टॉक्सिक से द राजा साब तक, बंपर ओपनिंग के बाद भी क्यों फ्लॉप फिल्में साबित हो रहीं बड़ी फिल्में, छोटे बजट की फिल्में हो रही हिट
Hanuman Ansh Collection: इंडियन सिनेमा के लिए हालिया तीन महीने बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। इस दौरान बॉक्स ऑफिस पर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। एक समय था जब फिल्म की पहले दिन की कमाई ही उसकी सफलता तय कर देती थी।
अगर फिल्म को बंपर ओपनिंग मिल गई, तो उसे हिट मान लिया जाता था। लेकिन अब नया ट्रेंड शुरू हो चुका है। अब बंपर ओपनिंग भी हिट होने की गारंटी नहीं दे पा रही है। दर्शकों का मूड अब पूरी तरह बदल गया है। दर्शक सिर्फ स्टार पावर देखकर सिनेमाघर नहीं आ रहे।
अगर फिल्म की कहानी में दम नहीं है, तो फिल्म पहले दिन के बाद धड़ाम से गिर जाती है। यही वजह है कि सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की ओपनिंग लेने वाली फिल्में भी फ्लॉप साबित हो रही हैं। जुलाई से सितंबर के बीच भारतीय फिल्मों ने दो हजार 692 करोड़ का बिजनेस किया।
लेकिन इस दौरान बंपर ओपनिंग और अंतिम नतीजों में भारी अंतर देखने को मिला है। आइए समझते हैं कि आखिर बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में यह नया ट्रेंड कैसे काम कर रहा है।
बंपर ओपनिंग के बाद क्यों पिछड़ीं फिल्में
हाल के दिनों में बड़े स्टार्स की कई फिल्मों ने पहले दिन रिकॉर्ड कमाई की। सुपरस्टार यश की फिल्म टॉक्सिक ने पहले दिन ही 135 करोड़ रुपए जुटाए थे। लेकिन खराब वर्ड ऑफ माउथ के कारण ये कुल कमाई में पिछड़ गई। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर इसका कलेक्शन सिर्फ 250 करोड़ रुपए ही रह गया।
प्रभास की बहुचर्चित फिल्म द राजा साब का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। इस फिल्म ने पहले दिन सौ करोड़ रुपए का धमाकेदार कारोबार किया था। लेकिन कमजोर कहानी के चलते यह फिल्म भी फ्लॉप साबित हुई। घरेलू स्तर पर यह केवल 146 करोड़ रुपए ही कमा सकी।
कुछ ऐसा ही हाल फिल्म पेड्डी का भी देखने को मिला। इसने पहले दिन 112 करोड़ कमाए लेकिन बाद में 244 करोड़ पर सिमट गई। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले साल 2023 में आई फिल्म आदिपुरुष भी बंपर ओपनिंग के बावजूद फ्लॉप हुई थी।
कम बजट की फिल्मों का बड़ा धमाका
एक तरफ जहां बड़े बजट की फिल्में बंपर ओपनिंग के बाद फ्लॉप हो रही हैं, वहीं छोटे बजट की फिल्में कमाल कर रही हैं। दर्शक अब स्टार्स से ज्यादा कंटेंट को तरजीह दे रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण फिल्म हनुमान अंश है।
मात्र दो करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। इस फिल्म ने अब तक 425 करोड़ रुपए का शानदार बिजनेस कर लिया है। रिलीज से पहले इस फिल्म के केवल 15 सौ टिकट ही बुक हुए थे।
लेकिन जब दर्शकों ने इसे देखा, तो इसकी तारीफ हर तरफ होने लगी। पब्लिसिटी और माउथ पब्लिसिटी के दम पर इसका कारोबार दिन-ब-दिन बढ़ता चला गया। पहले दिन महज 10 लाख रुपए कमाने वाली यह फिल्म आखिरकार 327 करोड़ रुपए के घरेलू कलेक्शन तक पहुंच गई।
छोटे ओपनिंग वाली फिल्में बनीं ब्लॉकबस्टर
इस नए बॉक्स ऑफिस ट्रेंड ने यह साबित कर दिया है कि शुरुआती आंकड़े अब आखिरी सच नहीं हैं। छोटी शुरुआत करने वाली फिल्में भी बाद में ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बन रही हैं।
फिल्म 'देऊल बंद' दो ने पहले दिन केवल 2.45 करोड़ रुपए की कमाई की थी। लेकिन इसके बाद दर्शकों के प्यार ने इसे 74 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया। इसी तरह फिल्म बेथलहम ने पहले दिन 4.90 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। बाद में इसका कुल घरेलू कलेक्शन 164 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा।
इन आंकड़ों से साफ है कि दर्शकों को अब सिर्फ मसालेदार सिनेमा नहीं चाहिए। वे ऐसी कहानियां देखना चाहते हैं जो उनके दिल को छू सकें। अगर फिल्म में ईमानदारी से काम हुआ है, तो दर्शक उसे अपने आप ब्लॉकबस्टर बना देते हैं।
ओटीटी से बड़े पर्दे का नया मॉडल
सिनेमा जगत में एक और नया और दिलचस्प मॉडल तेजी से उभर रहा है। यह मॉडल है डिजिटल से थियेटर की तरफ कदम बढ़ाना। ओटीटी पर सुपर-हिट रही वेब सीरीज 'मिर्जापुर' की कहानी जब बड़े पर्दे पर पहुंची, तो उसने इतिहास रच दिया।
'मिर्जापुर: द मूवी' ने सिनेमाघरों में 335 करोड़ रुपए की धमाकेदार कमाई की। इससे पहले कभी किसी ओटीटी शो को इस तरह बड़े पर्दे पर लाकर इतनी बड़ी सफलता नहीं मिली थी। ये नया प्रयोग अब फिल्म मेकर्स के लिए कमाई का नया जरिया बन चुका है। ओटीटी पर बने फैन बेस का फायदा अब सीधा थियेटर को मिल रहा है।
क्या सीख देता है यह नया ट्रेंड
बॉक्स ऑफिस का यह नया ट्रेंड फिल्म मेकर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है और सीख भी। अब केवल स्टार वैल्यू के दम पर फिल्में नहीं चलाई जा सकतीं। एडवांस बुकिंग और बंपर ओपनिंग से फिल्म को पहले दिन की कमाई तो मिल सकती है। लेकिन लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए अच्छी स्क्रिप्ट होना जरूरी है।
दर्शक अब बहुत समझदार हो चुके हैं। वे सोशल मीडिया के दौर में तुरंत अपना रिव्यू शेयर कर देते हैं। यदि पहले शो के बाद ही रिव्यू निगेटिव आ गए, तो फिल्म का संभलना नामुमकिन हो जाता है। आने वाले समय में वही मेकर्स टिक पाएंगे जो बजट से ज्यादा अपनी कहानी और मेकिंग पर ध्यान देंगे।
दर्शकों का बदला नजरिया और भविष्य
आज का युवा दर्शक सिनेमाघर में कुछ नया अनुभव करने जाता है। अगर उसे वही पुरानी घिसी-पिटी कहानी परोसी जाएगी, तो वह उसे नकार देगा। यही वजह है कि भारी-भरकम स्टारकास्ट और महंगे वीएफएक्स भी फिल्मों को फ्लॉप होने से नहीं बचा पा रहे हैं।
इसके विपरीत, जहां लोक कथाओं, जमीनी मुद्दों या बेहतरीन सस्पेंस की बात होती है, वहां दर्शक खिंचे चले आते हैं। भविष्य में भी यह ट्रेंड कायम रहने की पूरी संभावना है। अब बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ वही राज करेगा, जिसके पास बेहतरीन कंटेंट और दमदार एक्टिंग होगा।