अपमान से सम्मान तक, मैरी कॉम ने मजाक उड़ाने वालों को मुक्कों से जवाब देकर रचा इतिहास
इंटरनेशनल बॉक्सर: गरीबी और मुश्किलों के बीच पली-बढ़ी mary kom ने अपने सपने को पूरा करने के लिए परिवार के विरोध की परवाह किए बिना ही छिपकर बॉक्सिंग शुरू की।
2001 में अपने पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्हें सिल्वर मेडल मिला। यह एक तरह से हार थी पर मैरी कॉम इससे टूटी नहीं।
लगातार चार विश्व खिताब जीतकर उन्होंने खुद को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर बनाया। उन्होंने साबित कर दिया कि एक छोटे से गांव की लड़की असंभव को संभव कर सकती है।
दो बच्चों की मां बनने के बाद भी मैरी कॉम ने रिंग में वापसी की और साबित कर दिया कि मां होना और करियर दोनों को एक साथ निभाया जा सकता है।
2012 के लंदन ओलंपिक में पहली बार महिला बॉक्सिंग हुई। मैरी कॉम ने इसमें Bronze Medal जीतकर देश का नाम रोशन किया।
जब मैरी कॉम 35 साल की हुई तब लोग उनकी क्षमता पर सवाल उठाने लगे थे, तब उन्होंने 2018 में अपना छठा गोल्ड मेडल (ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट) जीतकर सबको चुप करा दिया।
मैरी कॉम को भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म विभूषण भी मिला। यह उनके और मणिपुर के उस छोटे साधारण किसान परिवार के लिए गर्व का पल था।
मैरी कॉम की इस शानदार जर्नी पर 2014 में बॉलीवुड में मैरी कॉम नाम की फिल्म बनी। जिसमें प्रियंका चोपड़ा ने उनका रोल निभाया।