स्टेटस सिंबल से रोजमर्रा की जरूरत तक: जानिए कैसे बदले भारतीय परिवार
समझें क्या है पूरा मामला
- एक समय स्कूटर खरीदने के लिए सालों इंतजार करना पड़ता था।
- घर में फोन, रंगीन टीवी, फ्रिज होना अमीरी की निशानी थी।
- हवाई यात्रा सिर्फ कुछ खास लोगों तक सीमित थी।
- पिछले तीन-चार दशकों में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
- अब यही चीजें आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं।
फोन से मोबाइल तक सफर
चार दशक पहले घर में लैंडलाइन फोन होना भी लग्जरी माना जाता था। साल 1995 में मोबाइल सेवा शुरू हुई। उस दौर में मोबाइल फोन बहुत कम लोगों के पास थे। हैंडसेट की कीमत 25 से 40 हजार रुपए तक होती थी। इनकमिंग कॉल पर भी 7 से 8 रुपए प्रति मिनट खर्च होता था।
आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। देश में अब 125 करोड़ से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हैं। 95% से ज्यादा परिवारों के पास मोबाइल फोन है। यह बदलाव बताता है कि तकनीक कितनी तेजी से आम लोगों तक पहुंची है।
फ्रिज अब हर घर की जरूरत
साल 2011-12 में ग्रामीण भारत में सिर्फ 9.4% घरों में फ्रिज था। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 2023-24 तक 43.8% से बढ़कर 68.1% हो गया। यानी शहरों में अब हर दूसरे-तीसरे घर में फ्रिज मौजूद है। कभी स्टेटस सिंबल रहा फ्रिज अब आम सुविधा बन गया है।
गाड़ी अब सबकी पहुंच में
एक दौर था जब कार खरीदना बड़ी बात मानी जाती थी। दोपहिया वाहन के लिए भी अतिरिक्त पैसे देने पड़ते थे। साल 2011-12 में करीब 19% परिवारों के पास दोपहिया वाहन था। 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 59% तक पहुंच गया। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 40.1% से बढ़कर 68.2% हो गया है।
हवाई सफर हुआ आसान
1990 के दशक में हवाई यात्रा को दुर्लभ अनुभव माना जाता था। उस समय सालाना करीब 1 करोड़ लोग हवाई यात्रा करते थे। अब यह आंकड़ा 16 गुना तक बढ़ चुका है। यानी जो सफर कभी चुनिंदा लोगों का था, अब आम लोगों की पहुंच में है।
आय बढ़ी, खर्च करने का हौसला भी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में लोगों की खर्च करने वाली आय 2013-14 में करीब 294.55 लाख करोड़ रुपए थी। 2024-25 में यह बढ़कर करीब 325 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसी दौरान यूएचएनआई (UHNI – Ultra High Net Worth Individual) यानी बेहद अमीर लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि 2023 से 2028 के बीच इनकी आबादी 50% तक बढ़ सकती है।
लग्जरी ज्वेलरी और घड़ियां
डी बियर्स इंडिया की डायमंड एक्विजिशन स्टडी के मुताबिक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डायमंड ज्वेलरी बाजार है। वैश्विक मांग में भारत की हिस्सेदारी अब 12% हो गई है, जो 2019 में 10% थी। एक्सपर्ट्स के अनुसार 2025 में देश का लग्जरी बाजार करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए का था। भारत दुनिया के तीन सबसे तेजी से बढ़ते लग्जरी बाजारों में शामिल है।
बदलते लग्जरी के 10 ट्रेंड
अब लग्जरी सिर्फ महंगा सामान खरीदना नहीं रह गया है। लोग महंगी घड़ियां और ज्वेलरी निवेश के तौर पर भी खरीद रहे हैं। भारतीय ब्रांड अब वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं। ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट चाहते हैं। सोशल मीडिया अब लग्जरी ब्रांड खोजने का बड़ा माध्यम बन गया है।
एआई और वर्चुअल ट्राई-ऑन जैसी तकनीकें खरीदारी को आसान बना रही हैं। लोगों के लिए लग्जरी का मतलब अब समय, मानसिक शांति और बेहतर जीवन भी है। आसान फाइनेंसिंग की वजह से प्रीमियम प्रोडक्ट मध्यम वर्ग की पहुंच में आ रहे हैं। साथ ही लोग अब पर्यावरण फ्रेंडली ब्रांडों को भी तरजीह दे रहे हैं।
कुल मिलाकर पिछले 40 साल में भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जो चीजें कभी सिर्फ अमीरों के लिए थीं, अब वे आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं।
FAQ
- भारत में मोबाइल फोन कितने परिवारों के पास है?
भारत में अब 95% से ज्यादा परिवारों के पास मोबाइल फोन है। देश में 125 करोड़ से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हैं। यह आंकड़ा 1995 के मुकाबले बहुत बड़ा है। - हवाई यात्रियों की संख्या कितनी बढ़ी है?
1990 के दशक में सालाना करीब 1 करोड़ लोग हवाई यात्रा करते थे। अब यह संख्या 16 गुना बढ़ चुकी है। यह भारत में बढ़ते मध्यम वर्ग को दिखाता है। - भारत का लग्जरी बाजार कितना बड़ा है?
2025 में भारत का लग्जरी बाजार करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए का था। भारत दुनिया के तीन सबसे तेजी से बढ़ते लग्जरी बाजारों में शामिल है। डायमंड ज्वेलरी में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।
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