CBSE री-इवैल्युएशन की लास्ट डेट आज, पोर्टल पर 100 की जगह 8 हजार दिख रही फीस

Anjali Dwivedi | May 21, 2026, 16:06 IST
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सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट आने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों की ब्लर स्कैन कॉपियां वायरल हो रही हैं। छात्र कम नंबर मिलने के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग को जिम्मेदार मान रहे हैं। बोर्ड ने परेशानी को देखते हुए आवेदन की तारीख को बढ़ाकर 24 मई कर दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सीबीएसई 12वीं क्लास का रिजल्ट जारी होने के बाद नया विवाद शुरू हुआ।
  • कम नंबर आने पर छात्रों ने बोर्ड से अपनी स्कैन कॉपियां मांगी थीं।
  • सोशल मीडिया पर वायरल हो रही स्कैन कॉपियां बहुत ज्यादा धुंधली हैं।
  • धुंधली कॉपियों को देखकर लोग ऑन स्क्रीन मार्किंग पर सवाल उठा रहे हैं।
  • तकनीकी खराबी के कारण बोर्ड ने आवेदन की अंतिम तारीख 24 मई की।

सीबीएसई बोर्ड का रिजल्ट आते ही खुशियों के साथ-साथ एक नया विवाद भी शुरू हो गया है। देश भर के कई छात्र अपने नंबरों को देखकर काफी हैरान और परेशान हैं। छात्रों का दावा है कि परीक्षा में उनके नंबर उम्मीद से बहुत कम आए हैं।



छात्र इस गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग (OMS) को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि कॉपियों को डिजिटल तरीके से जांचने में लापरवाही बरती गई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ छात्रों की स्कैन कॉपियां तेजी से वायरल होने लगी हैं।



सोशल मीडिया पर क्यों उठे गंभीर सवाल?

सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वे कॉपियां बहुत धुंधली हैं। कॉपियां इतनी ब्लर हैं कि उन पर लिखे शब्दों को पढ़ना बहुत मुश्किल है। छात्र खुद अपनी लिखावट को कॉपियों में पहचान नहीं पा रहे हैं।



इंटरनेट पर लोग अब CBSE Board की इस बड़ी लापरवाही पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इतनी धुंधली कॉपियों को टीचर्स ने कैसे चेक किया होगा? जब अक्षर दिख ही नहीं रहे थे, तो नंबर किस आधार पर दिए गए?



इस तकनीकी चूक का सबसे बुरा असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। छात्रों को लगता है कि उनके भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। अब छात्र दोबारा कॉपी चेक करवाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।





वेबसाइट क्रैश होने से बढ़ी बच्चों की परेशानी

CBSE ने जब अपनी साइट पर कॉपियों को डाउनलोड करने का लिंक एक्टिव किया था। तब भारी ट्रैफिक की वजह से बोर्ड की पूरी आधिकारिक वेबसाइट अचानक क्रैश कर गई। हजारों छात्र अपनी आंसरशीट डाउनलोड करने के लिए रात भर परेशान होते रहे।



बोर्ड ने इस बड़ी समस्या को एक सामान्य तकनीकी खराबी या ग्लिच बताया है। छात्रों की परेशानी को देखते हुए बोर्ड ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। स्कैन कॉपी डाउनलोड करने की आखिरी तारीख को एक दिन और बढ़ा दिया गया है।



अब छात्र अपनी कॉपियों को 24 मई तक आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। बहुत ज्यादा मशक्कत करने के बाद ही छात्रों को अपनी कॉपियां मिल पा रही हैं। इसके बाद ही छात्र री-चेकिंग की प्रक्रिया के लिए आगे आवेदन कर पाएंगे।



कई स्टूडेंट्स के मुताबिक, वेबसाइट पर पेमेंट 100 रुपए की बजाय 8 हजार दिख रहा है।





26 से 29 मई तक होगा री-इवैल्यूशन

सीबीएसई ने बताया कि 26 से 29 मई के बीच स्टूडेंट्स री-इवैल्यूशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने फीस भी कम की है। अब फोटो कॉपी देखने के लिए 700 रुपए की जगह सिर्फ 100 रुपए देने होंगे। वहीं, कॉपियों का वेरिफिकेशन या ऑथेंटिकेशन कराने पर 500 रुपए की जगह 100 रुपए देने होंगे।



बोर्ड ने हाथ से जांची 13 हजार कॉपियां

इस पूरे मामले पर सीबीएसई की तरफ से एक जरूरी जानकारी भी सामने आई है। बोर्ड ने बताया कि इस साल लगभग 90 लाख कॉपियों का इवैल्यूएशन किया गया था। इनमें से करीब 13 हजार कॉपियों को कंप्यूटर के बजाय हाथ से जांचा गया।



इन 13 हजार आंसरशीट को स्कैन करने में कंप्यूटर को दिक्कत आ रही थी। छात्रों की लिखावट ठीक से स्कैन नहीं हो पा रही थी, इसलिए यह कदम उठाया गया। हालांकि, जो कॉपियां डिजिटल तरीके से जांची गईं, अब उन पर सवाल हैं।



सोशल मीडिया पर वायरल ब्लर कॉपियों को लेकर बोर्ड ने अभी कोई सफाई नहीं दी है। सीबीएसई के इस मौन की वजह से छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। छात्र और अभिभावक अब बोर्ड से इस पर तुरंत जवाब मांग रहे हैं।



इस पूरी प्रक्रिया में छात्रों का समय, पैसा और मानसिक शांति बर्बाद हो रही है। कॉपियां दोबारा जांचने की फीस भी बहुत ज्यादा है, जो सबको परेशान कर रही है। अब देखना होगा कि सीबीएसई इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है।



3 घंटे में 3.87 लाख से ज्यादा कॉपी मांगी गईं

CBSE ने बताया कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद छात्र अपनी स्कैन कॉपी मांगने लगे। पोर्टल खुलने के तीन घंटे में 3.87 लाख से ज्यादा डिजिटल कॉपी के लिए आवेदन आए।



बोर्ड ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी दी कि कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी पाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल अब ठीक से काम कर रहा है। मंगलवार 20 मई 2026 शाम 7:30 बजे तक, यानी तीन घंटे में, 3 लाख 87 हजार 399 स्कैन कॉपी के लिए 1 लाख 27 हजार 146 आवेदन जमा हो गए।



FAQ

  1. सोशल मीडिया पर CBSE की स्कैन कॉपियों को लेकर क्या नया विवाद चल रहा है?
    CBSE 12वीं के रिजल्ट के बाद छात्रों ने जब अपनी आंसरशीट डाउनलोड कीं, तो वे काफी धुंधली यानी ब्लर निकलीं। सोशल मीडिया पर इन धुंधली कॉपियों के स्क्रीनशॉट और वीडियो वायरल हो रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि कॉपियां इतनी खराब तरीके से स्कैन हुई हैं कि शब्द पढ़े नहीं जा रहे हैं. ऐसे में ऑन स्क्रीन मार्किंग करने वाले शिक्षकों ने बिना पढ़े ही नंबर काट दिए हैं।
  2. CBSE ने कॉपियों को डाउनलोड करने की आखिरी तारीख को क्यों आगे बढ़ाया है?
    जैसे ही CBSE ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर स्कैन कॉपियां डाउनलोड करने का लिंक लाइव किया, वैसे ही सर्वर पर लोड बढ़ गया। इस वजह से बोर्ड की वेबसाइट क्रैश हो गई और छात्रों को कॉपियां नहीं मिल सकीं। इस तकनीकी खराबी को देखते हुए बोर्ड ने आवेदन करने और कॉपी डाउनलोड करने की अंतिम तिथि को एक दिन बढ़ाकर 23 मई कर दिया है।
  3. CBSE के अनुसार 13 हजार कॉपियों को हाथ से क्यों चेक करना पड़ा था?
    CBSE ने स्पष्ट किया था कि मूल्यांकन के दौरान लगभग 13 हजार कॉपियां ऐसी थीं, जिनकी लिखावट को कंप्यूटर स्कैनर सही तरीके से रीड नहीं कर पा रहे थे। खराब स्कैनिंग और खराब लिखावट के कारण इन कॉपियों को ऑन स्क्रीन जांचना संभव नहीं था। छात्रों के नुकसान से बचने के लिए शिक्षकों ने इन 13 हजार कॉपियों को पारंपरिक तरीके से हाथ से चेक किया था।

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