गाड़ियों-कपड़ों से ज्यादा घूमने पर खर्च कर रहे भारतीय, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
GenZ Travel Trend India: भारत में लोगों के रहने और खर्च करने का तरीका बदल रहा है। अब लोग घर के सामान पर कम ध्यान दे रहे हैं। उनका पूरा ध्यान अब घूमने-फिरने और नए अनुभवों पर है।
रियल एस्टेट कंसलटेंट सीबीआरई ने इस पर एक नई रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का नाम Gen Z Check-in रखा गया है। यह रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 से 2030 के बीच बदलाव आएगा।
इस दौरान कपड़े, गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च कम रफ्तार से बढ़ेगा। इन फिजिकल चीजों पर खर्च 9.1% सालाना की दर से बढ़ेगा। लेकिन घूमने और होटल पर खर्च 10.3% की रफ्तार से आगे बढ़ेगा।
भारतीयों की खर्च की बदलती आदतें
सबसे तेज बढ़त होटल सेक्टर में देखने को मिल रही है। वहां खर्च में 10.6% की बड़ी सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह देश की जेनजी पीढ़ी है। यह वह पीढ़ी है जिसका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ।
अब इस पीढ़ी के युवाओं ने कमाना शुरू कर दिया है। यह पीढ़ी किसी भी अन्य जीवित पीढ़ी से ज्यादा तेज खर्च कर रही है। उनके लिए होटल का मतलब सिर्फ रात गुजारने की जगह नहीं है। वे होटल में एक खास तरह का लाइफस्टाइल और माहौल चाहते हैं।
इंस्टाग्राम फ्रेंडली होटलों की भारी मांग
युवाओं को अब ऐसे होटल पसंद आते हैं जो इंस्टाग्राम के लायक हों। वे वहां वाइन टेस्टिंग और फोक कल्चरल प्रोग्राम्स का मजा लेना चाहते हैं। उन्हें वेलनेस जैसी मॉडर्न कन्वीनियंस भी अपनी ओर बहुत ज्यादा आकर्षित करती हैं। कोविड महामारी के बाद से ये नया बदलाव और तेज हो गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कंस्यूमर अब सिर्फ एक साधारण कमरा नहीं खरीदता है। वह एक ऐसा माहौल चाहता है जो पूरी तरह अनोखा हो। वह सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जगहों पर समय बिताना पसंद करता है। इसी वजह से देश में लाइफस्टाइल होटलों की मांग बढ़ रही है।
होटलों का औसत किराया हुआ महंगा
कोटक इंस्टीट्यूशनल की रिपोर्ट भी होटल इंडस्ट्री पर बड़ा खुलासा करती है। मार्च 2026 की तिमाही में होटलों के कमरों से आय बढ़ी है। यह आय 5.3% बढ़कर छह हजार 868 रुपए प्रति दिन पहुंच गई है। वहीं होटलों में कमरों की दरें भी काफी ज्यादा बढ़ गई हैं।
अब देश में कमरों का औसत किराया 10 हजार 100 रुपए प्रति दिन हो गया है। वित्त वर्ष 2026 से 2031 के बीच कमरों की दरें और बढ़ेंगी। यह दरें 6.4% की सालाना ग्रोथ के साथ आगे बढ़ती रहेंगी। इस दौरान होटलों में कमरों की ऑक्यूपेंसी भी 72% तक पहुंच जाएगी।
छोटे शहरों में नए होटलों की बाढ़
भारत में अभी लाइफस्टाइल होटलों की संख्या दूसरे देशों से कम है। सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग के मुकाबले भारत में अभी बहुत मौके हैं। इसलिए देश में इस बिजनेस के बढ़ने की बहुत ज्यादा संभावना है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कामकाजी आबादी तेजी से बढ़ेगी।
साल 2024 से 2030 के बीच 10 करोड़ से अधिक लोग जुड़ेंगे। यह 15 से 59 वर्ष की कार्यशील आयु वाले लोग होंगे। यह आबादी साधारण दिखने वाले होटलों के बजाय खास जगहें पसंद करती है। उन्हें लाइव म्यूजिक, वाइन टेस्टिंग या लोकल इवेंट्स वाले होटल चाहिए।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में विकास
भारत में होटल इंडस्ट्री के अंदर बहुत बड़ा विस्तार होने वाला है। वित्त वर्ष 2026 में 61,900 नई होटल चाबियों पर हस्ताक्षर हुए हैं। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2025 के 41 हजार रुपए से बहुत ज्यादा है। आने वाले समय में होटलों की ब्रांडेड इन्वेंट्री और बढ़ेगी।
साल 2026 से 2031 के बीच ब्रांडेड कमरे 3.1 लाख तक पहुंच जाएंगे। इस नई होटल सप्लाई का 76% हिस्सा छोटे शहरों में आएगा। ये मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 कैटेगरी के शहर होंगे। वहां सीबीआरई के मुताबिक पारंपरिक बुटीक होटलों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
लाइव इवेंट्स और शो का नया क्रेज
भारत में लाइव इवेंट सेगमेंट का बाजार भी बहुत बड़ा हो गया है। साल 2024 में यह पूरा सेगमेंट 12 हजार करोड़ पार कर गया। इसमें हर साल 19% की दर से ग्रोथ होने का अनुमान है। लगभग 78% भारतीय उपभोक्ता भौतिक सामान के बजाय अनुभव चुन रहे हैं।
लोग बड़े कलाकारों को देखने के लिए लंबी दूरी तय कर रहे हैं। दर्शक इसके लिए 500 किलोमीटर तक लंबी यात्रा करने को तैयार हैं। वे सामान्य से 3 गुना तक ज्यादा होटल कीमत देने को तैयार रहते हैं। साल 2025 में भारत में 34,086 बड़े लाइव इवेंट्स का आयोजन हुआ।
युवाओं की पसंद और कोल्डप्ले का असर
इन लाइव इवेंट्स में आने वाले 70% दर्शक बहुत युवा थे। उनकी उम्र 35 साल से भी कम दर्ज की गई थी। इसमें से भी 52% दर्शकों की उम्र तो 30 साल से कम थी। जनवरी 2025 में अहमदाबाद में कोल्डप्ले के दो बड़े शो हुए थे।
इन दो शो को देखने के लिए 2.2 लाख लोग आए थे। इस कॉन्सर्ट का कुल आर्थिक असर 641 करोड़ रुपए का रहा था। इसमें से 392 करोड़ रुपए सीधे तौर पर शहर की कमाई में गए। दर्शकों ने यात्रा, खाना, शॉपिंग और ठहरने पर अतिरिक्त खर्च किए।
ट्रेवल और टूरिज्म मार्केट का भविष्य
भारत में घरेलू पर्यटन (Gen Z Workplace Behavior)लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। देश के अंदर घरेलू पर्यटन का आंकड़ा 303 करोड़ तक पहुंच गया है। साल 2024 में 42% विदेश यात्राएं सिर्फ फुर्सत और सुकून के लिए थीं। लोगों का झुकाव अब मानसिक शांति और आराम की तरफ बढ़ा है।
साल 2026 में देश का ट्रेवल एंड टूरिज्म (Gen Z की परफॉर्मेंस) बाजार काफी बड़ा है। इसका कुल अनुमानित मूल्य 34.44 अरब डॉलर लगाया गया है। साल 2030 तक यह बाजार 12% की सालाना ग्रोथ हासिल करेगा। तब तक यह पूरा मार्केट बढ़कर 54.34 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
FAQ
- भारतीय युवाओं में लाइफस्टाइल होटलों का क्रेज क्यों बढ़ रहा है?
भारतीय युवा अब होटल को सिर्फ रुकने की जगह नहीं मानते हैं। वे इंस्टाग्राम के अनुकूल माहौल, वाइन टेस्टिंग, लोकल कल्चर और वेलनेस जैसी खास सुविधाएं चाहते हैं। इसलिए वे साधारण कमरों की जगह अनोखे अनुभव वाले लाइफस्टाइल होटलों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। - होटल इंडस्ट्री में टियर-2 और टियर-3 शहरों की क्या भूमिका होने वाली है?
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2031 तक देश में आने वाली नई होटल सप्लाई का 76% हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आएगा। छोटे शहरों में बुटीक और लाइफस्टाइल होटलों की मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि वहां पर्यटन का विकास हो रहा है। - लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट और इवेंट्स का भारत की होटल इंडस्ट्री पर क्या असर हो रहा है?
लाइव इवेंट्स के लिए लोग 500 किलोमीटर तक की यात्रा कर रहे हैं और 3 गुना तक महंगी कीमतों पर होटल बुक कर रहे हैं। जनवरी 2025 के अहमदाबाद कोल्डप्ले शो से शहर को 392 करोड़ की सीधी कमाई हुई थी, जिससे होटल सेक्टर को बड़ा फायदा मिला।
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