलों का दान करें।
सावन सोमवार व्रत के फायदे
आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। शिव पुराण में सावन सोमवार का बड़ा महत्व बताया गया है। जो लोग साल भर सोमवार व्रत नहीं रख पाते हैं। वे केवल सावन के सभी सोमवार का व्रत कर सकते हैं। इससे पूरे साल के सोमवार व्रत का फल मिल जाता है। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। सावन का खास योग
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