जगन्नाथ पुरी मंदिर के अनोखे रहस्य, मौजूद है श्रीकृष्ण का अंश, पुजारी आंखो पर बांधते है पट्टी
ओडिशा का श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर चार धामों में से एक है। यहां भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं।
मंदिर के सबसे ऊपर लगा झंडा (ध्वज) हमेशा हवा की उल्टी दिशा में उड़ता है। यह बात आज भी एक बहुत बड़ा और अनसुलझा रहस्य है।
माना जाता है कि जगन्नाथ मंदिर में रखी भगवान जगन्नाथ जी की मूर्ति के अंदर आज भी श्रीकृष्ण का दिल मौजूद है, जो आज भी धड़कता है। इसे ब्रह्म पदार्थ कहते हैं।
जब पुजारी भगवान जगन्नाथ के दिल को पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में रखते हैं, तो वे इसे देख न सकें, इसलिए आंखों पर पट्टी बांधकर यह काम करते हैं।
jagannathpuri : ब्रह्म पदार्थ (दिल) बदलने की यह पूरी प्रक्रिया अंधेरे में और पूरी गोपनीयता के साथ की जाती है। मंदिर और शहर की बिजली भी काट दी जाती है।
Jagannath Puri Temple : भगवान की पुरानी मूर्तियों को 12 से 19 साल के बीच में बदला जाता है। इस परंपरा को 'नव कलेवर' कहते हैं। नई मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनाई जाती हैं।
Latest Religious News: मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर की परछाईं किसी भी समय जमीन पर नहीं दिखती। (धार्मिक अपडेट) यह भी मंदिर को बनाने के तरीके का एक बड़ा रहस्य है।