रिश्तों की उलझन सुलझाएगी Movie Therapy, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके बड़े फायदे
Movie Therapy: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कपल्स के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। लेकिन अमेरिकन थेरेपिस्ट्स ने इसका एक बहुत ही मजेदार समाधान निकाला है। इसे फिल्म थेरेपी या सिनेमाथेरेपी कहा जाता है। ये महज मनोरंजन नहीं बल्कि ट्रीटमेंट का एक इफेक्टिव मीडियम है।
अमेरिकन थेरेपिस्ट्स के मुताबिक सही फिल्म चुनकर पार्टनर के साथ देखना रिश्ते में प्यार ला सकता है। इसे माइंडफुल तरीके से देखना बहुत जरूरी माना गया है। इससे दबी हुई भावनाएं बाहर आती हैं और संवाद आसान होता है।
अरस्तू के सिद्धांत से जुड़ी है फिल्म चिकित्सा
लिंकन यूनिवर्सिटी की थेरेपिस्ट जेनी हेमिल्टन ने इस पर गहरी रिसर्च की है। उन्होंने इसका संबंध प्राचीन दार्शनिक अरस्तू (Aristotle's principles) के कैथार्सिस सिद्धांत से बताया है।
जैसे पुरानी ट्रेजेडी मन की सफाई करती थीं, वैसे ही फिल्में काम करती हैं। फिल्में हमें अपनी समस्याओं को नए नजरिए से देखने में मदद करती हैं।
जब हम पर्दे पर किसी को संघर्ष करते देखते हैं, तो जुड़ाव महसूस होता है। इससे हमारी अपनी मानसिक उलझनों का समाधान मिलना शुरू हो जाता है।
फिल्म पर बात करने वाले कपल्स में कम होता है तलाक
रोचेस्टर यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में बहुत चौंकाने वाली बात सामने आई है। जो कपल्स फिल्मों के मुद्दों पर खुलकर चर्चा करते हैं, उनमें अलगाव कम होता है। ऐसे कपल्स में तलाक की आशंका काफी हद तक घट जाती है।
इसका कारण ये है कि पार्टनर अपनी बात सहजता से कह पाते हैं। वे सीधे बात करने के बजाय किरदारों का उदाहरण इस्तेमाल करते हैं। इससे आपसी बहस के बजाय एक स्वस्थ संवाद की शुरुआत होती है।
ऐसी फिल्में देती हैं इंस्पिरेशन
एक्सपर्ट्स अक्सर होप स्प्रिंग्स जैसी फिल्मों को देखने की सलाह देते हैं। ऐसी फिल्में रिश्तों की उलझनों को बहुत ही गहराई से दिखाती हैं। किरदारों को अपनी समस्याओं पर बात करते देख कपल्स को इंस्पिरेशन मिलता है।
वे अपनी अनकही बातें और इच्छाएं पार्टनर के सामने रख पाते हैं। इससे पार्टनर को एक-दूसरे की जरूरतों को समझना बहुत आसान हो जाता है। फिल्मों के जरिए वे अपनी भावनाओं (change in lifestyle) को बेहतर तरीके से समझा सकते हैं।healthy lifestyle
फिल्म के बाद की चर्चा है सबसे जरूरी हिस्सा
फिल्म खत्म होने के बाद की बातचीत इस थेरेपी (Gen Z Relationships)का मेन हिस्सा है। थेरेपिस्ट हेमिल्टन के मुताबिक, कुछ तय सवालों पर चर्चा करना बहुत जरूरी है। इससे कपल्स समझ पाते हैं कि प्यार में मेहनत लगती है।
छोटे-मोटे झगड़े किसी भी अच्छे रिश्ते का सामान्य हिस्सा होते हैं। फिल्म देखने के बाद एक-दूसरे के विचारों को सुनना जुड़ाव बढ़ाता है। ये थेरेपी रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने का काम करती है।
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