बॉलीवुड के इन 7 आइकॉनिक फिल्मों के बिना अधूरा है Ganesh Chaturthi celebration
Ganesh Chaturthi: बॉलीवुड और गणेश चतुर्थी का रिश्ता एकदम परफेक्ट है। फिल्मों ने इस त्योहार के जोश और भक्ति को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है। ये फिल्में सिर्फ कहानियां नहीं बतातीं, बल्कि गणपति उत्सव के गानों और सीन से ऑडियंस को इमोशनल फॉर्म से जोड़ती हैं, जिससे यह त्योहार और भी खास हो जाता है
यह एक ऐसी प्यारी सी फिल्म है जिसे हर गणेश चतुर्थी पर टीवी पर देखना बनता था। एक मासूम बच्चे और भगवान गणेश के बीच की दोस्ती को यह फिल्म बहुत ही प्यारे और सरल तरीके से दिखाती है। बच्चों को यह फिल्म खासकर बहुत पसंद आती है क्योंकि यह त्योहार के असली मायने को समझाती है।
इस कॉमेडी-ड्रामा फिल्म में एक बिन बुलाए मेहमान की कहानी है। फिल्म में गणेश चतुर्थी का एंगल एक मजेदार ट्विस्ट लेकर आता है। मजेदार सिचुएशंस के बीच, इस परिवार की गणपति के प्रति भक्ति को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। फिल्म की एंडिंग गणपति विसर्जन के दिन होता है जिसमें घर पर पूजा और बच्चों के गणपति पंडाल जाने जैसे छोटे-छोटे डिटेल्स को भी शामिल किया गया है।
इस फिल्म का 'देवा श्री गणेशा' गाना एक ऐसा एंथम बन गया है जिसे आज भी हर पंडाल में बजाया जाता है। ऋतिक रोशन पर फिल्माया गया यह गाना सिर्फ एक डांस नंबर नहीं, बल्कि यह फिल्म की कहानी का एक बहुत ही पावरफुल हिस्सा है। गणपति विसर्जन का यह सीन ऋतिक के किरदार की फीलिंग्स और एनर्जी को दिखाता है।
शाहरुख खान की 2006 में आई इस फिल्म के 'मौर्या मौर्या' गाने को कौन भूल सकता है? यह गाना फिल्म में विजय (शाहरुख खान) की धमाकेदार एंट्री का सीक्वेंस था। गणपति उत्सव की भीड़ और एनर्जी के बीच फिल्माया गया यह गाना दर्शकों को सीट पर उछलने पर मजबूर कर देता है।
संजय दत्त की इस आइकॉनिक फिल्म में गणेश चतुर्थी का बहुत गहरा मतलब है। फिल्म में रघु (संजय दत्त) की भगवान गणेश के लिए अटूट आस्था और भक्ति को दिखाया गया है। एक गैंगस्टर होने के बावजूद वह हमेशा गणपति पर अपना विश्वास रखता है, जो उसके किरदार को एक अलग इमोशनल लेयर देता है।
वरुण धवन, श्रद्धा कपूर और प्रभुदेवा की इस फिल्म में गणेश चतुर्थी पर फिल्माया गया एक डांस नंबर है। यह गाना सिर्फ कोरियोग्राफी का कमाल नहीं दिखाता, बल्कि गणपति उत्सव की एनर्जी और जोश को भी पूरी तरह से कैप्चर करता है।
यह फिल्म गणेश चतुर्थी के जश्न की कहानी दिखाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे लोग सड़कों पर नाचते हैं और अपनी भक्ति में डूबे होते हैं, जबकि इस शोर-शराबे में शहर की कुछ दूसरी कहानियां भी चलती रहती हैं। यह फिल्म त्योहार की भव्यता के साथ-साथ शहर की एक अलग साइड भी दिखाती है।