इतिहास को कैमरे में कैद करने वाले रघु राय का निधन, इन तस्वीरों ने बदली थी दुनिया
मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले दो साल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। रविवार 26 अप्रैल 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें भारतीय फोटोग्राफी पत्रकारिता का एक बड़ा और दिग्गज चेहरा माना जाता है। आइए देखतें हैं उनकी कुछ ऐतेहासिक तस्वीरें...
रघुराय ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की ये तस्वीर ली थी। जिसमें एक मासूम बच्चे का निर्जीव शरीर मिट्टी में दबा दिख रहा था।
रघुराय ने बांग्लादेश युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों और शरणार्थियों के दृश्य को कैद किया था। उनकी तस्वीरें युद्ध की भयावहता और मानवीय त्रासदी को उजागर करती हैं।
रघुराय ने इंदिरा गांधी के निधन के बाद दिल्ली में हुए दंगे और उनके अंतिम संस्कार की तस्वीरें ली थीं। यह तस्वीरें उस समय के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष को बेहतरीन तरीके से चित्रित करती हैं।
कश्मीर में हिंसा के समय, रघुराय ने कश्मीरी शरणार्थियों की दुर्दशा को अपनी तस्वीरों में उतारा। यह तस्वीरें उस समय की मानवीय त्रासदी को बहुत प्रभावी तरीके से पेश करती हैं।
रघुराय ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की तस्वीरें लीं, जो भारत के इतिहास में एक काला अध्याय बन चुका है। इन तस्वीरों में हिंसा और सामाजिक संघर्ष का चित्रण किया गया है।
रघुराय ने ताज महल की एक क्लासिक और ऐतिहासिक तस्वीर ली है, जो भारतीय धरोहर के प्रतीक के रूप में मानी जाती है। यह तस्वीर ताज महल की सुंदरता और उसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है।
रघुराय ने हैदराबाद के पुराने बाजार की तस्वीरें ली, जो उस समय के भारतीय बाजार की जीवंतता और संस्कृति को प्रदर्शित करती हैं।
मशहूर फोटोग्राफर रघु राय ने खजुराहो में एक सारस और उसके मानवीय अभिभावक के अटूट बंधन को कैमरे में उतारा है। यह तस्वीर आधुनिक समय में इंसान और जीव के बीच के संबंद को दिखाता है।
रघु राय द्वारा 1983 में खींची गई यह तस्वीर मदर टेरेसा के व्यक्तित्व को बखूबी बयां करती है। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित और मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक मदर टेरेसा एक जीवंत मिसाल है।