Gen-Z युवाओं के बीच फिर से ट्रेंड हो रहे हैं बोर्ड गेम्स और बुक क्लब? क्या है स्लो लिविंग
Manya Jain | May 04, 2026, 16:37 IST
Gen Z Hobby Trends
हाई-टेक दौर में अब युवा 'स्लो लिविंग' की ओर बढ़ रहे हैं। बेंगलुरु और दिल्ली के युवा अब गेमिंग छोड़कर बोर्ड गेम्स, बुक क्लब, बुनाई और बेकिंग जैसी पुरानी हॉबी को अपना रहे हैं।
आज का युग बहुत हाई-टेक हो गया है। एआई (AI) और गैजेट्स हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं। लेकिन अब युवाओं की पसंद बदल रही है। बेंगलुरु और दिल्ली के युवा अब अलग दिख रहे हैं। वे वीकेंड पर गेमिंग पार्लर नहीं जा रहे।
इसके बजाय वे बोर्ड गेम्स कैफे पसंद कर रहे हैं। कई युवा अब बुक क्लब में समय बिताते हैं। स्मार्टफोन के दौर में यह बदलाव दिलचस्प है। युवा अब बुनाई और बेकिंग में रुचि ले रहे हैं। कढ़ाई जैसे काम अब फिर से लौट रहे हैं। ये काम कभी दादी-नानी के दौर के थे। अब युवा 'स्लो लिविंग' की तलाश में हैं।
आज के युवाओं का सारा समय मोबाइल की स्क्रीन पर बीतता है। ऑफिस का काम हो या सोशल मीडिया, हम बस चिपके रहते हैं। डूमस्क्रॉलिंग के चक्कर में हम घंटों का समय बर्बाद कर देते हैं। मोबाइल की नीली रोशनी से मानसिक तनाव और थकान बढ़ती जा रही है।
ऐसे में बोर्ड गेम्स या बुनाई जैसे शौक बहुत काम आते हैं। जब आप शतरंज खेलते हैं, तो आपका दिमाग पूरी तरह सक्रिय होता है। स्वेटर बुनते समय आपका ध्यान केवल अपने काम पर होता है। यह काम आपको मोबाइल नोटिफिकेशन के शोर से दूर रखते हैं।
सोशल मीडिया हमें हजारों दोस्तों से जोड़ता है, लेकिन यह जुड़ाव अक्सर 'लाइक' और 'कमेंट' तक ही सीमित रहता है। शोध बताते हैं कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं में अकेलेपन और अवसाद (Depression) को बढ़ा रहा है।
यही कारण है कि बुक क्लब (Book Club) और सपर क्लब (Supper Clubs) जैसे प्लेटफॉर्म युवाओं के बीच 'सेक्सी' और 'ट्रेंडी' बन रहे हैं। जब युवा साथ बैठकर किसी किताब पर चर्चा करते हैं या साथ मिलकर खाना बनाते हैं, तो वे सिर्फ विचार साझा नहीं करते, बल्कि वास्तविक भावनाएं साझा करते हैं। यह मानवीय जुड़ाव (Human Connection) नई दोस्ती का रास्ता खोलता है और अकेलेपन को कम करता है।
आज की दुनिया हर चीज में जल्दबाजी दिखा रही है। हर कोई 'इंस्टेंट' (Instant) परिणामों के पीछे भाग रहा है। फास्ट फूड और शॉर्ट वीडियो का चलन बढ़ गया है। लेकिन कुछ खास कामों में वक्त देना जरूरी है।
केक बेक करना या पेंटिंग करना समय मांगता है। अब युवा इस धीमी गति का आनंद ले रहे हैं। बोर्ड गेम्स खेलने में घंटों का समय लग सकता है। एक किताब खत्म करने में कई दिन लगते हैं। यह धीमी प्रक्रिया अब एक ध्यान (Meditation) बन गई है। इससे बिना भटकाव के काम करना आसान होता है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में इन पारंपरिक शौकों का बाजार और बढ़ेगा। लोग अब समझ रहे हैं कि तकनीक सुविधा के लिए है, सुख के लिए नहीं।
असली सुख तो अपनों के साथ बैठकर बात करने, कुछ रचने और शांति के दो पल बिताने में है। जेन-जी का यह कदम एक अधिक संतुलित और जागरूक भविष्य की ओर संकेत करता है।
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इसके बजाय वे बोर्ड गेम्स कैफे पसंद कर रहे हैं। कई युवा अब बुक क्लब में समय बिताते हैं। स्मार्टफोन के दौर में यह बदलाव दिलचस्प है। युवा अब बुनाई और बेकिंग में रुचि ले रहे हैं। कढ़ाई जैसे काम अब फिर से लौट रहे हैं। ये काम कभी दादी-नानी के दौर के थे। अब युवा 'स्लो लिविंग' की तलाश में हैं।
डिजिटल ओवरलोड से फ्री होने की चाहत
ऐसे में बोर्ड गेम्स या बुनाई जैसे शौक बहुत काम आते हैं। जब आप शतरंज खेलते हैं, तो आपका दिमाग पूरी तरह सक्रिय होता है। स्वेटर बुनते समय आपका ध्यान केवल अपने काम पर होता है। यह काम आपको मोबाइल नोटिफिकेशन के शोर से दूर रखते हैं।
असली लोगों से जुड़ाव की भूख
बुक क्लब और सोशल मिक्सर का जादू
युवाओं के बीच ट्रेंडिंग पुराने शौक
- बोर्ड गेम्स (Board Games): दिमाग की कसरत और स्ट्रेटेजिक सोच विकसित करने के लिए।
- बुनाई और कढ़ाई (Knitting & Embroidery): ध्यान केंद्रित करने और फोकस बढ़ाने के लिए।
- बेकिंग (Baking): कुछ रचनात्मक बनाने और उपलब्धि की भावना के लिए।
- रनिंग-एंड-ब्रेकफास्ट क्लब: फिटनेस के साथ-साथ सोशल मेलजोल के लिए।
स्लो लिविंग का बढ़ता ट्रेंड
केक बेक करना या पेंटिंग करना समय मांगता है। अब युवा इस धीमी गति का आनंद ले रहे हैं। बोर्ड गेम्स खेलने में घंटों का समय लग सकता है। एक किताब खत्म करने में कई दिन लगते हैं। यह धीमी प्रक्रिया अब एक ध्यान (Meditation) बन गई है। इससे बिना भटकाव के काम करना आसान होता है।
क्या यह केवल एक अस्थाई ट्रेंड है?
असली सुख तो अपनों के साथ बैठकर बात करने, कुछ रचने और शांति के दो पल बिताने में है। जेन-जी का यह कदम एक अधिक संतुलित और जागरूक भविष्य की ओर संकेत करता है।
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