सावन 2025: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों और शिव पुराण का इसका आध्यात्मिक महत्व
धर्म ज्योतिष न्यूज: 12 ज्योतिर्लिंगों (12 Jyotirlinga) में भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मौजूद है, जिनकी पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव पुराण के अध्ययन से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मिलता है
ऐसा माना जाता है कि, यह सबसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग है, जिसकी स्थापना चंद्रदेव ने की थी। इसे धरती का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। (12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन)
कृष्णा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर दक्षिण का कैलाश कहलाता है और ऐसा माना जाता है कि अश्वमेघ यज्ञ के बराबर पुण्य प्रदान करता है।
उज्जैन स्थित यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जहां प्रसिद्ध भस्म आरती होती है, जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के तट पर स्थित है और इसका आकार 'ॐ' की आकृति बनाता है, जिससे इसकी दिव्यता और बढ़ जाती है।
हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित यह ज्योतिर्लिंग कठिन यात्रा के बाद प्राप्त होता है और तीर्थयात्रियों के लिए आध्यात्मिक शांति का केंद्र है।
ऐसा माना जाता है कि, सह्याद्रि पर्वत पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव भी कहते हैं और यह शिवभक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।
वाराणसी स्थित यह ज्योतिर्लिंग ब्रह्मांड के शासक शिव का निवास माना जाता है और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है।
ऐसा माना जाता है कि, यह गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित है और इसे दक्षिण भारत में गंगा के समान पवित्र माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि, इसे चिताभूमि कहा जाता है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का हृदय गिरा था, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है।