क्या अब खत्म हो गया डिग्री का जमाना? जानें क्यों जरूरी है प्रैक्टिकल नॉलेज
Degree vs Skill India Report 2026: पहले लोग सोचते थे कि बड़े कॉलेज की डिग्री से ही अच्छी नौकरी मिलेगी। लेकिन आज के समय में नौकरी की यह दुनिया बहुत तेजी से बदल चुकी है। अब नई तकनीक और एआई (AI) ने कंपनियों की जरूरतों को पूरी तरह बदल दिया है। अब भर्ती करते समय सिर्फ कॉलेज का नाम या आपकी डिग्री नहीं देखी जाती।
कंपनियां अब ये देखती हैं कि आप असल में काम कितना अच्छा कर लेते हैं। इसलिए आज प्रैक्टिकल नॉलेज और प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस को बहुत ज्यादा महत्व मिलने लगा है। हाल की कई नई रिपोर्ट्स भी साफ तौर पर इसी बदलाव की ओर इशारा करती हैं।
कंपनियां अपना रही हैं नया मॉडल
इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में एक नया हायरिंग मॉडल तेजी से बढ़ रहा है। देश के लगभग 80% एम्प्लायर अब स्किल-फर्स्ट हायरिंग मॉडल अपना रहे हैं।इसका सीधा मतलब है कि भर्ती के वक्त आपकी तकनीकी क्षमता पहले देखी जाएगी।
आपके काम के एक्सपीरियंस को प्रॉयोरिटी मिलेगी और डिग्री का रोल थोड़ा कम होगा।एक नए सर्वे में 82% भारतीय प्रोफेशनल्स ने भी ये बात मानी है। उनके मुताबिक, कंपनियां सही हुनर वाले लोगों को डिग्री से ज्यादा महत्व देती हैं। इसलिए अब सिर्फ कॉलेज की पढ़ाई पूरी करना नौकरी के लिए काफी नहीं है।
हाइब्रिड मॉडल क्या होता है
वर्ष 2026 में भारत की बहुत सी कंपनियां एक नया तरीका अपना रही हैं। इसे कॉरपोरेट जगत में हाइब्रिड इवैल्यूएशन मॉडल कहा जा रहा है।
इस नए मॉडल के अंदर डिग्री और स्किल दोनों को ही आंका जाता है। हालांकि, सिलेक्शन के दौरान दोनों का रोल पूरी तरह से अलग-अलग होता है।
डिग्री से यह पता चलता है कि आपने किसी अच्छे संस्थान से पढ़ाई की है। यह आपके अनुशासन और लंबे समय तक सीखने की क्षमता का प्रमाण होती है। बहुत सी बड़ी कंपनियों में शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए डिग्री आज भी जरूरी है।
असली काम तो स्किल ही आती है
शुरुआती स्क्रीनिंग के बाद जब लास्ट स्टेप आता है, तब खेल बदल जाता है। अंतिम दौर में कंपनियां उम्मीदवार के प्रैक्टिकल काम करने की क्षमता को देखती हैं। वे चाहते हैं कि आपके पास ऐसी स्किल हो जिससे आप तुरंत काम संभाल लें।
आपको काम सिखाने में कंपनी का समय और पैसा दोनों बर्बाद न हो। यही वजह है कि आपके प्रोजेक्ट का अनुभव अब नौकरी की असली चाबी है। आपकी तकनीकी समझ ही आपको दूसरों से आगे लेकर जाती है।
इंडिया एम्प्लॉयबिलिटी रिपोर्ट
साल 2026 की इंडिया एम्प्लॉयबिलिटी रिपोर्ट में कुछ बहुत ही चौंकाने वाले आंकड़े आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लगभग 68 प्रतिशत स्टार्टअप्स अब बदल गए हैं। इन स्टार्टअप्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने न्यूनतम CGPA की शर्त हटा दी है।
अब वे अच्छे नंबर या ग्रेड देखकर युवाओं को रिजेक्ट नहीं करते। इसकी जगह अब कंपनियों में स्किल बेस्ड असेसमेंट और कोडिंग टेस्ट हो रहे हैं। यानी अब सिर्फ अच्छे नंबर लाने से आपको नौकरी की गारंटी नहीं मिलेगी।
इन स्किल्स की मांग है सबसे ज्यादा
आज के बदलते दौर में कुछ खास स्किल्स की मांग आसमान छू रही है। कंपनियां ऐसे युवाओं को खोज रही हैं जो एआई (AI) का सही इस्तेमाल जानते हों। इसके अलावा डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मार्केटिंग जानने वालों की बहुत मांग है।
क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्राफिक डिजाइन की स्किल्स रखने वाले भी पहली पसंद हैं। आजकल मार्केट में सस्टेनेबिलिटी (ESG) से जुड़ी जानकारी की भी काफी मांग बढ़ रही है। इन सब टेक्निकल स्किल्स के साथ कुछ और भी चीजें बहुत जरूरी हैं।
सॉफ्ट स्किल्स भी हैं बहुत जरूरी
सिर्फ कंप्यूटर और कोडिंग की जानकारी होना ही आज के लिए काफी नहीं है। इसके साथ ही करियर मेंआपकी कम्युनिकेशन स्किल्स यानी बातचीत का तरीका बहुत मजबूत होना चाहिए। ऑफिस में किसी समस्या का तुरंत समाधान ढूंढना और टीमवर्क करना भी बहुत जरूरी है।
सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता को कंपनियां बहुत सराहती हैं। अगर आपके पास बेहतरीन तकनीकी ज्ञान के साथ अच्छी सॉफ्ट स्किल्स भी हैं, तो समझें काम हो गया। आज के इस बदलते जॉब मार्केट में आपके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं होगी।
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