बिना स्कूल जाए बच्चा बनेगा डॉक्टर-इंजीनियर? जानें Homeschooling का बढ़ता ट्रेंड

Manya Jain | Apr 26, 2026, 20:25 IST
Homeschooling
बढ़ती स्कूल फीस के कारण होमस्कूलिंग का चलन बढ़ा है। अब पेरेंट्स पारंपरिक पढ़ाई के बजाय बच्चों को घर पर हुनर (Skills) सिखाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। छोटे शहरों में भी यह बदलाव दिख रहा है।

Education News:आज के दौर में शिक्षा का तरीका पूरी तरह बदल रहा है। स्कूलों की बढ़ती फीस और नई डिमांड से पेरेंट्स परेशान हैं। यूनिफॉर्म और महंगी किताबों का बोझ अब भारी लगने लगा है। इसी वजह से देश में होमस्कूलिंग का चलन बढ़ रहा है।



बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों में भी बदलाव दिख रहा है। पेरेंट्स अब बच्चों को घर पर ही पढ़ाना पसंद कर रहे हैं। एआई के इस युग में हुनर सीखना बहुत जरूरी है। पारंपरिक पढ़ाई के बजाय स्किल्स पर अब ज्यादा ध्यान है। बच्चे अब अपनी रुचि के अनुसार घर पर पढ़ाई कर रहे हैं।



क्या भारत में Homeschooling कानूनी है?

अक्सर माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि क्या घर पर पढ़ाना कानूनन सही है? इसका जवाब है— हां।



  • RTE Act 2009: शिक्षा का अधिकार कानून 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा देना जरूरी करता है, लेकिन ये नहीं कहता कि शिक्षा सिर्फ स्कूल के अंदर ही दी जाए।
    NEP 2020: नई शिक्षा नीति बच्चों को अपनी मर्जी से और अपनी गति से सीखने का मौका देती है। इसमें होमस्कूलिंग जैसे ऑप्शन को बढ़ावा दिया गया है।

बोर्ड परीक्षा और डिग्री का लॉजिक

1. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS)

NIOS एक राष्ट्रीय बोर्ड है जो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसके माध्यम से छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा 'प्राइवेट कैंडिडेट' के तौर पर दे सकते हैं। इसकी मार्कशीट की मान्यता CBSE और अन्य राज्य बोर्डों के बिल्कुल बराबर है।



2. अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड (International Boards)

जो छात्र वैश्विक स्तर पर पढ़ाई करना चाहते हैं, वे IGCSE (कैम्ब्रिज) के जरिए प्राइवेट छात्र के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड की परीक्षा दे सकते हैं।



क्या होमस्कूलर बन सकते हैं डॉक्टर या इंजीनियर?

यह सबसे बड़ा डर है जो माता-पिता को सताता है। अच्छी खबर यह है कि होमस्कूलिंग करने वाला बच्चा भी इंजीनियरिंग और मेडिकल के क्षेत्र में जा सकता है।



  • प्रतियोगी परीक्षाएं: NIOS से 12वीं करने वाले छात्र JEE (इंजीनियरिंग), NEET (मेडिकल) और CLAT (कानून) जैसी सभी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में बैठने के लिए पूरी तरह पात्र हैं।
  • विश्वविद्यालय प्रवेश: भारत का हर प्रमुख विश्वविद्यालय और कॉलेज NIOS के प्रमाणपत्र को स्वीकार करता है, इसलिए उच्च शिक्षा के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।

होमस्कूलिंग महंगी या सस्ती?

होमस्कूलिंग का खर्च पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सा रास्ता चुनते हैं।



  • सस्ता ऑप्शन: यदि आप केवल NIOS के जरिए घर पर पढ़ाई करते हैं, तो इसका रजिस्ट्रेशन खर्च 5 हजार रुपए से भी कम है।
  • महंगा ऑप्शन: कई अभिभावक मिलकर छोटे-छोटे ग्रुप्स में ट्यूटर्स या ऑनलाइन इंटरनेशनल स्कूल की मदद लेते हैं। इसमें खर्च बढ़ सकता है, लेकिन यह बड़े नामी स्कूलों की वार्षिक फीस से फिर भी कम रहता है।

होमस्कूलिंग के फायदे और चुनौतियां

  • फायदे: खुद पर ध्यान मिलना, आरामदायक माहौल, और अपनी पसंद के विषयों पर काम करने का मौका।
  • चुनौतियां: समाज में घुलने-मिलने में परेशानी, माता-पिता का ज्यादा ध्यान देना, और कुछ हद तक नियमों का पालन करना।

सोशल स्किल्स और कम्युनिटी डेवलपमेंट

एक बड़ा डर यह रहता है कि बच्चा 'अकेला' पड़ जाएगा। अब इसके लिए भारत में 'होमस्कूलिंग कम्युनिटीज' बन रही हैं। इन कम्युनिटीज में बच्चे स्पोर्ट्स क्लब, म्यूजिक क्लास और आर्ट वर्कशॉप्स के जरिए दूसरे बच्चों से मिलते हैं। इसके अलावा, सोशल (Social skill) इंटरेक्शन के लिए ग्रुप ट्रिप्स और एक्टिविटीज भी आयोजित की जाती हैं।



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